जनप्रवाद ब्यूरो, टीम। पृथ्वी की सतह से 700 किलोमीटर नीचे एक विशाल छिपा हुआ महासागर मिला है। हैरानी वाली बात यह भी है कि यह आकार में धरती के सभी समुद्रों के कुल पानी से भी तीन गुना बड़ा है।
पृथ्वी के नीचे गर्म लावा
जब यह सवाल मन में आता है कि धरती की सतह के नीचे क्या है? तो इसका सीधा से जवाब समझ आता है कि पृथ्वी के नीचे गर्म लावा और पिघली हुई चट्टानें हैं। इसके आलावा पाताल जैसी अवधारणा भी है। भारतीय पौराणिक कहानियों में इस रहस्यमयी लोक के बारे में बताया गया है। अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसी खोज की है, जिसने पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया है। यह खोज नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने की है। इस रिसर्च में दावा किया है कि पृथ्वी की ऊपरी परत और कोर के बीच मेंटल के गहरे हिस्से में पानी का एक विशाल भंडार मौजूद है। शोधकर्ताओं के अनुसार यह अथाह जल किसी साधारण नीली झील में नहीं है। यह पानी नीले रंग के एक खास पत्थर रिंगवोडाइट के भीतर कैद है। यह पानी धरती की सतह से करीब 700 किलोमीटर नीचे मिला है।
स्पंज के अंदर भर जाता है पानी
बता दें कि यह जल जहां छिपा हुआ है वहां तक इंसान सीधे नहीं पहुंच सकता। वैज्ञानिक के अनुसार यह जल उस तरह से धरती के नीचे मौजूद है है जैसे किसी स्पंज के अंदर पानी भर जाता है। ठीक उसी तरह यह पानी गहराई में चट्टानों में जमा है। वैज्ञानिकों के इस दावे को लेकर मन में यह सवाल उठता है कि जब वहां तक कोई पहुंच नहीं सकता, तो फिर इसका पता कैसे चला। इस बारे में शोधकर्ताओं का कहना है कि वैज्ञानिक भूकंप की तरंगों का अध्ययन कर रहे थे। वह यह पता लगाने की कोशिश कर रहे थे कि जब भूकंप आता है, तो उसकी लहरें धरती के अंदर कहां तक जाती हैं। शोध में देखा गया कि इन लहरों की गति हर जगह एक जैसी नहीं थी। जहां चट्टानों में पानी मौजूद था वहां इन तरंगों की चाल थोड़ी धीमी हो गई। इस बात का जब विस्तार से अध्ययन किया गया तो यह राज दुनिया के सामने आया गया कि नीचे बड़ी मात्रा में पानी मौजूद है।
हमें कभी दिखाई नहीं देगा पानी
सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह पानी हमें कभी दिखाई नहीं देगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह महासागरों या झील की तरह खुले रूप में नहीं है। यह खनिजों के आवरण में कैद है। बता दें कि धरती के अंदर खनिज एक खास तरह की चट्टान बनाते हैं। इसमें पानी को पकड़कर रखने की क्षमता होती है। यह चट्टान बहुत ज्यादा दबाव और तापमान में बनती है। वैज्ञानिकों का मानना था कि धरती पर पानी का बड़ा हिस्सा बाहर से आया होगा। इसके पीछे बड़ा उल्कापिंड या धूमकेतु हो सकता है। इस नई जानकारी से लगता है कि पानी का बड़ा हिस्सा खुद धरती के अंदर भी मौजूद रहा है। यह खोज हमें बताती है कि पृथ्वी का जल-चक्र केवल सतह और बादलों के बीच नहीं, बल्कि हजारों किलोमीटर गहराई तक फैला हुआ है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह पानी करोड़ों सालों से पृथ्वी के तापमान और प्लेट टेक्टोनिक्स को संतुलित रखने में भी मदद कर रहा है। इससे यह भी साफ हो जाता है कि पानी का असली चक्र हमारी सोच से कहीं ज्यादा बड़ा और जटिल है। वैज्ञानिक मानते हैं कि यह सिर्फ शुरूआत है. अभी धरती के अंदर कई ऐसे रहस्य छिपे हैं, जिनका पता लगाना है। यह खोज सिर्फ एक नई जानकारी नहीं है, बल्कि यह हमें धरती को नए तरीके से समझने का मौका देती है। इससे यह जानने में मदद मिलेगी कि धरती के अंदर क्या चल रहा है, ज्वालामुखी कैसे बनते हैं और भूकंप जैसी घटनाओं में पानी की क्या भूमिका होती है।





