जनप्रवाद ब्यूरो, टीम। चेतावनी ने पूरी दुनिया में मचा दी हलचल . वैज्ञानिकों की एक चेतावनी ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। उनके अनुसार धरती पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। 2026 में सुपर एल नीनो 150 साल पुराने विनाशकारी पैटर्न को दोहरा सकता है। कमजोर मानसून, भीषण गर्मी और सूखे का खतरा खेती, पानी और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकता है। इस संकट से लाखों लोगों के मारे जाने का खतरा है।
आईएमडी की चेतावनी

मौसम विभाग यानी आईएमडी के अनुसार उत्तर भारत के कई इलाकों में अधिकतम तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में अगले तीन दिनों तक लू चलने की संभावना जताई गई है। मध्य भारत के पश्चिम मध्य प्रदेश और विदर्भ में भी गर्म हवाओं का असर जारी रहेगा। सिर्फ दिन ही नहीं, रातें भी गर्म रहने वाली हैं। उत्तर प्रदेश के बांदा में रविवार को 46.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। यह देश में सर्वाधिक गर्म रहा। राजस्थान के बाड़मेर और जैसलमेर में 46 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड हुआ। 45.7 डिग्री सेल्सियस के साथ प्रयागराज तीसरा सबसे गर्म रहा। कोटा और चित्तौड़गढ़ में 45.2 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। इसके अलावा पंजाब और हरियाणा में रविवार को भीषण गर्मी का असर जारी रहा। नारनौल में अधिकतम तापमान 44.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। रोहतक में 43.6 डिग्री, भिवानी और सिरसा में 43-43 डिग्री, हिसार और करनाल में 42.2 डिग्री तापमान रहा। अंबाला में 41.6 डिग्री और गुरुग्राम में 40.3 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा।
कुछ हिस्सों में गरम रात की स्थिति

उत्तर प्रदेश, हरियाणा और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में गरम रात की स्थिति दर्ज की गई है। यहां न्यूनतम तापमान भी सामान्य से काफी ऊपर बना हुआ है। इससे लोगों को रात में भी राहत नहीं मिल रही है। मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। लू से बचने के लिए दोपहर में बाहर निकलने से बचने, हल्के और ढीले कपड़े पहनने की सलाह दी गई है। वहीं देश में बढ़ती गर्मी के बीच दुनिया एक बार फिर एक बड़े खतरे के मुहाने पर खड़ी है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि 2026 में सुपर अल नीनो विकसित हो सकता है। इससे वैश्विक मौसम पैटर्न बदल जाते हैं-कहीं सूखा पड़ता है तो कहीं बाढ़ आती है। यह मानसून को कमजोर कर देता है, जिससे भारत जैसे देशों में बारिश कम हो सकती है और तापमान तेजी से बढ़ सकता है। बता दें कि यह एक ऐसा मौसमीय पैटर्न है जो 1877-78 जैसी तबाही दोहरा सकता है। करीब 150 साल पहले आए इस विनाशकारी एल नीनो ने वैश्विक स्तर पर अकाल, सूखा और लाखों मौतों का कारण बना था। अब तेजी से बढ़ते समुद्री तापमान और जलवायु परिवर्तन के बीच इसके दोबारा आने की आशंका ने चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार एल नीनो एक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है।
महासागर की सतह का तापमान बढ़ा

वैज्ञानिकों के अनुसार, प्रशांत महासागर की सतह का तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जो एल नीनो बनने का प्रमुख संकेत है। विश्व मौसम संगठन ने भी 2026 के मध्य तक एल नीनो की वापसी की संभावना जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह ट्रेंड जारी रहा तो यह एक सुपर एल नीनो बन सकता है, जो 2027 तक वैश्विक तापमान को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा सकता है। इतिहास गवाह है कि 1877-78 का एल नीनो मानव इतिहास के सबसे घातक जलवायु संकटों में से एक था। उस दौरान भीषण गर्मी, सूखा और फसल बर्बादी के चलते दुनिया की करीब 4 प्रतिशत आबादी खत्म हो गई थी। इस घटना ने यह साबित किया कि समुद्री तापमान में बदलाव पूरी दुनिया को गहरे संकट में डाल सकता है। भारत के लिए एल नीनो का सबसे बड़ा खतरा कमजोर मानसून है। 2026 में सामान्य से कम बारिश, लंबी हीटवेव और पानी की कमी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। जैसा कि इन दिनों दिखाई पड़ रही है। इससे खेती पर असर पड़ेगा, खाद्य उत्पादन घटेगा और महंगाई बढ़ सकती है। देश की अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल सकता है चूंकि भारत कृषि प्रधान देश है।





