नयी दिल्ली, एजेंसी। भारत का ई-कॉमर्स बाजार वर्ष 2024 के 125 अरब डॉलर से करीब तीन गुना होकर वर्ष 2030 तक 345 अरब डॉलर का हो सकता है। बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा गया कि क्विक कॉमर्स के त्वरित विस्तार और कृत्रिम मेधा (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल से इस क्षेत्र को गति मिलेगी। शोध सलाहकार कंपनी इन्फिसम की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2030 तक ई-कॉमर्स बाजार 18.4 प्रतिशत की सालाना दर से बढ़ने का अनुमान है। रिपोर्ट के मुताबिक, सामान जल्द पहुंचाने की बढ़ती हुई मांग को पूरा करने के लिए देश में डार्क स्टोर की संख्या 2025 के 2,525 से बढ़कर 2030 तक करीब 7,500 हो सकती है। इन्फिसम ने कहा कि क्विक कॉमर्स (फटाफट सामान की आपूर्ति करना) भारत के ई-कॉमर्स क्षेत्र का सबसे तेजी से बढ़ने वाला खंड है। 2030 तक इसके 65-70 अरब डॉलर का बाजार बनने का अनुमान है और अगले पांच वर्षों में ऑनलाइन खुदरा बिक्री की अतिरिक्त वृद्धि में इसकी हिस्सेदारी 45-50 प्रतिशत रह सकती है। क्विक कॉमर्स बाजार में ब्लिंकिट 44 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे है। उसने वित्त वर्ष 2025-26 में 90 करोड़ ऑर्डर पूरे किए। इसके बाद जेप्टो की 25 प्रतिशत और स्विगी इंस्टामार्ट की 20 प्रतिशत हिस्सेदारी है। रिपोर्ट कहती है कि 'जेन-जी' पीढ़ी के युवा इस वृद्धि का प्रमुख आधार हैं और फिलहाल ऑनलाइन खरीदारों में इसकी हिस्सेदारी करीब एक-तिहाई है। 2030 तक इसके देश का सबसे बड़ा डिजिटल खर्च करने वाला समूह बनने का अनुमान है। अब ई-कॉमर्स का विस्तार महानगरों से आगे छोटे शहरों तक भी हो रहा है। ऑर्डर में 66 प्रतिशत हिस्सा अब दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों का है। रिपोर्ट के मुताबिक, दशक के अंत तक देश के कुल खुदरा खर्च में ई-कॉमर्स की हिस्सेदारी 10-12 प्रतिशत और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में योगदान 2.5 प्रतिशत हो सकता है। उस समय ऑनलाइन खरीदारों की संख्या 42-44 करोड़ रहने का अनुमान है। प्रौद्योगिकी मोर्चे पर, एआई और मशीन लर्निंग के इस्तेमाल से 2030 तक खुदरा क्षेत्र की उत्पादकता 35-37 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। बातचीत आधारित वाणिज्य, खरीदारी के एआई सहायक और वर्चुअल ट्राई-ऑन जैसी प्रौद्योगिकी ग्राहकों के उत्पाद खोजने और खरीदने के तौर-तरीकों को बदल रही है।
भारतीय ई-कॉमर्स बाजार 2030 तक करीब तीन गुना होकर 345 अरब डॉलर होगाः रिपोर्ट
02-Sep-2026





