सीजेपी आंदोलन की खुलने लगी परतें, प्रदर्शन के पीछे विदेशी ताकतें, मिल रही बड़ी फंडिंग!

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा किए जा रहे आंदोलन की परते खुल रही हैं। फॉक्स न्यूज रिपोर्ट के बाद अब अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन ने सीजेपी पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन के हमारे देश अमेरिका से विदेशी फंडिंग मिल रही है। वहीं सीजेपी नेता अभिजीत दिपके का मोहम्मद यूनुस की तरह दिल्ली एयरपोर्ट पर जमकर विरोध हुआ।
अमेरिका से फंडिंग मिलने का आरोप 


हॉलीवुड सिंगर मैरी मिलबेन ने कॉकरोच जनता पार्टी पर अमेरिका से फंडिंग मिलने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पीमए मोदी के विरोधी अमेरिकी डोनर्स अभिजीत दीपके को पैसा भेज रहे हैं। उनके मुताबिक इस पैसे का इस्तेमाल भारत में अशांति फैलाने और सरकार के काम में रुकावट डालने के लिए किया जा रहा है। मिलबेन ने एक्स पर पोस्ट कर भारत के युवाओं से आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने लिखा कि यह चुप रहने का समय नहीं है। मिलबेन ने दावा किया कि फंडिंग करने वाले कुछ अमेरिकी दुनियाभर के दक्षिणपंथी नेताओं को निशाना बनाने का एक तय तरीका अपनाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोग किसी देश में अमेरिका से पढ़े व्यक्ति को ढूंढते हैं, उसे कट्टर बनाते हैं। वापस उसके देश भेजते हैं और अराजकता व तबाही फैलाने के लिए फंड करते हैं। 
अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन का बयान

दूसरी ओर अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन और कॉकरोच जनता पार्टी सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके के बीच तीखी बयानबाजी भी देखने को मिली। बता दें कि पहले मिलबेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में दावा किया कि सीजेपी को अमेरिका में बैठे दाताओं से फंडिंग मिल रही है। उन्होंने भारत के सभी युवा देशभक्तों से अपील की कि वे आगे आएं और दिपके की बनाए गए इस संगठन की विनाशकारी सोच के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करें। इसके जवाब में दिपके ने पलटवार करते हुए सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने ही देशवासियों को बदनाम करने के लिए अमेरिकियों का समर्थन क्यों मांग रहे हैं। मिलबेन के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए दिपके ने कहा कि भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने का अधिकार विदेशी नागरिकों को किसने दिया? हम अपने मुद्दों को खुद संभालने में पूरी तरह सक्षम हैं। हमें अपने देश के मामलों में बाहरी लोगों के दखल की जरूरत नहीं है। देखने वाली बात यह है कि दीपके के बयान में यहां दोहरा चरित्र साफ दिखाई दे रहा है। जब कोई अमेरिकी प्रतिनिधि या रिपोर्ट सरकार के खिलाफ होती है तो विपक्षी दल और आंदोलनकारी उसे सही मान लेते हैं। उस पर सरकार से सवाल पूछने लगते हैं। अब जब उन पर विदेशी फंडिंग लेकर आदोलन करने जैसे घृणित आरोप लग रहे हैं तो उसे विदेशी बताकर खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
मिलबेन ने दिपके को दिया जवाब 
वहीं मिलबेन ने भी दिपके को जवाब देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को अमेरिकी समर्थन की जरूरत नहीं है। उन्हें पिछले 25 वर्षों से 1.5 अरब बेहतरीन भारतीय नागरिकों का समर्थन हासिल है। 12 साल प्रधानमंत्री के रूप में और लगातार तीन कार्यकाल शानदार रहा। देश की जनता 2029 में भी वे उनका साथ देगी। यही सच है। मिलबेन ने दिपके को चेतावनी देते हुए कहा कि आप सफल नहीं होंगे, क्योंकि अराजकता कभी नहीं जीतती। उन्होंने दीपके को सलाह देते हुए कहा कि आप अपनी अमेरिकी शिक्षा और प्रतिभा का इस्तेमाल अच्छे कामों के लिए करें। वे प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठें और भारत को आगे बढ़ाने के लिए एक सकारात्मक आवाज बनें। उन्होंने कहा कि सही काम करने का आपका साहस आपके अगले कदमों से ही साबित होगा।
लोकतंत्र के  िलए संगठित होने का आह्वान 

