जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम के बाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चा है। संगठन की तरह ही सरकार में भी उत्तर प्रदेश समेत आगामी चुनावों वाले राज्यों को इस बार खास तवज्जो दी जा सकती है। वहीं सबसे बड़ी बात यह है कि भाजपा की विरोधी मानी जाती रही डीएमके इस बार मंत्रिमंडल में शामिल हो सकती है। दो दिन पहले भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपनी टीम के गठन में चुनावी राज्यों पर बड़ा दांव खेला है। नवीन ने सबसे ज्यादा तवज्जो उत्तर प्रदेश को दी है। इस राज्य से आठ नेताओं को राष्ट्रीय टीम में जगह दी गई है। लोकसभा चुनाव में झटके खा चुकी भाजपा ने उत्तर प्रदेश के पिछड़े समुदाय पर सबसे ज्यादा दांव लगाया है। नई टीम के चेहरों की बात करें तो इसमें तीन ओबीसी चेहरे शामिल किए गए हैं। वहीं दो मुस्लिम नेताओं को भी पद दिए गए हैं। पूर्वांचल से आने वाले ब्राह्मण चेहरे और बस्ती से दो बार के सांसद हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है। यानी पिछड़ों और अल्पसंख्यकों को जगह देने के साथ भाजपा ने अपने पारंपरिक सामाजिक आधार को भी साधने की कोशिश की है। भाजपा में जिस तरह यूपी को प्रतिनिधित्व दिया गया है, उससे साफ है कि 2027 के लिए भाजपा ने तैयारी शुरू कर दी है। अब यह समय ही बताएगा कि यह नई टीम भाजपा की रणनीति को कितनी धार दे पाती है।
नई राष्ट्रीय टीम की घोषणा
दूसरी ओर नई राष्ट्रीय टीम की घोषणा के बाद अब मोदी कैबिनेट में इसी महीने बड़ा फेरबदल हो सकता हैं। चर्चा है कि दो दर्जन मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं। वहीं कुछ नए चेहरों को भी जगह दी सकती हैं। इसी तरह सहयोगी दलों को भी मंत्रालय दिए जा सकते हैं। 2027 के विधानसभा चुनावों में सबसे अहम यूपी की बात करें तो भाजपा के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। चर्चा है कि योगी सरकार में डिप्टी सीएम की भूमिका निभा रहे केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक में से किसी एक को केंद्र में लाया जा सकता है। दोनों नेताओं में से केशव प्रसाद मौर्य का नाम खास तौर पर चर्चा में है। वहीं ब्रजेश पाठक भी विकल्प माने जा रहे हैं। दोनों में से किसी एक को दिल्ली लाने से उत्तर प्रदेश में सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने में मदद मिल सकती है। बता दें कि अगस्त 2026 तक मोदी सरकार तीसरे कार्यकाल का करीब आधा समय पूरा कर चुकी है। पिछले कुछ महीनों में कई ऐसे घटनाक्रम हुए हैं, जिन्होंने कैबिनेट फेरबदल की अटकलों को हवा दी है।
राज्यसभा का कार्यकाल पूरा
इसमें नीट पेपर लीक विवाद के बाद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को अतिरिक्त प्रभार दिया गया। इसके अलावा राज्यसभा का कार्यकाल पूरा होने के बाद रेलवे और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने पद छोड़ दिया था। इसी तरह राज्यसभा कार्यकाल पूरा होने के बाद राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने भी इस्तीफा दे दिया था। साथ ही कई केंद्रीय मंत्रियों को पहले ही संगठन में अहम जिम्मेदारियां दी गई थी। इनमें प्रमुख नामों की बात करें तो राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष और पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष बनाया गया है। बता दें कि एक व्यक्ति-एक पद का फॉर्मूला लागू होता है। ऐसे में कयास लगाए रहे हैं इन मंत्रियों की जगह नए चेहरों को मंत्री बनाया जा सकता है।
हरदीप पुरी का कार्यकाल पूरा
इसके अलावा पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी का राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है। उनके दोबारा राज्यसभा भेजे जाने को लेकर स्थिति साफ नहीं है। अगर उनका दोबारा नामांकन नहीं होता है तो उन्हें मंत्री पद छोड़ना होगा। वहीं मंत्रिमंडल में महिलाओं को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की तैयारी के संकेत हैं। राजस्थान से डॉ. अलका गुर्जर का नाम चर्चा में है। इस बार मंत्रिमंडल विस्तार में दक्षिण भारत को लेकर बड़ा बदलाव देखा जा सकता है। बता दें कि दक्षिण भारत बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। ऐसे में आगामी लोकसभा चुनाव को देखते बीजेपी दक्षिण की क्षेत्रीय पार्टियों को एनडीए में लाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में तमिलनाडु से द्रमुक को केंद्र में जगह मिलने की संभावना है। राष्ट्रीय संगठन में दक्षिण भारत को अपेक्षाकृत कम प्रतिनिधित्व मिलने के बाद सरकार में इसकी भरपाई की जा सकती है। इसके अलावा महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे भी एक और कैबिनेट पद की मांग कर रहे हैं। उनके पास 13 लोकसभा सांसद हैं। साथ ही शिवसेना और एनसीपी के दोनों धड़ों के एक या दो नेताओं को केंद्र में मंत्री बनाया जा सकता है। वहीं चुनावी राज्य हिमाचल प्रदेश से जेपी नड्डा के बाद अनुराग ठाकुर को लेकर भी फैसला हो सकता है। उम्मीद जताई जा रही है पीयूष गोयल ऐसा नेता होंगे जिन पर एक व्यक्ति-एक पद का फॉर्मूला लागू नहीं होगा। बता दें कि उन्हें भाजपा ने कोषाध्यक्ष बनाया है। इसके बावजूद संकेत हैं कि वह मंत्री बने रहेंगे। वाणिज्य मंत्री के तौर पर व्यापार समझौतों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। अमेरिका के साथ बातचीत में उतार-चढ़ाव के बीच सरकार फिलहाल उनकी जिम्मेदारी बदलने के पक्ष में नहीं दिख रही है।





