जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। ब्रह्मांड में जीवन को लेकर खगोल वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने चौंकाने वाली संभावना जताई है। उनका मानना है कि ब्रह्मांड में पृथ्वी अकेला ग्रह नहीं है जहा जीवन पनप सकता है। ऐसे अन्य ग्रह भी मौजूद हैं, जो इंसानों और अन्य जीवों के रहने के लिए पृथ्वी से भी कहीं अधिक बेहतर हैं। इन ग्रहों को सुपर-हैबिट-एबल वर्ल्ड्स नाम दिया गया है।
जीवन के सबसे उपयुक्त पृथ्वी
अब तक यही माना जा रहा था कि सौरमंडल में केवल पृथ्वी ही एकमात्र ऐसा ग्रह है, जहां मानव जीवन के अलावा जीव जंतु रह सकते हैं। अब वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं की नई रिसर्च ने पुरानी थ्योरी को पूरी तरह से नकार दिया है। उनके अनुसार ब्रह्मांड में ऐसे ग्रह भी मौजूद हो सकते हैं, जो इंसानों और अन्य जीवों के रहने के लिए पृथ्वी से भी कहीं अधिक बेहतर और सुविधाजनक स्थिति प्रदान करते हैं। इन ग्रहों को सुपर-हैबिट-एबल वर्ल्ड्स नाम दिया गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार सुपरहैबिटेबल उन ग्रहों की दुनिया हैं जहां जीवन के विकसित होने और फलने-फूलने के लिए पृथ्वी की तुलना में भी ज्यादा बेहतरीन और स्थिर माहौल मिल सकता है। इसकी वजह है कि ये ग्रह पृथ्वी से लगभग 20 से 30 प्रतिशत अधिक चौड़े और इसके द्रव्यमान से लगभग दोगुने हो सकते हैं।
वायमंडल से द्रव्यमान का संबंध
वैज्ञानिकों के अनुसार द्रव्यमान का सीधा संबंध हमारे वायमंडल से होता हे। जिस ग्रह का जितना अधिक द्रव्यमान होगा उसका गुरुत्वाकर्षण उतना ही मजबूत होगा। इससे ग्रह घना वायुमंडल बनाए रख सकते हैं। ससे वहां का मौसम अधिक गर्म और स्थिर रहेगा। साथ ही इन ग्रहों पर बड़ा लोहे का कोर एक मजबूत चुंबकीय क्षेत्र पैदा करेगा, जो अंतरिक्ष से आने वाले खतरनाक रेडिएशन से इन ग्रहों की रक्षा करेगा। बता दें कि पृथ्वी के उष्णकटिबंधीय द्वीप और उथला पानी सबसे भरपूर जीवन चक्र का समर्थन करते हैं। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि सुपर-हैबिट-एबल वर्ल्ड्स ग्रहों पर बड़े क्षेत्रफल में फैले ऐसे ही उथले समुद्र और झीलें हो सकती हैं, जो भारी जैव विविधता को बढ़ावा दे सकती हैं। बता दें कि खगोलविद अंतरिक्ष की गहराइयों में इन सुपरहैबिटेबल दुनिया को ढूंढने के लिए अत्याधुनिक स्पेस टेलीस्कोप्स की तैयारी कर रहे हैं। इस काम के लिए यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी का प्लेटो मिशन 2027 में लांच किया जाएगा। यह के-ड्वार्फ के पास बड़े चट्टानी ग्रहों को खोजने में मदद करेगा। अब इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प बात है कि यह खोज एक खास प्रकार के तारे को लेकर की जाएगी। इसके जिसे के-ड्वार्फ कहा जा रहा है। ये तारे हमारे सूरज की तुलना में छोटे, ठंडे और अधिक नारंगी रंग के होते हैं। खास बात यह है कि ये अपने ईंधन को बहुत धीरे-धीरे जलाते हैं, जिससे ये अरबों-खरबों साल तक लगातार चमक सकते हैं। इसके उलट, हमारा सूरज भविष्य में बूढ़ा होकर और अधिक चमकीला बनकर पृथ्वी को गर्म कर देगा।
रेन हेले और जॉन रखे थे विचार
नए ग्रहों की खोज के बारे में 2010 में खगोलविद रेन हेले और जॉन आर्मस्ट्रांग ने भी विचार रखा था। उनके अनुसार जरूरी नहीं कि पृथ्वी ही जीवन के लिए सबसे आदर्श मॉडल हो। पृथ्वी पर जीवन की गाड़ी बहुत ही नाजुक संतुलन पर टिकी है। बता दें कि इससे पहले वैज्ञानिकों ने पहली बार किसी दूरस्थ चट्टानी ग्रह की सतह का विस्तृत अध्ययन किया था। जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप से किए गए इस शोध में एलएचएस 3844 बी नाम के एक सुपर-अर्थ के संकेत मिले थे। जो उसे हमारे सौरमंडल के बुध ग्रह जैसा है। इसके अलावा अन्तरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की टीम ने दो नए सुपर पृथ्वी की तरह ग्रहों की खोज की थी। यह हमारी पृथ्वी से लगभग 100 प्रकाश वर्ष दूर हैं। उम्मीद की जा रही है कि इनमें से एक बिल्कुल पृथ्वी की तरह ही इंसान के रहने लायक हो सकता है। ये सुपर अर्थ यूरेनस और नेपच्यून से हल्के हैं। बेल्जियम के लिऐज विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने यह खोज की थी।





