नौसेना को मिला समंदर का बादशाह ‘मालवन’

जन प्रवाद, ब्यूरो।
नोएडा। भारतीय नौसेना को सशक्त करने की दिशा में एक और बड़ी सफलता मिली है। मंगलवार यानी 31 मार्च को मालवन नामक पनडुब्बी रोधी युद्धक शैलो वॉटर क्राफ्ट को भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया है। स्वदेशी रक्षा निर्माण को सशक्त करने वाली यह आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत यह ऐतिहासिक उपलब्धि है। 


बता दें कि इस युद्धपोत का निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड यानी सीएसएल द्वारा किया गया है। नौसेना की मांग और आवश्यताओं के अनुरूप यह स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किए जा रहे आठ युद्धपोतों में दूसरा जहाज है। रक्षा विशेषज्ञों की मानें तो इसके शामिल होने से अंडरवाटर वारफेयर यानी पानी के अंदर युद्ध करने की क्षमता में बेहताशा वृद्धि हुई है। 


बता दें कि मालवान युद्धपोत का नाम महाराष्ट्र के ऐतिहासिक तटीय शहर मालवन के नाम पर रखा गया है। यह छत्रपति शिवाजी महाराज की गौरवशाली विरासत से जुड़ा हुआ है। इसमें 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। यह रक्षा उत्पादन में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों सहित घरेलू उद्योग की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। इसकी लंबाई करीब 80 मीटर और वजन करीब 1100 टन बताया जा रहा है। मालवन आधुनिक रडार, टॉरपीडो और एंटी सबमरीन रॉकेट से लैस है। यह पानी के अंदर छिपे हुए खतरों का सही से पता लगाने और उन्हें नेस्तनाबूत करने में सक्षम है।