‘दूसरी जिंदगी मिली’: नेपाल में बाढ़ से बचे लोगों ने सुनाई खौफनाक आपबीती

काठमांडू,एजेंसी। नेपाल के रसुवा जिले में सीमा शुल्क एजेंट के रूप में काम करने वाले राजू बुधाथोकी के लिए बुधवार की सुबह किसी आम दिन की तरह शुरू हुई थी, लेकिन कुछ ही देर में यह जिंदगी बचाने की जद्दोजहद में बदल गई। जमीन कांपने लगी और देखते ही देखते उफनती बाढ़ उनके सामने घरों को बहाकर ले गई। द काठमांडू पोस्ट’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, बुधाथोकी सुबह करीब 8:45 बजे (स्थानीय समय) तिमुरे स्थित अपने कमरे में आराम कर रहे थे, तभी पहाड़ी जोर-जोर से हिलने लगी। उन्हें लगा कि भूकंप आया है। वह बाहर निकलकर पास की पुलिस चौकी की ओर भागे, लेकिन वहां तैनात पुलिसकर्मी भी इलाके से भागते दिखाई दिए। वह तार की बाड़ पार करते समय हाथ में चोट लगने के बावजूद भागते रहे। पीछे मुड़कर देखा तो तिमुरे बाजार में एक के बाद एक मकान बाढ़ के पानी में बह रहे थे। वह आखिरकार करीब 500 मीटर ऊपर स्थित एक जंगल तक पहुंचे और अपनी जान बचाई। अस्पताल के बिस्तर से उन्होंने अखबार को बताया, ‘‘जंगल से जब मैंने तिमुरे की ओर नीचे देखा तो तबाही का मंजर देख कर कांप गया। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे इस तरह दूसरी जिंदगी मिलेगी। अब सब कुछ एक भयानक सपने जैसा लगता है।’’ बुधाथोकी उन लोगों में शामिल हैं जो रसुवागढ़ी और इसके नीचे के कई इलाकों में नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में भारी तबाही मचाने वाली भोटेकोशी नदी की अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन से बाल-बाल बच गए। पुलिस और बचाव दलों ने बृहस्पतिवार रात तक सैकड़ों शव बरामद कर लिए थे, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता थे। एक अन्य सीमा शुल्क एजेंट प्रकाश गौतम ने भी तिमुरे से बच निकलने की खौफनाक कहानी सुनाई। गौतम ने ‘द काठमांडू पोस्ट’ को बताया कि तेज गर्जना सुनाई देने के कुछ ही क्षण बाद बाजार में अंधेरा छा गया और आसमान काले बादल से ढक गया। उन्होंने कहा, ‘‘मैं बिना यह जाने, कि क्या कर रहा हूं, अपने कमरे से बाहर भागा। मुझे पता नहीं था कि कहां जाना है या किस दिशा में भागना है। मैं बस जिंदा रहना चाहता था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ऊपर जंगल से मैं बाढ़ के पानी में तैरते शव देख सकता था। मेरी आंखों के सामने खूबसूरत तिमुरे खंडहर में बदल गया। घर और बस्तियां बह गईं। अब वहां रेत और कीचड़ का विल विस्तार ही नजर आता है।’’ रिपोर्ट के अनुसार, दिन में बचाव नहीं हो पाने के कारण गौतम और अन्य लोगों ने बुधवार की रात जंगल में बिताई। नेपाल सेना के हेलीकॉप्टर से गिराए गए नूडल्स के पैकेट खाकर उन्होंने रात गुजारी। नेपाल सेना का एक हेलीकॉप्टर बृहस्पतिवार सुबह करीब 10 बजे वहां पहुंचा और उन्हें बिदुर ले गया। गौतम ने कहा, ‘‘हेलीकॉप्टर में सवार होने के बाद ही मुझे लगा कि मैं वास्तव में बच गया हूं।’’ दोलखा के तुलसी बहादुर भंडारी को 1बाढ़ का तेज बहाव पहाड़ी की ओर धकेल ले गया और वह बच गए। भंडारी ने अखबार को बताया कि काले कीचड़ और पानी का तेज बहाव अचानक बस्ती में घुस आया और एक के बाद एक मकान ढहने लगे। उन्होंने कहा, ‘‘मैं भागा, लेकिन बाढ़ के पानी ने पूरी ताकत से मुझे उछालकर दूर फेंक दिया।’’ उन्होंने बताया कि ढलान की ओर धकेले जाने के कारण वह बाढ़ में बहने से बच गए। उन्होंने कहा, ‘‘अगर बहाव ने मुझे ढलान की ओर नहीं धकेला होता तो आज मैं जिंदा नहीं होता।’’ बिदुर, त्रिशूली और काठमांडू के अस्पतालों तथा राहत शिविरों में बचे लोग अब अपनी चोटों से उबर रहे हैं। साथ ही वे अपने घरों, रिश्तेदारों, सहकर्मियों और दोस्तों को खोने के सदमे से भी जूझ रहे हैं। अस्पताल में घायल रिश्तेदारों की देखभाल कर रहे राम कुमार राणा ने बताया कि कुछ लोग बाढ़ से बचकर भागते समय रेत और कीचड़ में दब गए। उन्होंने अखबार को बताया, ‘‘वे भाग रहे थे तभी पानी का तेज बहाव उन्हें अपनी चपेट में ले गया और वे उसमें दब गए। बाद में बचाव दलों ने हेलीकॉप्टरों की मदद से उन्हें बाहर निकाला और यहां लाया।’’