जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली: आगामी 21 मार्च यानी कल गणगौर पूजा की जाएगी। गणगौर पूजा खासतौर पर राजस्थान में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह व्रत खासतौर पर सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की खुशहाली के लिए रखा जाता है। गणगौर व्रत की सबसे खास बात यह है कि महिलाएं इसे अपने पति से छुपाकर रखती हैं। मान्यता है कि यदि व्रत गुप्त रूप से किया जाए तो इसका पूर्ण फल मिलता है। महिलाएं इस दिन मिट्टी की शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर उनका श्रृंगार करती हैं और विधि-विधान से पूजा करती हैं। पूजा में चढ़ाया गया प्रसाद भी पुरुषों को नहीं दिया जाता। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से व्रत पूर्ण फलदायी होता है, माता पार्वती के आशीर्वाद से अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु की कामना पूरी होती है।

पति से छुपाकर रखा जाता है व्रत
गणगौर व्रत पति से छुपाकर करने की वजह
शास्त्रों के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव के लिए यह व्रत रखा था। उन्होंने पूजा विधिपूर्वक की, लेकिन भगवान शिव को इसके बारे में नहीं बताया। वे इसे गुप्त रूप से पूरा करना चाहती थीं। इसी कारण से आज भी सुहागिन महिलाएं गणगौर व्रत और पूजा छुपाकर करती हैं।
प्रसाद और गुने का महत्व
गणगौर पूजा में जो प्रसाद अर्पित किया जाता है, उसे केवल महिलाएं ही ग्रहण करती हैं। पूजा में चढ़ाए गए सिंदूर से महिलाएं अपनी मांग भरती हैं, जिसे सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। राजस्थान में इस दिन गुने बनाए जाते हैं। गुने मैदा, बेसन और हल्दी से बनाए जाते हैं और गहनों के आकार में माता पार्वती को अर्पित किए जाते हैं। जितने अधिक गुने अर्पित किए जाते हैं, घर में उतनी ही सुख-समृद्धि आती है। पूजा के बाद ये गुने महिलाएं अपनी सास, ननद या जेठानी को देकर आशीर्वाद लेती हैं।





