जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। भारत को सदाबहार दोस्त रूस ने बड़ा आफर दिया है। य प्रस्ताव कैलिबर मिसाइल को लेकर है। यह मिसाइल ब्रह्मोस जैसा वार करती है। पानी के भीतर से यह 1500 किलोमीटर तबाही मचाने की क्षमता रखती है।
क्रूज मिसाइलों की बढ़ी अहमियत
अमेरिका और ईरान युुद्ध ने पनडुब्बियों से लांच होने वाली क्रूज मिसाइलों की अहमियत बढ़ा दी है। इस दिशा में डीआरडीओ तेजी से काम कर रहा है। अभी दो दिन पहले ही एक क्रूज मिसाइल का परीक्षण किया था। इसी बीच रूस ने कैलिबर मिसाइल का बड़ा आफर दिया है। नौसना विशेषज्ञों का मानना है कि कैलिबर मिसाइल युद्ध में अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर चुका है। इसे भारत की मौजूदा पनडुब्बियां में फौरन इंटीग्रेट किया जा सकता है। इसके अलावा भविष्य की भारतीय न्यूक्लियर अटैक सबमरीन फ्लीट में भी रूसी कैलिबर मिसाइल को इंटीग्रेट किया जा सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत और रूस के बीच दशकों से नौसैनिक सहयोग रहा है। ऐसे में कैलिबर मिसाइल भारतीय नौसेना के लिए एक मजबूत विकल्प बन सकती है।
रूस के पास कैलिबर-पीएल लैंड अटैक क्रूज मिसाइल
बता दें कि रूस की कैलिबर-पीएल लैंड अटैक क्रूज मिसाइल एक सिस्टम की तरह काम करती है। इसे पनडुब्बियों पर तैनात किया जा सकता है। इसकी मारक क्षमता काफी ज्यादा है। रूस ने जो नवीनतम प्रस्ताव दिया है, उसके तहत कैलिबर-पीएल लैंड अटैक क्रूज मिसाइल भारतीय नौसेना की पनडु्ब्बियों को डीप स्ट्राइक क्षमता प्रदान करेगी। इस मिसाइल की रेंज 1500 किलोमीटर तक है। इस मिसाइल की सबसे अहम और जरूरी बात यह है कि भारतीय पनडुब्बियों में इन्हें तैनात करने के लिए किसी बड़े बदलाव की जरूरत नहीं होगी। इसको लांच करने के लिए मौजूदा 533 एमएम टॉरपीडो ट्यूबों का इस्तेमाल किया जाएगा।
पिछले साल हुई थी सौदे की शुरुआत
बता दें कि इस सौदे की शुरुआत पिछले साल हुई थी।रोसोबोरोन एक्सपोर्ट और रूबिन डिजाइन ब्यूरो ने मॉस्को में भारतीय नौसेना के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान इस मिसाइल का आॅफर दिया था। इस दौरान प्रजेंटेशन में इस बात पर जोर दिया गया कि कैलिबर परिवार को एक अलग हथियार के बजाय एक व्यापक मॉड्यूलर सिस्टम के रूप में डिजाइन किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि यह सिस्टम पारंपरिक पनडुब्बियों में बिना किसी बड़े संरचनात्मक बदलाव के मल्टीरोल स्ट्रैटजिक प्लेटफॉर्म में बदल सकता है।
रूसी क्रूज मिसाइल की धाक
कैलिबर-पीएल मिसाइल की विशेषताओं के बारे में बात करें तो यह एक रूसी क्रूज मिसाइल है। इसे 3एम-14ई के नाम से भी जाना जाता है। यह मिसाइल सैटेलाइट गाइडेंस और इनर्शियल नेविगेशन का उपयोग करती है, जिससे यह लक्ष्य पर अचूक निशाना लगाती है। यह लगभग 450-500 किलोग्राम का वारहेड ले जाने में सक्षम है। यह रूस की सबसे घातक और सटीक क्रूज मिसाइलों में से एक है। इस मिसाइल की सबसे बड़ी खूबी इसकी 1,500 किलोमीटर की डीप स्ट्राइक रेंज है। इसका मतलब है कि इस मिसाइल से लैस पनडुब्बियां समुद्र के बीच से ही दुश्मन के जमीनी ठिकानों पर सीध्ो हमला कर सकती है। इसमें दुश्मन के कमांड सेंटर, एयरबेस या बंदरगाह शामिल है। ऐसे में कहा जा सकता है कि इस मिसाइल को शामिल करने के बाद भारतीय नौसेना हिंद महासागर का राजना बनकर उभरेगी। यह मिसाइल पनडुब्बियों के 533 एमएम टॉरपीडो ट्यूब से लांच की जा सकती है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नौसना के लिए यह मिसाइल गेम चेंजहर भी बन सकती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ब्रह्मोस मिसाइल का पनडुब्बी वैरिएंट अभी तक डेवलपमेंट फेज से आगे नहीं बढ़ पाया है। ऐसे में भारत को पनडुब्बियों से हमला करने वाली ब्रह्मोस जैसी ही किसी मिसाइल की जरूरत है, जो दुश्मनों पर सटीक और घातक वार कर सके। रूस की इसक कू्रज मिसाइल में ब्रह्मोस जैसी ताकत है।





