नयी दिल्ली, एजेंसी। रियल एस्टेट उद्योग और विशेषज्ञों ने बुधवार को कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक के नीतिगत ब्याज दर रेपो में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी के फैसले से आगामी त्योहारों के दौरान आवास मांग पर कुछ असर पड़ सकता है। आरबीआई ने बुधवार को उम्मीद के मुताबिक प्रमुख रेपो दर 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया। करीब चार साल में यह रेपो दर में पहली बढ़ोतरी है। रियल एस्टेट क्षेत्र के शीर्ष निकाय नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (नारेडको) के अध्यक्ष प्रवीण जैन ने कहा, ‘‘ फिलहाल आवासीय मांग मजबूत बनी हुई है। खरीदारों के स्तर पर मजबूत धारणा, त्योहारी मांग और घर खरीदने की दीर्घकालीन जरूरत को देखते हुए हमारा मानना है कि इस बढ़ोतरी का आवासीय बाजार पर प्रभाव सीमित रहेगा।’’ जैन ने कहा, ‘‘त्योहार रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं और इस दौरान ब्याज दरों में स्थिरता घर खरीदारों के लिए सकारात्मक रहती है। हालांकि, महंगाई के दबाव को नियंत्रित करना और अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनाए रखना भी जरूरी है। ऐसे में रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि को व्यापक आर्थिक परिस्थितियों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि रियल एस्टेट क्षेत्र अपनी मौजूदा गति को बनाए रखते हुए मजबूती दिखाता रहेगा। क्रेडाई (कन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शेखर पटेल ने कहा कि आरबीआई के निर्णय से कर्ज लेने की लागत बढ़ेगी। इससे बिक्री पर कुछ असर पड़ सकता है।
आरबीआई की मौद्रिक नीति का असर पूंजी की लागत और उसकी उपलब्धता पर पड़ेगा। पटेल ने यह भी कहा कि रेपो दर में बढ़ोतरी को वैश्विक अनिश्चितताओं और महंगाई संबंधी चिंताओं के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘त्योहार आने वाले हैं, जो आवास बाजार के लिए महत्वपूर्ण समय है। कर्ज लेने की लागत बढ़ने से इस दौरान बिक्री पर कुछ असर पड़ सकता है, हालांकि आवास की बुनियादी मांग मजबूत बनी हुई है।’’ कोलियर्स इंडिया में राष्ट्रीय निदेशक एवं शोध प्रमुख विमल नादर ने कहा, ‘‘इस फैसले से बाहरी अस्थिरता और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से पैदा होने वाले महंगाई के दबाव को लेकर आरबीआई के सतर्क रुख का संकेत मिलता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए नीतिगत दर में बढ़ोतरी से निकट अवधि में मांग कुछ नरम पड़ सकती है, लेकिन क्षेत्र की मजबूत बुनियाद से भारत में ज्यादातर संपत्ति वर्गों पर इसके असर को सीमित रखने में मदद मिलेगी।’’ नादर ने कहा, ‘‘ आवास क्षेत्र में कर्ज लेने की लागत बढ़ने से खासकर कीमत के प्रति संवेदनशील श्रेणियों में, खरीदारों के खरीद संबंधी फैसलों में अधिक सोच-विचार कर आगे बढ़ने की संभावना है। ऐसी स्थिति में बिक्री बढ़ाने के लिए डेवलपर इस वित्तीय दबाव का ज्यादातर हिस्सा खुद वहन कर सकते हैं और त्योहारों के दौरान छूट तथा कीमत तय करने की नई योजनाओं के जरिये घर खरीदारों को राहत दे सकते हैं।’’ सिग्नेचर ग्लोबल (इंडिया) लिमिटेड के संस्थापक एवं चेयरमैन प्रदीप अग्रवाल ने कहा, ‘‘ मुश्किल वृहद आर्थिक हालात के बीच रेपो दर बढ़ाने का फैसला कीमतों में स्थिरता बनाए रखने के उसके संकल्प को दिखाता है। हालांकि बढ़ती आय, शहरीकरण और घर लेने की बढ़ती इच्छा की वजह से घरों की मांग को सहारा मिला है और यह वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद मजबूत बनी हुई है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ दूसरी ओर, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, मुद्रा पर दबाव और लगातार महंगाई के जोखिम ने केंद्रीय बैंक के काम को मुश्किल बना दिया है। आरबीआई ने हमेशा वृद्धि एवं स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखा है और यह फैसला मौजूदा वृहद-आर्थिक हालात को दिखाता है।’’ अग्रवाल ने कहा, ‘‘ इसके बावजूद रेपो दर में स्थिरता मांग की मौजूदा रफ्तार को बेहतर ढंग से बनाए रख सकती थी। ऋण लेने की ज्यादा लागत से खरीदारों का उत्साह कुछ समय के लिए कम हो सकता है। हालांकि मजबूत बुनियाद और आगामी त्योहारों को देखते हुए हमें उम्मीद है कि यह क्षेत्र मजबूत बना रहेगा।’’ मिगसन ग्रुप के प्रबंध निदेशक यश मिगलानी ने कहा, ‘‘ यह फैसला ऐसे समय में आया है जब रियल एस्टेट क्षेत्र में मांग स्थिर बनी हुई है। हालांकि, इस बढ़ोतरी से कर्ज लेने की लागत थोड़ी बढ़ने की संभावना है, लेकिन हमारा मानना है कि मकान खरीदने को इच्छुक खरीदार खरीदारी जारी रखेंगे, खासकर उन बाजारों में जहां रोजगार के बहुत अवसर हैं और बुनियादी ढांचे का विकास हो रहा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ इस फैसले से बाजार में बड़ा व्यवधान आने के बजाय मांग पर कुछ हद तक सीमित असर पड़ सकता है। खरीदार किफायत और संपत्ति से मिलने वाले मूल्य जैसे कारकों को ध्यान में रखकर अपने फैसले लेते रहेंगे।’’ निंबस ग्रुप के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) साहिल अग्रवाल ने कहा, ‘‘ आरबीआई का फैसला वृहद आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और बदलती महंगाई की परिस्थितियों को नियंत्रित करने पर उसके निरंतर ध्यान को दर्शाता है। रियल एस्टेट क्षेत्र मजबूत स्थिति में बना हुआ है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘बुनियादी ढांचे के विकास और उभरते बाजारों में बढ़ते अवसरों के साथ क्षेत्र लगातार मजबूती दिखा रहा है। हम रियल एस्टेट के भविष्य को लेकर आशावादी हैं और उम्मीद करते हैं कि महानगरों के साथ-साथ छोटे और मझोले शहरों में भी मांग बनी रहेगी।’’





