संस्कार और समरसता से ही भारत बनेगा विश्वगुरु : कृपाशंकर

जन प्रवाद, ब्यूरो।
नोएडा। नेह नीड़ फाउंडेशन समाज में एक दीप से दूसरा दीप जलाने का कार्य कर रहा है। वंचित बस्तियों के बच्चों को शिक्षा, संस्कार और स्वावलंबन से जोड़ना ही भारत को विश्वगुरु बनाने की पहली शर्त है। उक्त बातें बतौर मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड के प्रचार प्रमुख कृपाशंकर ने कहीं। वे सेक्टर-62 स्थित एविअर एजुकेशनल हब में नेह नीड़ फाउंडेशन की ओर से आयोजित मातृ-पितृ पूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि किसी जरूरतमंद को ऊपर उठाने के लिए समाज के सक्षम वर्ग को आगे आना होगा। नेह नीड़ ऐसे ही बच्चों के जीवन में आशा और संस्कार का दीप जला रहा है। मातृ-पितृ पूजन कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों द्वारा माता-पिता का सम्मान देख उनका मन भावुक हो गया। कृपाशंकर ने कहा कि शिक्षा देना आसान है, लेकिन बच्चों में संस्कार जगाना सबसे कठिन कार्य है। नेह नीड़ यह कार्य सफलतापूर्वक कर रहा है। उन्होंने कहा कि हर बच्चे में प्रतिभा होती है, जरूरत केवल उसे पहचानने और आगे बढ़ाने की है।


उन्होंने समाज के लोगों से अपील की कि वे नेह नीड़ के कार्यों को कम से कम दस अन्य लोगों तक पहुंचाएं और अधिक से अधिक परिवारों को इस अभियान से जोड़ें। उन्होंने कहा कि यदि वंचित बस्तियों में शिक्षा, संस्कार और स्वावलंबन का वातावरण तैयार होगा तो देश भी मजबूत होगा। कार्यक्रम में बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और मातृ-पितृ पूजन ने सभी उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया।

बतौर विशिष्ट अतिथि मेरठ प्रांत के सह प्रांत प्रचारक आनंद ने कहा कि वंचित और अभावग्रस्त बच्चों के लिए नेह नीड़ जो कार्य कर रहा है, वह समाज के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि भारत की सनातन परंपरा सेवा, करुणा और परमार्थ की रही है तथा नेह नीड़ उसी भावना को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कबीरदास के दोहे ''वृक्ष कबहुं नहीं फल भखैं, नदी न संचै नीर’’ का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में वही जीवन सार्थक है, जो दूसरों के लिए समर्पित हो। उन्होंने कहा कि जब हम अपने आसपास पीड़ित, वंचित और अभावग्रस्त लोगों को देखकर संवेदना महसूस करते हैं, तभी सच्चे अर्थों में मनुष्य कहलाने के अधिकारी होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नेह नीड़ झुग्गी-बस्तियों से बच्चों को लाकर उन्हें शिक्षा, संस्कार और स्वावलंबन से जोड़ने का कार्य कर रहा है। संस्था बच्चों में राष्ट्र और समाज के प्रति कर्तव्यबोध विकसित कर रही है। उन्होंने कहा कि ‘नेह’ का अर्थ प्रेम, ममता और वात्सल्य है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य का दान महादान है। जरूरतमंदों की सेवा ही सच्ची ईश्वर सेवा है।

नेह नीड़ के संस्थापक कन्हैया ने कहा कि इस मातृ-पितृ पूजन कार्यक्रम में समाज के संपन्न और वंचित वर्ग एक साथ उपस्थित होकर सामाजिक समरसता का संदेश दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले परिवारों ने अपने बच्चों का भविष्य संवारने के विश्वास के साथ संस्थान को जिम्मेदारी सौंपी है। कार्यक्रम में बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं और माता-पिता का पूजन कर उनका आशीर्वाद लिया। इस दौरान उपस्थित अभिभावक भावुक नजर आए। कार्यक्रम में शिक्षाविद, समाजसेवी, उद्योगपति और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग भी उपस्थित रहे। सेक्टर-62 स्थित एविअर एजुकेशनल हब में नेह नीड़ फाउंडेशन के बच्चों ने मातृ-पितृ पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड के प्रचार प्रमुख कृपाशंकर मौजूद रहे। विशिष्ट अतिथि मेरठ प्रांत के सह प्रांत प्रचारक आनंद कार्यक्रम में उपस्थित रहे। नेह नीड़ फाउंडेशन के संस्थापक कन्हैया ने बताया कि वर्तमान में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 10 महानगरों की 76 वंचित बस्तियों के 140 बच्चों को ब्रजघाट परिसर में नि:शुल्क आवास, भोजन,
शिक्षा और संस्कार प्रदान किए जा रहे हैं। ग्रीष्म अवकाश पर घर लौटने से पहले बच्चों द्वारा अपने माता-पिता के सम्मान में यह विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।