जन प्रवाद, ब्यूरो।
नई दिल्ली। पाकिस्तान द्वारा अमेरिका और ईरान के बीच कराए गए सीजफायर की दुनियाभर में किरकिरी हो रही है। कंगाल पाकिस्तान की मध्यस्थता न तो ईरान मानने को तैयार है और न ही अमेरिका। यहां तक कि 10 सूत्रीय समझौता पत्र को डस्टबिन में डाले जाने की खबरें आ रही हैं। वहीं ईरान के राजदूत ने तो एक्स से सीजफायर की पोस्ट को भी हटा दिया है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान द्वारा ईरान और अमेरिका में कराए गए सीजफायर में पाकिस्तान और ईरान लेबनान को शामिल करने की बात कह रहा है जबकि इजरायल और अमेरिका इसे सिरे से खारिज कर रहे हैं। मंगलवार को सीजफायर के ऐलान के बाद अगले दिन यानी बुधवार को इजरायल ने लेबनान में कोहराम मचा दिया। बेरूत में इजरायल द्वारा दागी गई मिसाइलों से 250 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर है, जबकि करीब 1100 लोग घायल बताए जा रहे हैं।

अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार मरने वालों की संख्या में इजाफा हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार इजरायल ने घनी आबादी, कामर्शिलय और व्यावसायिक क्षेत्रों में पर भी हमला किया जिससे ज्यादा लोग चपेट में आ गए। वहीं ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की ओर से इजरायल को कड़ी चेतावनी दी गई है। चेतावनी में कहा गया है कि अगर दक्षिण लेबनान में हमले नहीं रुके तो ईरान एयर और मिसाइल यूनिट तेल अवीव पर हमले होंगे। बता दें कि लेबनान पर हमले होते ही ईरान ने स्ट्रेट आॅफ होमुर्ज को बंद कर दिया था। खबरें तो यहां तक हैं कि ईरान और ओमान मिलकर होर्मुज पर जहाजों से वसूली करेंगे। बताया जा रहा है एक बैरल पर एक डॉलर के हिसाब से वसूली की जाएगी। बता दें कि अमेरिका और इजरायल लेबनान को इसलिए नहीं शामिल कर रहे हैं वहां हिजबुल्लाह का मामला है। इजरायल कभी भी हिजबुल्लाह को तैयारी का मौका नहीं देना चाहता। इजरायल के लिए हिजबुल्लाह सबसे घातक है।





