खतरनाक मोड पर पहुंचा रूस-यूक्रेन युद्ध, हकीकत बनती दिख रही हैं विज्ञान-कथाएं 

जनप्रवाद ब्यूरो, टीम। रूस-यूक्रेन युद्ध अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां विज्ञान-कथाएं हकीकत बनती दिख रही हैं। यहां बंदूकों से लैस मानवरहित वाहनों यानी किलर ड्रोन की सेना ने धावा बोला। उसने फायरिंग से रूस की सेना की टुकड़ी को बेबस कर दिया। अंत में हालात ये बन गए कि सैनिकों को एक शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा।
युद्ध के बदल रहे हैं नियम और तरीके 


युद्ध के नियम और तरीके बदल रहे हैं। वेनेजुएला और ईरान में अमेरिका ने एआई का इस्तेमाल कर दुनिया को चौंका दिया। अब रूस-यूक्रेन युद्ध में रोबोट आर्मी ने जंग लड़ना शुरू कर दिया है। ये जमीन, हवा और पानी में अपनी सेना के लिए लड़ रहे हैं। साथ ही दुश्मन सैनिकों को बंदी तक बना रहे हैं। यह बातें फिल्मों की तरह लग सकती है, लेकिन यह वास्तविक है। रूस-यूक्रेन युद्ध में ऐसी-ऐसी तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है, जो भविष्य में युद्ध लड़ने के तरीकों को ही बदल देगा। बता दें कि अक्सर फिक्शन मूवी में रोबोटों से लड़ाई दिखाई जाती है। इसमें यह युद्ध बेहद भयानक दिखाई देता है। अब यह हकीकत बनता दिख रहा है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने खुलासा किया है कि उनकी सेना के ग्राउंड रोबोटिक सिस्टम्स व ड्रोन ने मिलकर एक रूसी सैन्य ठिकाने पर कब्जा कर लिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरी सैन्य कार्रवाई में यूक्रेन का एक भी सैनिक शामिल नहीं था। रूसी सैनिकों को रोबोटों के आगे आत्मसमर्पण करने को मजबूर होना पड़ा। विश्व के किसी भी युद्ध में यह ऐसी पहली घटना मानी जा रही है। हालांकि उन्होंने उस स्थान का खुलासा नहीं किया, जहां इस आपरेशन को अंजाम दिया गया। 
रक्षा विशेषज्ञों ने किया दावा
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जेलेंस्की का यह दावा पूरी तरह सही है, तो यह भविष्य की जंग की एक जीवंत मिसाल बन सकता है। जेलेंस्की के सलाहकार अलेक्जेंडर कामिशिन के मुताबिक आने वाले समय में अनमैन्ड ग्राउंड व्हीकल युद्ध की पूरी तस्वीर बदल देंगे। फिलहाल यूक्रेन की 30 प्रतिशत पैदल सेना को तत्काल रोबोट से बदला जा सकता है। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने एक्स पर लिखा कि इस आॅपरेशन को पूरी तरह से मानव रहित प्लेटफॉर्म ने अंजाम दिया। यूक्रेन के रेटेल टर्मिट, अर्दल व जमी जैसे रोबोटिक सिस्टम्स ने पिछले तीन महीने में 22,000 से ज्यादा मिशनों को अंजाम दिया है। उन्होंने कहा कि जहां पहले एक योद्धा को खतरनाक इलाकों में जाना पड़ता था, अब वहां रोबोट भेजे जा रहे हैं। इससे हजारों यूक्रेनी सैनिकों की जान बचाई जा सकी है। 
संयुक्त रूप से उत्पादन करने की योजना


बता दें कि यूक्रेन और जर्मनी उन्नत ड्रोन और युद्ध में परखी गईं अन्य रक्षा प्रणालियों का उत्पादन संयुक्त रूप से करने की योजना पर काम कर रहे हैं। यूक्रेन, रूस के पूर्ण आक्रमण के खिलाफ पिछले चार साल से अधिक समय से जारी युद्ध को और तेज करने की कोशिश कर रहा है। इस लिहाज से जर्मनी के साथ रक्षा क्षेत्र को लेकर बनी सहमति अहम है। रूस ने अब तक यूक्रेन के लगभग 20 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा कर लिया है। इसमें क्रीमिया प्रायद्वीप भी शामिल है, जिसे रूस ने 2014 में अपने कब्जे में ले लिया था।
युद्ध में रोबोटों का इस्तेमाल 


युद्ध में रोबोटों के इस्तेमाल पर रक्षा जानकारों का कहना है कि यह पूरी दुनिया को प्रभावित करेगा। आने वाले समय में सैनिकों की संख्या में काफी कमी आएगी। जंग का मैदान रोबोटों से पट जाएगा। हर देश इस तकनीक पर काम करेगा। कुछ देश बदलते युद्ध के तरीकों को लेकर तैयार भी हो रहे हैं। यह तरीका मिसाइल तकनीक से कहीं आगे होगा। लंदन के थिंक-टैंक चैथम हाउस ने कहा कि आने वाला स्ट्राइक रोबोट का होगा। युद्धक्षेत्र में एआई से लैस रोबोटों का इस्तेमाल बड़े झुंडों के रुप में किया जाएगा।