लखीमपुर खीरी में मिले अनोखे रंग वाले सांप ने वैज्ञानिकों का ध्यान खींचा

लखीमपुर खीरी, एजेंसी। लखीमपुर खीरी जिले के दुधवा क्षेत्र के सुमेर नगर गांव में एक घर से हाल में बचाए गए करैत सांप के अनोखे रंग ने वैज्ञानिकों का ध्यान आकर्षित किया है। आमतौर पर करैत में दिखाई देने वाली छल्लेदार धारियां इस सांप के शरीर पर नहीं हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि इसके असामान्य रंग-रूप का कारण जानने और यह पता लगाने के लिए इसकी शारीरिक बनावट और आनुवंशिक गुणों का अध्ययन करना जरूरी है कि यह ‘लेसर ब्लैक करैत’ है या ‘कॉमन करैत’ की कोई दुर्लभ प्रजाति। दुधवा बाघ अभयारण्य (डीटीआर) के क्षेत्र निदेशक डॉ. एच. राजमोहन ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘बचाया गया सांप दुधवा क्षेत्र में दुर्लभ है और अंदेशा है कि यह ‘लेसर ब्लैक करैत’ है जो आमतौर पर दुधवा के तराई क्षेत्र में नहीं पाया जाता।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस सांप के बारे में अध्ययन के लिए जाने-माने सरीसृप विशेषज्ञों से संपर्क किया जाएगा। यह दुधवा की समृद्ध जैव विविधता और पारिस्थितिकी को दर्शाता है, जहां दुर्लभ प्रजातियों को सुरक्षा और संरक्षण मिला है।’’ इस सांप को 16 अगस्त को संपूर्णानगर वन क्षेत्र के सुमेर नगर में एक घर से स्थानीय सांप बचावकर्मी निशान सिंह ने पकड़ा था। दुधवा के सांप बचावकर्मी नजरुन निशान ने शुरू में इसकी पहचान ‘कॉमन करैत’ के रूप में की थी। हालांकि, सांप का काफी हल्का रंग और शरीर पर आमतौर पर ‘कॉमन करैत’ में पाई जाने वाली छल्लेदार धारियों का न होना संदेह का कारण बना। बचावकर्मियों ने इस सांप का रिकॉर्ड तैयार किया और दुधवा के जीव वैज्ञानिकों तथा पशु चिकित्सा विशेषज्ञों से सलाह ली। दुधवा के पशु चिकित्सक डॉ. दया शंकर ने सांप की जांच की और इस खोज को असामान्य बताया। उन्होंने कहा कि दुधवा में यह पहली बार है, जब उन्होंने इतने हल्के रंग और बिना छल्लेदार धारियों वाला करैत देखा है। देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान के वरिष्ठ जीवविज्ञानी विपुल मौर्य ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि यह अवलोकन दिलचस्प है और इस पर आगे शोध की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि खास तौर पर इसलिए भी अध्ययन जरूरी है क्योंकि दुधवा सहित तराई क्षेत्र सांपों की समृद्ध विविधता के लिए जाना जाता है। मौर्य ने कहा, ‘‘करैत में धारियों का हल्का होना या उनका गायब होना उम्र बढ़ने के साथ रंग और शरीर में होने वाले बदलाव से जुड़ा हो सकता है इसे ‘ओन्टोजेनेटिक कलर पैटर्न शिफ्ट’ कहा जाता है।’’ उन्होंने कहा कि इस मामले में शारीरिक बनावट और आनुवंशिक गुणों का विस्तृत अध्ययन करने की जरूरत है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह ‘कॉमन करैत’ है या ‘लेसर ब्लैक करैत’ और इसका असामान्य रूप प्राकृतिक बदलाव का नतीजा है या रंग में किसी अन्य तरह का असामान्य अंतर है।