होर्मुज में फंसे दो भारतीय जहाजों पर फायरिंग, ईरान द्वारा की गई फायरिंग, भारत ने जताई आपत्ति

जन प्रवाद ब्यूरो।
नई दिल्ली। भारतीय नौसेना के दो जहाजों पर स्ट्रैट ऑफ होर्मुज पर ईरान द्वारा की गई फायरिंग के बाद भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। ऐसी खबरें हैं कि भारतीय नाविकों द्वारा एक आॅडियो क्लिप भी जारी किया गया है जिसमें यह कहते हुए सुना जा सकता है कि आपने ही हमें आगे बढ़ने की अनुमति दी। आपकी लिस्ट में हम दूसरे नंबर पर हैं। इसके बाद भी आप फायरिंग कर रहे हैं। मुझे वापस मुड़ने दीजिए। इस वीडियो की जन प्रवाद पुष्टि नहीं करता। लेकिन, मीडिया में जिस तरह की खबरें हैं और भारत की ओर से आपत्ति जताने से यह तो तय है कि कुछ न कुछ तो जरूर हुआ है। 
मीडिया खबरों के मुताबिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कर रहे दो भारतीय जहाजों को ईरानी सेना ने निशाना बनाया। उनमें जग अर्नव भी शामिल बताया जा रहा है। यह भारतीय ध्वज वाला एक बल्क कैरियर है जो सऊदी अरब के अल जुबैल से भारत की ओर आ रहा था। सनमार हेराल्ड टैंकर इराक से कच्चा तेल लेकर भारत आ रहा था। दोनोें जहाजों पर उस समय हमला किया गया जब वे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे थे।


इस घटना के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए अपना कूटनीतिक विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय ने शनिवार को शाम 6:30 बजे ईरानी राजदूत डॉ. मोहम्मद फथाली को तलब किया है। बैठक के दौरान विदेश सचिव ने जहाजों पर हुई फायरिंग को एक गंभीर घटना करार दिया और नाविकों की सुरक्षा पर गहरी चिंता जताई। भारत ने स्पष्ट किया कि ईरान को जल्द से जल्द भारत आने वाले जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करना चाहिए। 


मालूम हो कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया का 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। यह संकरा रास्ता पूरी दुनिया के लिए अहम है। लेकिन, अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद से यह रास्ता तनाव का हिस्सा बना हुआ है। एक ओर ईरान ने होर्मुज को बंद कर रखा है, वहीं अमेरिका ने भी यहां घेराबंदी कर रखी है। ईरान संसद के अध्यक्ष बागेर गालबाफ ने साफ कहा कि जब तक अमेरिका ईरानी बंदरगाह की घेराबंदी नहीं हटाता तब तक इस जलमार्ग को नहीं खोला जाएगा। हालांकि, अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर का समय बुधवार को खत्म हो रहा है। अगर दोनों देशों के बीच युद्ध विराम पर खास बात नहीं बनी तो यह तनाव और भी गहरा सकता है। इसके लिए भारत को कूटनीतिक रूप से मजबूत रहना चाहिए क्योंकि इसके बाद कच्चे तेल की आबक पर बड़ा असर पड़ेगा। वहीं जिस तरह से भारतीय जहाजों पर गोलीबारी हुई उससे भारतीय नाविकों की जान का खतरा है। इससे निपटने के लिए भारत को तैयार रहने की जरूरत है।