जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। पाकिस्तान और उनके हुक्मरानों में अभी अग्नि-5 का खौफ खत्म नहीं हुआ था कि भारत ने एक और खतरनाक मिसाइल के लिए नोटम जारी कर दिया है। भारत अब जिस मिसाइल का परीक्षण करने जा रहा है उसकी संभावित मारक क्षमता 1000 किलोमीटर बताई जा रही है। यह परीक्षण बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में किया जाने वाला है।
नोटम नोटिफिकेशन जारी
भारत ने 21-22 मई के लिए बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में संभावित मिसाइल परीक्षण के लिए एक नोटम नोटिफिकेशन जारी किया है। बता दें कि नोटम एक आधिकारिक सूचना या चेतावनी होती है। जिसे विमानन प्राधिकरण पायलटों, एयरलाइंस और एयर ट्रैफिक कंट्रोल के लिए जारी करता है। इसका मकसद उड़ान सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी देना होता है। पहले इसे नोटिस टू एयरमेन कहा जाता था, लेकिन अब इसे अधिक समावेशी बनाने के लिए नोटिस टू एयर मिशन यानी नोटम कहा जाता है। दूसरी ओर भारत की तरफ से बार-बार होने वाली मिसाइल टेस्ट से पाकिस्तान घबरा गया है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद स्थित रणनीतिक मामलों के थिंक टैंक सेंटर फॉर इंटरनेशनल स्ट्रेटेजिक स्टडीज यानी सीआईएसएस ने बंगाल की खाड़ी में भारत की मिसाइल टेस्ट को लेकर शहबाज सरकार को चेतावनी दी है। सीआईएसएसका कहना है कि नई दिल्ली रणनीतिक, सामरिक और नौसैनिक क्षेत्रों में फैली कई स्तरों वाली मिसाइल क्षमताओं के विकास को तेज करता हुआ दिख रहा है। सीआईएसएस के अनुसार बंगाल की खाड़ी में एक और मिसाइल परीक्षण होने वाला है। इसके पहले भारत ने अग्नि-5 का सफल परीक्षण किया था। यह भारत की मिसाइल परीक्षण और परिचालन क्षमताओं में लगातार हो रहे डेवलपमेंट को दिखाता है।
1000 किलोमीटर से भी ज्यादा मारक क्षमता
भारत जिस मिसाइल का परीक्षण करने वाला है उसकी मारक क्षमता 1000 किलोमीटर से भी ज्यादा मानी जा रही है। ऐसा माना जा रहा है कि इसकी जद में पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान के सामरिक ठिकाने होंगे। इसके अलावा इस मिसाइल से अन्य देशों पर भी तेजी से हमला किया जा सकेगा। यह नई और एडवांस मिसाइल मानी जा रही है। पाकिस्तान इसलिए घबराया हुआ है कि आॅपरेशन सिंदूर के दौरान वह भारतीय मिसाइलों और रक्षा तकनीक को देख चुका है। वह समझ चुका है उसकी रक्षा तैयारियां किस स्तर की हैं। ऐसे में सीआईएसएस का मानना है कि बंगाल की खाड़ी को लगातार उन्नत बैलिस्टिक मिसाइलों, हाइपरसोनिक हथियारों और एंटी-शिप मिसाइलों के परीक्षण क्षेत्र के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। थिंक टैंक ने चेतावनी दी है कि इस प्रकार की गतिविधियां पड़ोसी देशों में खतरे की धारणा को और गहरा कर सकती हैं। इससे दक्षिण एशिया में प्रतिरोधक संतुलन प्रभावित होने की आशंका है। बता दें कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपने मिसाइल कार्यक्रमों को काफी तेजी से आगे बढ़ाया है। भारत डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आॅर्गेनाइजेशन यानी डीआरडीओ के नेतृत्व में देश ने कई उन्नत मिसाइल प्रणालियों का परीक्षण और विकास किया है। इनमें अग्नि श्रृंखला की बैलिस्टिक मिसाइलें, ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डेमॉन्स्ट्रेटर शामिल हैं। इसके अलावा लंबी दूरी की एंटी-शिप मिसाइलें और पनडुब्बियों से दागी जाने वाली रणनीतिक मिसाइल प्रणालियों का भी परीक्षण किया है। भारत भविष्य की नौसैनिक क्षमताओं को मजबूत करने के लिए समुद्र आधारित परमाणु प्रतिरोधक क्षमता पर भी विशेष ध्यान दे रहा है।





