जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। दुनियाभर में अलनीनो पर चल रही बहस के बीच वैज्ञानिकों ने महाप्रलय की चेतावनी जारी की है। उनके अनुसार ज्यादा जल दोहन के कारण धरती का वॉटर टैंक खाली हो गया है। इससे धरती अपनी धुरी से लड़खड़ाकर 31.5 इंच तक खिसक गई है। इससे आने वाले दिनों में न केवल भीषण गर्मी पड़ेगी बल्कि भूकंप-बाढ़ जैसी भयानक आपदाएं आएंगी। वैज्ञानिकों ने पृथ्वी को लेकर बड़ी चेतावनी जारी की है। उनके अनुसार जिस जमीन पर हम पैर रखकर खड़े हैं, वो धरती अंदर से खोखली होती जा रही है। इंसानों ने पाताल को चीरकर धरती का वॉटर टैंक खाली कर दिया है। जमीन के नीचे का पानी इस कदर निचोड़ लिया गया है कि धरती का बैलेंस बिगड़ गया है। पृथ्वी अपनी धुरी से 31.5 इंच तक खिसक गई है। भूगर्भशास्त्रितयों के अनुसार पृथ्वी का एक्सिस से झुकना और डगमगाना कोई मामूली बात नहीं है। यह मानव सभ्यता के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। इसके कारण आने वाले दिनों में भयंकर गर्मी, अचानक आने वाले विनाशकारी भूकंप आएंगे। इसके अलावा समुद्र का जलस्तर बढ़ने से भयंकर बाढ़ जैसी महाप्रलय आ सकती है जो इंसान झेल नहीं पाएंगे।
की-वियोन सेओ की बड़ी रिसर्च
सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी के मशहूर भू-वैज्ञानिक की-वियोन सेओ ने इस पर बड़ी रिसर्च की है। उनके अनुसार पानी का भारी वजन होता है। जब ये पानी जमीन के नीचे भरपूर मात्रा में था तब तक धरती का संतुलन बिल्कुल परफेक्ट यानी सही था। वहीं जब से इंसानों ने खेती की सिंचाई करने और अपनी बेहिसाब जरूरतों को पूरा करने के लिए इस पानी को खींचकर शहरों और खेतों में बहा दिया, इससे संतुलन बिगड़ गया। रिसर्च के अनुसार 1993 से 2010 के बीच इंसानों ने जमीन के नीचे से करीब 2150 गीगाटन पानी पंप करके बाहर निकाल लिया। यह पानी समुद्र में गया। चिंता की बात यह है कि यह इतना भारी जल दोहन था कि इससे समंदर का जलस्तर करीब 6.24 मिलीमीटर तक बढ़ गया।
नासा के वैज्ञानिकों की चेतावनी
नासा के वैज्ञानिकों ने भी इसको लेकर चेतावनी जारी की है। वैज्ञानिकों के अनुसार इसका सीधा और सबसे घातक असर पृथ्वी के घूमने की रफ्तार और उसके संतुलन पर पड़ा है। नासा के जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी के रिसर्च साइंटिस्ट सुरेंद्र अधिकारी का कहना है कि धुरी के खिसकने से अन्य समस्याएं भी बन रही हैं। इससे बर्फबारी के पैटर्न में बदलाव आ रहा है। ग्रीनलैंड की बर्फ का पिघलना और पृथ्वी के अंदरूनी हिस्सों में होने वाली हलचलें इसका हिस्सा हैं। इसी तरह नेचर पत्रिका में छपे अध्ययन के अनुसार दुनिया के 40 घनी आबादी वाले शहर तेजी से नीचे की तरफ धंस रहे हैं। जमीन के नीचे से पानी का सपोर्ट खत्म होने की वजह से जमीन खोखली होकर नीचे की तरफ दब रही है। इससे भी बड़ा खतरा नेचर वॉटर की लेटेस्ट वैश्विक तटीय रिपोर्ट में सामने आया है। जिसमें कहा गया है कि दुनिया के 21 फीसदी तटीय इलाकों में भूजल का स्तर डराने वाली तेजी से नीचे गिरा है। इसके चलते तटीय इलाकों के कुदरती वॉटर टैंक में अब समंदर का खारा और जहरीला पानी घुसने लगा है। इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले दिनों में करोड़ों लोगों के पीने का पानी कड़वा और जहरीला हो जाएगा। इसके अलावा, धरती की परतों में आ रहे इस असंतुलन की वजह से भयानक भूकंप और सूखे का खतरा बढ़ा गया है।





