लांग रेंज एयर-टू-सर्फेस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बना रहा डीआरडीओ, दुश्मन के गुप्त ठिकाने होंगे ध्वस्त

जनप्रवाद ब्यूरो, टीम। भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को एक और बड़ा बल मिलने जा रहा है।  डीआरडीओ की लांग रेंज एयर-टू-सर्फेस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल परियोजना को सरकार ने हरी झंडी दे दी है। यह मिसाइल आसमान में कहर बनकर दुश्मन पर टूटेगी। चाहे चीन का गुप्त सैन्य ठिकाना हो या पाकिस्तान का किराना हिल्स सभी इसके एक ही वार में तबाह हो जाएंगे।
सीज फायर का प्रभाव नहीं

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भले ही सीज फायर का ऐलान कर दिया हो लेकिन दोनों तरफ से मिसाइल हमले जारी हैं। इजरायल ने आज सुबह अपनी तीसरी मिसाइल चेतावनी जारी की है। वहां की मीडिया के अनुसार पश्चिमी नेगेव और अराद क्षेत्र में धमाकों की आवाजें सुनी गईं हैं। यानी ईरान का मिसाइल हमला रुका नहीं है। वहीं, जमीनी हकीकत ये है कि ईरान के दो बड़े औद्योगिक शहरों खुर्रमशहर और इस्फहान में सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात भारी हमले हुए। इन हमलों से ईरान का पावर पावर ग्रिड और गैस सप्लाई नेटवर्क बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू का इस बो में बयान भी आया है। उन्होंने कहा कि ईरान पर हमले पहले की तरह जारी है। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के एनर्जी, पावर इंफ्रास्ट्रक्चर समेत पावर प्लांट्स पर हमले पांच दिनों तक रोकने का ऐलान किया था, इसके बावजूद ऐसा होता नहीं दिख रहा है। इन बातों से साफ हो जाता है कि दुनिया में जिसके पास जितनी ताकतवर मिसाइल होगी उसे उतना ज्यादा पॉवरफुल देश माना जाएगा। 
सुरक्षा को लेकर सशंकित देश

ईरान जंग से दुनिया के तमाम देश अपनी सुरक्षा को लेकर सशंकित हो चुके हैं। भारत के लिए तो इस तरह की चिंताएं अन्य देशों से कहीं ज्यादा हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि एक तरफ चीन तो दूसरी ओर पाकिस्तान जैसा देश है। भारत इन दोनों से होने वाले खतरों को बखूबी समझता है। यही वजह है कि भारत ने अब आधुनिक और बेहद ताकतवर मिसाइल बनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ के एक बड़े प्रोजेक्ट को सरकार ने हरी झंडी दे दी है। यह भारतीय वायुसेना की स्ट्राइक क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी करने वाली परियोजना मानी जा रही है। इसके तहत अगली पीढ़ी की लांग रेंज एयर-टू-सर्फेस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित की जाएगी। जिसे लंबी दूरी से दुश्मन के जमीनी और संभावित समुद्री लक्ष्यों पर सटीक प्रहार करने के लिए विकसित किया जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी तूफानी रफ्तार है, जो इसे पारंपरिक सबसोनिक मिसाइलों की तुलना में कहीं अधिक घातक बनाती है। माना जा रहा है कि इसमें रैमजेट प्रोपल्शन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। फिलहाल इसकी सटीक मारक क्षमता और रेंज से जुड़ी जानकारियां गोपनीय रखी गई हैं। इस बारे में रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिसाइल सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्यों को भेदने में सक्षम होगी। 
सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की रफ्तार तेज]


बता दें कि आमतौर पर सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की रफ्तार 2500 से 3700 किलोमीटर प्रति घंटे की होती है। एयर-टू-सरफेस मिसाइल को फाइटर जेट में लगाकर टार्गेट पर अटैक किया जाता है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन का प्लान है कि इसे एसयू-30 एमकेआई में सेट किया जाए। इससे दुश्मन के एयरस्पेस या एयर डिफेंस सिस्टम की जद में गए बिना ही उसे तबाह किया जा सकेगा। इस मिसाइल से पाकिस्तान के नूर खान जैसे एयरबेस और किराना हिल्स में छिपे परमाणु ठिकानों जैसे संवेदनशील टार्गेट को तबाह किया जा सकेगा। रिपोर्ट के अनुसार एसयू-30 एमकेआई  पर इस मिसाइल के कैरिज ट्रायल जल्द ही शुरू होने वाले हैं। बता दें कि  एसयू-30 एमकेआई  भारतीय वायुसेना की रीढ़ माना जाता है। इसकी भारी पेलोड क्षमता, लंबी उड़ान सीमा और उन्नत मिसाइलों को दागने की क्षमता के कारण इसे नई मिसाइल के लिए आदर्श प्लेटफॉर्म माना जा रहा है।