नई शोध ने वैज्ञानिकों के होश किए पाख्ता, खगोलशास्त्रियों ने दुनिया को दी चेतावनी 

जनप्रवाद ब्यूरो, टीम। नई शोध ने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों के होश पाख्ता कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार खगोलशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि ब्रह्मांड बहुत तेजी से फैल रहा है। यूनिवर्स के आकार में वृद्धि की यह रफ्तार पहले के अनुमानों से कहीं ज्यादा है। ब्रह्मांड के फैलने के पीछे क्या कारण इसके पीछे तीन थ्योरी भी सामने आई है। 
रहस्यों से भरा हुआ है हमारा ब्रह्मांड 

हमारा ब्रह्मांड रहस्यों से भरा हुआ है। वैज्ञानिक अंतरिक्ष से जुड़े कई रहस्यों को सुलझाने में लगे हुए हैं। इसी कड़ी में हैरान कर देने वाली बात सामने आई है। नए शोध के अनुसार ब्रह्मांड लगातार फैल रहा है। अब सवाल यह नहीं है कि यूनिवर्स फैल रहा है या नहीं, बल्कि यह है कि वह कितनी तेजी से फैल रहा है। इसी सवाल ने पूरी दुनिया के खगोल वैज्ञानिकों को उलझा दिया है। इसकी वजह यह कि ब्रह्मांड के फैलने की रफ्तार मापने के दो बड़े तरीकों से दो अलग-अलग जवाब मिल रहे हैं। डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार यूनिवर्स लगभग 73.5 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से बढ़ रहा है। बता दें कि वैज्ञानिकों ने ब्रह्मांड के विस्तार को मापने के लिए दो तरीकों का इस्तेमाल किया है। एक तरीका तारों और गैलेक्सी को देखकर यह पता लगाता है कि वे पृथ्वी से कितनी तेजी से दूर जा रहे हैं। दूसरा तरीका शुरूआती ब्रह्मांड को देखकर यह अंदाजा लगाता है कि आज ब्रह्मांड को कितनी तेजी से फैलना चाहिए। इन दोनों तरीकों के नतीजे एक जैसे होने चाहिए। इस मामले में ऐसा नहीं है। शुरूआती ब्रह्मांड के अंदाजों के मुताबिक ब्रह्मांड को लगभग 67 या 68 किलोमीटर प्रति सेकंड प्रति मेगापारसेक की दर से फैलना चाहिए। बता दें कि मेगापारसेक दूरी मांपने की एक इकाई  जो 3.26 मिलियन प्रकाश वर्ष के बराबर होती है। वहीं आस-पास के तारों की माप के अनुसार यह दर कहीं ज्यादा, लगभग 73.5 मेगापारसेक है। इस अंतर को हबल टेंशन कहा जा रहा है।
रहस्य अब और गहरा गया 

यह रहस्य अब और गहरा गया है। जापान की टोक्यो यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक बिल्कुल नई और स्वतंत्र तकनीक से यूनिवर्स की एक्सपेंशन रेट मापी है। इस टीम को किनेथ वॉंन्ग लीड कर कर रहे हैं। यह तीसार रास्ता बताया जा रहा है। यह रास्ता पुराने तरीकों से पूरी तरह अलग है। इस तकनीक को टाइम डिले कॉस्मोग्राफी बताया जा रहा है। इसमें वैज्ञानिक गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग का इस्तेमाल करते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार जब कोई बहुत भारी आकाशगंगा, उसके पीछे मौजूद दूर के क्वासर की रोशनी को मोड़ देती है, तो वही क्वासर कई तस्वीरों में दिखाई देता है। ये तस्वीरें अलग-अलग रास्तों से हम तक पहुंचती हैं। इसलिए उनके आने में समय का फर्क होता है। इस स्टडी में भी पाया गया कि भले ही तीनों अध्ययनों की गति में अंतर है लेकिन यह सच है कि हमारा ब्रह्मांड तेजी से फैल रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार इसके पीछे कई कारण है। इसमें डार्क एनर्जी सबसे बड़ा कारण है। यही वो चीज है, जो यूनिवर्स के फैलाव को बढ़ा रही है, लेकिन इसका उल्टा असर धरती पर पड़ सकता है। बता दें कि डार्क एनर्जी दिखाई नहीं देती। यह रोशनी भी नहीं छोड़ती है। यह पूरे ब्रह्मांड का लगभग 70 फीसदी हिस्सा है।