विकास कार्यों की जांच शुरू, धन के दुरुपयोग पर उठे थे सवाल

जन प्रवाद, ब्यूरो।
अमरोहा। (कपिल चावला)
अमरोहा के गजरौला ब्लॉक क्षेत्र के गांव बहलोलपुर में ग्राम पंचायत द्वारा कराए गए विकास कार्यों और मनरेगा के कार्यों में कथित अनियमितताओं की शिकायत के बाद जिला प्रशासन द्वारा गठित जांच टीम गांव पहुंची। टीम ने मौके पर पहुंचकर विकास कार्यों का निरीक्षण किया और मनरेगा से जुड़े अभिलेखों व भुगतान संबंधी जानकारी की जांच की। ग्रामीणों ने जांच टीम के सामने कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने निष्पक्ष जांच और सरकारी धन की रिकवरी की मांग की है। 

दरअसल, बहलोलपुर गांव के ग्रामीण वीरेंद्र सिंह, महेश कुमार, रोहित कुमार, महिलाल सिंह और प्रेम सिंह समेत अन्य ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर ग्राम पंचायत में कराए गए विकास कार्यों और मनरेगा कार्यों की जांच कराने की मांग की थी। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के इस्तेमाल में अनियमितताएं बरती गईं। उनका कहना है कि कई कार्यों के भुगतान, निर्माण की गुणवत्ता और कार्यों की वास्तविकता को लेकर सवाल हैं। ग्रामीणों ने जांच टीम को यह भी बताया कि मनरेगा में काम करने के बावजूद कुछ मजदूरों को उनकी मजदूरी का भुगतान नहीं मिला। ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने जांच अधिकारियों को अपनी बैंक पासबुक भी दिखाई, जिसमें संबंधित भुगतान उनके खातों में नहीं पहुंचने की बात सामने आई है। 

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि ग्राम पंचायत की बैठकों और प्रस्ताव प्रक्रिया में ग्रामीणों तथा पंचायत सदस्यों की पर्याप्त भागीदारी नहीं कराई गई। आदर्श तालाब की चारदीवारी, प्राथमिक विद्यालय के दिव्यांग शौचालय, सफाई कार्य, नाला निर्माण और हैंडपंप मरम्मत सहित कई कार्यों को लेकर भी ग्रामीणों ने जांच की मांग की है। सबसे गंभीर आरोप मनरेगा और पंचायत निधि के भुगतान को लेकर लगाए गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ भुगतान ग्राम प्रधान के परिवार और रिश्तेदारों से जुड़े लोगों के खातों में किए गए। ग्रामीणों ने मांग की है कि भुगतान से संबंधित सभी बैंक रिकॉर्ड, मास्टर रोल, बिल-वाउचर और कार्यों की जमीनी हकीकत का मिलान कराया जाए। शिकायत के बाद जिलाधिकारी द्वारा गठित जांच टीम ने गांव पहुंचकर मौके पर विकास कार्यों का निरीक्षण किया और संबंधित अभिलेखों की जानकारी जुटाई। 

टीम ने ग्रामीणों की शिकायतें भी सुनीं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं या नहीं। यदि जांच में सरकारी धन के दुरुपयोग, फर्जी भुगतान, गलत भुगतान या मनरेगा मजदूरों की मजदूरी से संबंधित अनियमितता प्रमाणित होती है तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय कर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों से सरकारी धन की वसूली और आवश्यक कानूनी/विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल, जांच प्रक्रिया पूरी होने और आधिकारिक रिपोर्ट सामने आने का इंतजार है। जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और सरकारी धन के संबंध में वास्तविक स्थिति क्या है।