जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। ग्लोबल वार्मिंग को लेकर लगातार रिपोर्ट आ रही है। अब वैज्ञानिकों की एक और डरावनी रिपोर्ट ने सभी को हैरान कर दिया है। इस रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के 10 बड़े शहर रेगिस्तान में बदल जाएंगे। वैज्ञानिकों की माने माने तो अगले 40 से 50 सालों के भीतर अमेरिका से लेकर यूरोप तक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
ग्लोबल वार्मिंग की चपेट में पूरी दुनिया
पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग की चपेट में है। तकनीकी रुप से सक्षम और शक्तिशाली देश अमेरिका भी इससे अछूता नहीं है। वैज्ञानिक लगातार इस मुद्दे परे शोध कर रहे हैं। कई रिपोर्टें और चेतावनियां दुनिया के सामने आ चुकी है। इसके बाद भी इंसान ने सबक लेने की नहीं लिया। वह लगातार कार्बन उत्सर्जन को बढ़ावा दे रहा है। पीयर जे में प्रकाशित हुई नई रिसर्च में अमेरिका से लेकर यूरोप तक का भविष्य में क्या हाल होगा इस पर रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। जिसमें बताया गया है कि 2080 तक पूरी दुनिया में अभूतपूर्व परिवर्तन देखा जाएगा। इस रिसर्च में यह अनुमान लगाने की कोशिश की गई है कि देश के प्राकृतिक वनस्पति क्षेत्र आखिर कैसे सूखे से होते हुए मरुस्थल में बदल जाएंगे। यह अध्ययन हाई-रेज्यूलेशन सैटेलाइट डेटा और मशीन आधारित मॉडल के अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। आने वाले परिवर्तन के आधार पर रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका में आज के छोटे बच्चे जब अपनी रिटायरमेंट की उम्र में होंगे तो उसके कई शहरों की शक्ल आज जैसी नहीं बचेगी।
दक्षिण-पश्चिम अमेरिका पर ज्यादा प्रभाव
रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम अमेरिका के हिस्से जहां मरुस्थल बन जाएंगे। वहीं दूसरी ओर दक्षिण अमेरिका का मध्य क्षेत्र आने वाले इन सालों में अधिक सूखा और गर्म होने जा रहा है। आज यहां जहां घास के मैदान हैं वे रेगिस्तान में तब्दील होते दिखेंगे। यहां जंगली फूल और वनस्पति क्षेत्र कम होते जाएंगे और जंगली सूखी झाड़ियों का क्षेत्र दिखाई देगा। वैज्ञानिकों के अनुसार दक्षिण-पश्चिम अमेरिका के जिन 10 शहरों के रेगिस्तान बनने का खतरा इस रिपोर्ट में जताया गया है उनमें सबसे ऊपर कैलिफोर्निया का बेकर्सफील्ड शहर है। मौजूदा समय में 14 लाख से ज्यादा लोगों के आवास की जगह है। इसके अलावा नेवादा के रेनो, कैलिफोर्निया के लैन्कैस्टर शहर पर भी खतरा मंडार रहा है। साथ ही पुएब्लो, स्पार्क्स, रियो रैंचो, कैनेविक, पास्को, ग्रैंड जंक्शन और रिचलैंड शहर शामिल है।
यूरोप में पड़ेगी भीषण गर्मी
इसी तरह ठंडी हवाओं और सर्द मौसम की पहचान रखने वाला यूरोप आने वाले सालों में भीषण गर्मी की चपेट में आएगा। गर्मी ने यहां तापमान के अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ सकता है। बता दें कि इस साल जून माह में पड़ी गर्मी ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। इस दौरान यहां की सड़कें तक पिघल गई थी। जून महीन में 1300 से ज्यादा लोगों की जान चल गई थी। गर्मी का कहर सबसे ज्यादा फ्रांस में देखने को मिला। यहां पहली बार तापमान 44.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। ये आंकड़े बताने के लिए काफी है कि दुनिया किस ओर जा रही है। बता दें कि यूरोपीय देशों के भीषण गर्मी की चपेट में आने का मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन और वायुमंडल में बनने वाली हीट डोम और ओमेगा ब्लॉक' जैसी मौसमी प्रणालियां रहीं। इसके अलावा नई रिपोर्ट की मानें तो यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन चुका है। आने वाले समय में इसके भयावह परिणाम होंगे।





