जनप्रवाद ब्यूरो, जयपुर: राजस्थान प्रशासनिक सेवा की तेज-तर्रार अधिकारी मानी जाने वाली नादौती SDM काजल मीणा अब भ्रष्टाचार के आरोपों में घिर गई हैं। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने उन्हें जमीन बंटवारे की फाइनल डिक्री जारी करने के एवज में 60 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए ट्रैप कर लिया। इस कार्रवाई में उनके रीडर दिनेश कुमार सैनी और वरिष्ठ सहायक यूडीसी प्रवीण धाकड़ को भी गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई के दौरान प्रवीण धाकड़ के बैग से 60 हजार रुपये की रिश्वत राशि के अलावा करीब 4 लाख रुपये की अतिरिक्त संदिग्ध नकदी भी बरामद हुई है। अब एसीबी इस अतिरिक्त रकम के स्रोत की भी गहन जांच कर रही है। इन सब के बीच प्रशासनिक सेवा पर सवाल उठ रहे हैं जबकि सवाल यह भी है कि RAS टॉपर काजल मीणा भ्रष्टाचार के खेल में कैसे आ गई।
काजल मीणा का करियर
SDM काजल मीणा का करियर काफी अच्छा रहा है। काजल मीणा का शैक्षणिक और पेशेवर रिकॉर्ड बेहद प्रभावशाली रहा है। काजल मीणा ने IIT मंडी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में B.Tech किया है। वहीं इसके बाद काजल मीणा ने केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण विभागों में भी सेवाएं दी जिसमें दिल्ली में दूरसंचार विभाग में ASO और EPFO में अधिकारी के रूप में काम किया। हालांकि इसके बाद भी वह खुद को आगे बढ़ाने में रुकी नहीं और काजल मीणा ने प्रशासनिक सेवा का रास्ता चुना। जिसमें काजल मीणा ने अपनी छाप छोड़ी। काजल मीणा साल 2024 बैच की RAS टॉपर रही हैं।

पहली पोस्टिंग में ज्वाइन नहीं किया दूसरी पोस्टिंग में विवाद
RAS अधिकारी बनने के बाद काजल मीणा ने अपनी ट्रेनिंग पूरी की, जिसके बाद उन्हें पहली पोस्टिंग प्रतापगढ़ दी गई थी। लेकिन काजल मीणा ने प्रतापगढ़ में ज्वाइन नहीं किया। इसके बाद साल 2024 अक्तूबर में उन्हें करौली जिले के नादौती में SDM पद पर पोस्टिंग मिली। यहां ज्वाइन करने के बाद ही मीणा काफी चर्चाओं में आ गई। अपनी स्थानीय स्तर पर मजबूत रिश्तेदारी और प्रभाव के कारण वे पहले से ही चर्चा में थीं। हालांकि अब उनका नाम गंभीर आरोपों के साथ सामने आया है। स्थानीय लोगों ने भी नादौती एसडीएम पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि नादौती क्षेत्र में सरकारी जमीन पर अवैध खनन 2 से 3 जगह लंबे समय से जारी है। इसमें बड़े अधिकारी शामिल है जिसमें मीणा का नाम भी लिया जा रहा है। बहरहाल, IIT से पढ़ाई और केंद्र सरकार की नौकरी छोड़कर प्रशासनिक सेवा में आईं अधिकारी का इस तरह रिश्वत मामले में पकड़ा जाना न केवल उनकी छवि बल्कि सिस्टम की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाता है।





