भारत को मिलेगा रूस का ब्रह्मास्त्र, 8000 हजार किलोमीटर दूर से ही भाप लेगा खतरा

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। भारत ने वोरोनिश रडार सिस्टम खरीदने के लिए रूस के साथ बातचीत को अंतिम रूप दे दिया है।  यह लगभग 4 अरब डॉलर का रक्षा सौदा माना जा रहा है। वोरोनिश को रूस की सेना का ब्रह्मास्त्र कहा जाता है। यह रडार इतना शक्तिशाली है कि यह 8000 हजार किलोमीटर दूर से ही हाइपरसोनिक मिसाइल समेत अन्य हवाई और अंतरिक्ष से आ रहे खतरों की पहचान कर लेता है।
पुतिन ने भारत को दिए कई बड़े आफर 


रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत को कई बड़े आफर दिए हैं। इसमें एसयू-57 स्टील्थ फाइटर, एसयू 30 एमकेआई अपग्रेड, एस-400 शामिल हैं। इसके अलावा पैंटसिर एसएम-1 शॉर्ट-रेंज मिसाइल सिस्टम और अकुला-क्लास न्यूक्लियर सबमरीन और वोरोनिश ट स्ट्रैटेजिक रडार पर भी अहम प्रस्ताव दिया है। वोरोनिश रडार प्रणाली से बड़े इलाके में हवाई खतरों का पता लगाने और उनका जवाब देने की क्षमता रखता है। बता दें कि वोरोनिश रडार प्रणाली को रूस के अल्माज-एंटे कॉरपोरेशन ने बनाया है। यह मिसाइल सिस्टम और रडार तकनीक में अपनी विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है। यह रडार धरती से 8,000 किलोमीटर से अधिक की ऊंचाई और 6,000 किलोमीटर से अधिक दूरी के रडार बैलिस्टिक मिसाइलों की पहचान कर लेता है। इसके अलावा स्टील्थ एयरक्राफ्ट, फाइटर जेट और अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों सहित कई खतरों का पता लगा सकता है और उन्हें ट्रैक कर सकता है।  
एक साथ 500 से अधिक चीजों की निगरानी

अल्माज-एंटे के अनुसार यह सिस्टम एक साथ 500 से अधिक उड़ने वाली चीजों की निगरानी कर सकता है। अंतरिक्ष में पृथ्वी के निकट की वस्तुओं को भी ट्रैक कर सकता है। इस एडवांस रडार से चीन, दक्षिण एशिया और हिंद महासागर सहित महत्वपूर्ण इलाकों पर अपनी निगरानी को बढ़ाकर भारत को रणनीतिक लाभ मिलने की उम्मीद है। यह क्षमता क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की उभरती सुरक्षा जरूरतों को पूरा करेगी।
दिसंबर 2024 से चल रही बातचीत

बता दें कि रिपोर्ट्स के अनुसार दिसंबर 2024 से इस पर बातचीत चल रही थी।  भारत और रूस कर्नाटक के चित्रदुर्ग में रूसी वोरोनिश बैलिस्टिक मिसाइल हमले की शुरूआती चेतावनी देने वाला रडार लगाने के लिए एक समझौते को अंतिम रूप दे रहे थे। बताया जा रहा है कि अल्माज-एंटे की तरफ से विकसित किए गये इस रडार को 4 अरब डॉलर में खरीदने के लिए बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी थी। वोरोनिश रडार सिस्टम अंतरिक्ष से आने वाले खतरों के बारे में भी जानकारी देने में सक्षम है। यह रडार फेज्ड-एरे टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करता है। जिससे इलेक्ट्रॉनिक बीम को तेजी से घुमाया जा सकता है। इस वजह से ये पुराने सिस्टम जैसे कि निप्र और डार्याल रडार के मुकाबले काफी ज्यादा शक्तिशाली और मैकेनिकल रूप से कम जटिल है। इनकी खासियत इनका छोटा आकार, कम ऊर्जा की खपत और पिछली पीढ़ियों के मुकाबले कम समय में बनने की क्षमता है। 
वोरोनिश सिस्टम रणनीतिक महत्व 

इसके अलावा वोरोनिश सिस्टम का रणनीतिक महत्व इसके बड़े इलाकों को कवर करने की क्षमता में है। रूस में फैली इसकी मुख्य यूनिट्स यूरोप, एशिया और उत्तरी अमेरिका को कवर कर सकती हैं। यह नेटवर्क रूस को संभावित मिसाइल खतरों से एक मजबूत सुरक्षा कवच देता है और समय रहते पता लगाकर व चेतावनी देकर राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करता है। भारत में अगर इस इंस्टॉल किया जाता है तो ये पूरा पाकिस्तान और आधे से ज्यादा चीन को कवर कर लेगा। बता दें कि वोरोनिश रडार कई तरह के होते हैं जिनमें वोरोनिश-एम, वोरोनिश-डीएम और वोरोनिश-एसएम शामिल हैं। हर एक को खास तरह से पता लगाने के काम या बेहतर परफॉर्मेंस के लिए बनाया गया है। अगर हम वोरोनिश- एम की बात करें तो यह लंबी दूरी पर चीजों का पता लगाने के लिए बनाया गया है। यह रडार मध्यम और लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों की शुरूआती चेतावनी देने में सक्षम है। इसके अलावा वोरोनिश- डीएम छोटे टारगेट के लिए बेहतर रिजॉल्यूशन और ट्रैकिंग सटीकता देता है। इसी तरह वोरोनिश-एसएम सटीक ट्रैकिंग और क्लटर रिजेक्शन यानी अनावश्यक सिग्नल को हटाने के लिए बेहतर क्षमताएं देता है।