मैरी मिलबेन ने भारतीय युवाओं से लोकतंत्र और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए संगठित होने का आह्वान किया। उन्होंने भारत में एक ऐसी नई आवाज उभरने की जरूरत बताई, जो देश में ही जन्मी, पली-बढ़ी और शिक्षित हुई हो। उनके मुताबिक युवाओं को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखनी चाहिए। उन गतिविधियों का विरोध करना चाहिए, जिन्हें वह देश के हितों के खिलाफ मानती हैं। मिलबेन ने अपने संदेश के अंत में युवाओं से एकजुट होने और शांतिपूर्ण विरोध के जरिए अपनी राय जाहिर करने की अपील दोहराई।  बता दें कि मिलबेन एक जानी-मानी अफ्रीकी-अमेरिकी हॉलीवुड अभिनेत्री और गायिका हैं। वे भारत में अपना राष्ट्रगान और धार्मिक गीत ओम जय जगदीश हरे गाने के लिए बहुत लोकप्रिय हैं। मिलबेन ने 2023 में प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा के दौरान एक कार्यक्रम में भारत का राष्ट्रगान जन गण मन गाया था। बता दें कि इससे पहले फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट में भी भारत में हो रहे आंदोलनों के पीछे विदेश फंडिंग का हाथ बताया था। अमेरिकी पत्रकार असना नोमानी  ने विदेशी फंडिंग और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के जरिए प्रदर्शन बढ़ाने की रिपोर्ट साझा की थी। इसी तरह दिल्ली पुलिस की जांच में भी पाकिस्तान कनेक्शन सामने आया था। साथ ही वरिष्ठ वकील और भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने भी विदेशी फंडिंग का दावा किया था। उन्होंने कहा कि देश में चल रहे आंदोलन की फंडिंग विदेशों से हो रही है। इसके पीछे विदेशी ताकतें हैं। उन्होंने कहा कि भारत में बांग्लादेश और नेपाल जैसा माहौल बनाने की कोशिश हो रही है।
एयरपोर्ट के बाहर दिपके का विरोध 

अब जैसे-जैसे इस आंदोलन की परते खुलने लगी हैं वैसे-वैसे देश में लोगों में जागरुकता बढ़ रही है। दिल्ली एयरपोर्ट के बाहर अभिजीत दिपके को लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। वायरल वीडियो में कुछ लोग उन्हें घेरकर सवाल करते और कहते सुनाई दे रहे हैं देश को क्यों बर्बाद कर रहे हैं? वीडियो में लोगों और अभिजीत के बीच तीखी बातचीत होती दिखाई देती है। बता दें कि दो दिन पहले इसी तरह बांग्लादेश की पूर्व अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस का न्यूयॉर्क के जॉन एफ. कैनेडी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विरोध हुआ था। उनको बांग्लादेशी प्रवासियों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। सोमवार को जब वे हवाई अड्डे पर पहुंचे तो प्रवासियों के एक समूह ने उन्हें घेर लिया और गंभीर आरोप लगाए। प्रदर्शनकारियों ने उन्हें आतंकवादी कहा। उन पर हजारों लोगों की हत्या करवाने और लोकतंत्र को बर्बाद करने के आरोप लगाए।  एक प्रदर्शनकारी ने चिल्लाते हुए कहा कि उन्होंने लोगों की हत्या की है और पूछा कि वह अमेरिका क्यों आए हैं।