जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। भारतीय नौसेना को एक नया समुद्री योद्धा मिल गया है। एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट मछलीपट्टनम का जलावतरण हो चुका है। होर्मुज की बारूदी सुरंगे भी इस युद्धपोत का कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगी। इस खतरनाक युद्धपोत के समंदर में उतरने से न केवल नौसेना का बेड़ा मजबूत होगा बल्कि दुश्मन देश के जहाज भारतीय जल सीमा में प्रवेश करने से पहले सौ बार सोचेंगे।
मेक इन इंडिया पहल का असर देश के हर क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। सबसे ज्यादा असर रक्षा क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। इसके तहत लगभग हर महीने कोई न कोई युद्धपोत या सबमरीन लांच हो रहा है। अब भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई। एंटी सबमरीन वॉरफेयर शेलो वाटर क्राफ्ट मछलीपट्टनम का जलावतरण हो चुका है। नौसेना के लिए बनाए जा रहे आठ पनडुब्बी रोधी उथले जल युद्धपोतों की श्रृंखला का यह सातवां युद्धपोत है। इसे 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से तैयार किया गया है। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री ताकत और रणनीतिक पकड़ और मजबूत होगी। इसके शामिल होने से तटीय सुरक्षा, समुद्री निगरानी तथा पनडुब्बी रोधी अभियानों की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह युद्धपोत पानी के नीचे निगरानी, पनडुब्बी रोधी अभियान और कम तीव्रता वाले समुद्री आॅपरेशन के साथ-साथ समुद्री सुरंगों से निपटने की क्षमता से लैस है। ईरान ने अमेरिका से तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट में समुद्र के अंदर बारूदी सुरंगे लगाई हुई हैं। जब भी कोई जहाज उससे टकराता है तो वह तबाह हो जाता है, लेकिन भारत ने ऐसा खतरनाक पनडुब्बी रोधी युद्धपोत समुद्र में उतार दिया है, जिसका ये समुद्री बारूदी सुरंगे बाल भी बांका नहीं कर पाएंगी।
सैन्य सूत्रों के अनुसार मछलीपट्टनम को पानी के भीतर निगरानी, पनडुब्बी रोधी युद्ध, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों तथा बारूदी सुरंग रोधी अभियानों के लिए अत्याधुनिक प्रणालियों से लैस किया गया है। यह युद्धपोत भारतीय नौसेना की समुद्री क्षेत्र जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के समुद्री हितों की सुरक्षा को और सुदृढ़ करेगा। युद्धपोत का नाम आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के ऐतिहासिक बंदरगाह शहर मछलीपट्टनम के नाम पर रखा गया है। यह वह स्थान है जो भारत के पूर्वी तट पर अपने समृद्ध समुद्री इतिहास और प्राचीन व्यापारिक विरासत के लिए प्रसिद्ध रहा है। यह युद्धपोत उसी समुद्री विरासत और परंपरा का प्रतीक है तथा भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह परियोजना रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत अभियान की भी बड़ी सफलता मानी जा रही है।
80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री के उपयोग के साथ यह परियोजना देश के जहाज निर्माण उद्योग की बढ़ती क्षमता को भी प्रदर्शित करती है। इससे भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता और तटीय रक्षा व्यवस्था को महत्वपूर्ण मजबूती मिलेगी। इस युद्धपोत का निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने किया है। एक समारोह के दौरान मछलीपट्टनम का जलावतरण गुलरुख आनंद ने किया। इस अवसर पर सैन्य कार्य विभाग के अतिरिक्त सचिव व वाइस एडमिरल अतुल आनंद, भारतीय नौसेना और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारी तथा अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। बता दें कि बीते सप्ताह 22 जुलाई को ही भारतीय नौसेना में एक और नया योद्धा आईएनएस मालवन शामिल हुआ था। यह एक स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित माहे श्रेणी का एंटी सबमरीन वॉरफेयर शेलो वाटर क्राफ्ट है। यह उथले जल में अपने मिशनों को अंजाम देने में पूरी तरह से सक्षम है। आईएनएस मालवन को करवार में औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल किया गया था। नौसेना के अनुसार, आईएनएस मालवन बड़े युद्धपोतों, पनडुब्बियों और नौसैनिक विमानन संसाधनों के साथ समन्वित रूप से संचालन करने में सक्षम है। इसके शामिल होने से भारतीय नौसेना की पनडुब्बी रोधी क्षमता और समुद्री सुरक्षा तंत्र को नई मजबूती मिलेगी। नौसेना का कहना है कि यह युद्धपोत भारत के समुद्री हितों और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए हर समय और हर परिस्थिति में तत्पर रहेगा।





