जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली: चैत्र नवरात्रि की शुरूआत हो चुकी है। गत बृहस्पतिवार यानी 19 मार्च को मां भवानी के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की गई। आज यानी 20 मार्च को मां भवानी के दूसरे स्वरूप माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा की गई। मंदिरों में भक्तों ने मां ब्रह्मचारिणी की विशेष पूजा अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। नवरात्रि के दूसरे दिन भी मंदिरों में भक्तों की कतार देखने को मिली। इसके अलावा लोगों ने घरों में भी पूरे विधि- विधान से पूजा की।
कैसा है मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप
नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है। ब्रह्म' का अर्थ तपस्या और 'चारिणी' का अर्थ आचरण करने वाली है। नारद मुनि की सलाह पर भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए हज़ारों वर्षों की कठोर तपस्या के कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी (अपर्णा) कहा गया। मां ब्रह्मचारिणी के दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमण्डल है। वे श्वेत वस्त्र धारण किए हुए दिव्य रूप में हैं। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से भक्तों को संयम, धैर्य, शक्ति और विजय का आशीर्वाद मिलता है जिससे जीवन में तप का सामर्थ्य बढ़ता है।

मां ब्रह्मचारिणी की कथा
पूर्वजन्म में मां ब्रह्मचारिणी ने हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लिया था और नारदजी के उपदेश से भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी अर्थात् ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया गया। एक हजार वर्ष तक इन्होंने केवल फल-फूल खाकर बिताए और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया। कुछ दिनों तक कठिन उपवास रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के घोर कष्ट सहे। तीन हजार वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाए और भगवान शंकर की आराधना करती रहीं। इसके बाद तो उन्होंने सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिए। कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं। पत्तों को खाना छोड़ देने के कारण ही इनका नाम अपर्णा नाम पड़ गया।

कठिन तपस्या के कारण देवी का शरीर एकदम क्षीण हो गया। देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ने ब्रह्मचारिणी की तपस्या को अभूतपूर्व पुण्य कृत्य बताया, सराहना की और कहा- हे देवी आज तक किसी ने इस तरह की कठोर तपस्या नहीं की। यह तुम्हीं से ही संभव थी। तुम्हारी मनोकामना परिपूर्ण होगी और भगवान चंद्रमौलि शिवजी तुम्हें पति रूप में प्राप्त होंगे। अब तपस्या छोड़कर घर लौट जाओ। जल्द ही तुम्हारे पिता तुम्हें बुलाने आ रहे हैं। इस देवी की कथा का सार यह है कि जीवन के कठिन संघर्षों में भी मन विचलित नहीं होना चाहिए। मां ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से सर्व सिद्धि प्राप्त होती है।
मिश्री-चीनी का लगाएं भोग
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को मिश्री, चीनी या पंचामृत का भोग लगाना सबसे उत्तम माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, उन्हें दूध से बनी मिठाई या शक्कर से बनी बर्फी भी अर्पित की जा सकती है, जिससे परिवार में सुख-समृद्धि और आयु में वृद्धि होती है।





