जन प्रवाद, ब्यूरो।
नोएडा। टीएमसी द्वारा एसआईआर के खिलाफ दायर याचिकाओं के खिलाफ आज सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक जवाब दिया। तृणमूल कांग्रेस की ओर से कहा गया था कि भाजपा के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में फार्म-6 जमा करवा रहे हैं। लगातार मतदाताओं के नाम सूची में शामिल करवाए जा रहे हैं। उसकी इस दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसमें कुछ गलत नहीं है और ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से टीएमसी को बड़ा झटका लगा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने राज्य में एसआईआर के खिलाफ दायर याचिकाओं की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। चीफ जस्टिस ने कहा कि आप आपत्तियां दर्ज कर सकते हैं। बेंच ने कहा कि यदि आपको किसी का नाम जोडे जाने से आपत्ति है तो उस पर चुनाव आयोग में रिपोर्ट दर्ज करवा सकते हैं।

बता दें कि टीएमसी का पक्ष रख रहे वकील कल्याण बनर्जी ने एक मामले का उदाहरएण दिया। उन्होंने कहा कि एक ही व्यक्ति ने 30 हजार फार्म-6 का प्रयोग वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने या फिर संसदीय क्षेत्र बदलने की स्थिति में किया जाता है। अधिवक्ता ने कहा कि पूरक सूचियां आ चुकी हैं। इसके बाद भी चुनाव आयोग के नए नोटिफिकेशन में फार्म-6 स्वीकार करने की बात कही गई है, लेकिन जब वोटर लिस्ट की पूरक सूची आ गई है और प्रक्रिया बढ़ चकी है तो फिर फार्म-6 क्यों मंगाए जा रहे हैं। उनके बंडल तैयार होकर आ रहे हैं। मैं किसी भी राजनीतिक दल पर इसके लिए आरोप नहीं लगा रहा।

टीएमसी की ओर से रखी गईं सभी आपत्तियों को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की बात करना जल्दबाजी होगा। पहले पूरी प्रक्रिया को समझने की जरूरत है। अदालत ने कहा कि हम इस मामले को बंद नहीं कर रहे हैं। इसको समय आने पर देखा जाएगा।
वहीं दूसरी ओर चुनाव आयोग का पक्ष रखने वाले वकील डीएस नायडू ने कहा कि नियम यह कहता है कि मतदाताओं के नाम उम्मीदवारों के नामांकन के आखिरी दिन तक शामिल किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई आज 18 साल का हो रहा है और वह मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाना चाहता है तो वह ऐसा कर सकता है।
बता दें कि पश्चिम बंगाल में चुनाव का बिगुल बच चुका है। मतदान की तिथि घोषित होते हुए पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों में आचार संहिता लागू हो गई। अब टीएमसी को भाजपा द्वारा जुड़वाए जा रहे नामों से परेशानी हो रही है। इसलिए उसने सुप्रीम कोर्ट का सहारा लिया। बताते चलें कि एसआईआर का टीएमसी पहले से ही विरोध कर रही है। एसआईआर के तहत पश्चिम बंगाल में करीब 76 लाख मतदाताओं का नाम काट दिया गया था।