उन्होंने बताया कि अफरा-तफरी के बीच बच्चे घबरा गए और कुछ गिरकर घायल हो गए। इस तबाही के बाद प्रभावि जिलों में परिवार अपने लापता परिजनों की तलाश में जुटे हैं। नुवाकोट जिले के त्रिशूली में बृहस्पतिवार को परिवार के लोग लापता लोकी जानकारी देने के लिए सैनिक मैदान में एकत्र हुए। एक स्थानीय निवासी ने ‘‘पीटीआई वीडियो’’ से कहा, ‘‘मेरे पिता वहां हैं। वह प्रभावित इलाके में एक पनबिजली परियोजना में काम करते थे। वह लापता हैं। उस सुबह वह ड्यूटी पर थे और तब  म उनसे संपर्क नहीं कर पाए हैं।’’ रसुवा के एक अन्य बचे व्यक्ति ने तबाही का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘वहां कुछ भी नहीं बचा है। मैंने सब कुछ खो दिया।’’ पीटीआई वीडियो से बात करते हुए उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता दोनों लापता हैं। कुछ बचे लोगों ने बताया कि नदी के किनारे रहने वाले लोगों को इलाका खाली करने के लिए अलर्ट मिला था, लेकिन उन्हें बच निकलने के लिए बहुत कम समय मिला। एक स्थानीय निवासी ने पीटीआई वीडियो से कहा, ‘‘हमें करीब 9:35 बजे एक खबर के जरिए चेतावनी मिली कि बाढ़ का पानी आगे बढ़ चुका है और नदी क्षेत्र में रहने वाले सभी लोगों को वहां से निकल जाना चाहिए। लेकिन हमारे पास वहां से निकलने के लिए पर्याप्त समय ही नहीं था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यहां पहले दो पुल हुआ करते थे। अब मुश्किल से कुछ घर बचे हैं। मुझे नहीं पता कि सरकार इस स्थिति को कैसे संभालेगी।’’ नेपाल सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के बचाव दल रसुवा, धादिंग, नुवाकोट और चितवन जिलों में जीवित बचे लोगों तथा अब भी लापता लोगों की तलाश जारी रखे हुए हैं। एक बचाव दल के सदस्य ने पीटीआई वीडियो को बताया कि हताहतों की पूरी संख्या का अभी पता नहीं चल पाया है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, बड़े पैमाने पर जन नि हुई है और करीब 1,000 लोग लापता हैं। बचाव दल के सदस्य ने बताया कि तिब्बत क्षेत्र से अचानक आई बाढ़ का पानी भोटे कोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों में गया। इसने पुलों और स्थानीय ढांचों को बहा दिया तथा बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया। नेपाल की संसद के सदस्य खगेन्द्र सुनार ने कहा कि बचे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और तबाह बस्तियों के पुनर्निर्माण में काफी समय लगेगा। सुपीटीआई वीडियो से कहा, ‘‘बाजार और इस इलाके को फिर से बसाने में निश्चित रूप से काफी समय लगेगा। लेकिन जो लोग बच गए हैं, उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की जरूरत है।  उन्होंने कहा, ‘‘हर राजनीतिक दल योगदान दे रहा है क्योंकि यह बड़ी आपदा है। यह सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है; यह हम सभी की जिम्मेदारी है।’’भीषण बाढ़ से विदेशी नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। नेपाल और भारत के अधिकारियों के अनुसार, 30 से अधिक देशों के नागरिकों समेत हजारों लोग अब भी लापता हैं और लापता लोगों में 288 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।बचाव अभियान जारी रहने के बीच बाढ़ से बचे लोगों के सामने एक दर्दनाक सच्चाई है—वे बाढ़ के पानी से तो बच निकले, लेकिन लौटने पर कई लोगों ने पाया कि उनके घर, काम की जगह और  समुदाय का नामोनिशान मिट चुका है।जो लोग बच गए हैं, उनके लिए जिंदा बचने की राहत अब उन लोगों को खोने के गम के साथ जुड़ गई है, जो बाढ़ से निकल नहीं सके।