जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ के बाद अब नई दिल्ली में 12 से 13 सितंबर को ब्रिक्स शिखर सम्मलेन होने जा रहा है। ब्रिक्स की हलचल के कारण अमेरिकी रणनीतिकारों की निगाह भारत पर आकर टिक गई है। किर्गिस्तान के बिश्केक में हुए एससीओ शिखर सम्मेलन में भारत को बड़ी कामयाबी मिली। बिश्केक घोषणापत्र सहित कुल 28 दस्तावेजों पर हस्ताक्षर हुए। इनमें क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा से लेकर नशा तस्करी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर और सूचना सुरक्षा, ऊर्जा, परिवहन नेटवर्क शमिल रहा। इसके अलावा लॉजिस्टिक्स, जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता संरक्षण जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने का खाका शामिल रहा। एससीओ के बाद अब पूरी दुनिया की नजरेंं ब्रिक्स शिखर सम्मलेन पर टिक गई हैं। इस बैठक में दुनिया के तीन दिग्गज देशों के नेताओं समेत कई अन्य बड़े नेता शमिल होंगें। इसमें रूस के राष्ट्रपति पुतिन और चीन राष्ट्रपति शी जिनपिंग का नाम प्रमुखता से शामिल है।
18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन होगा खास
इसके अलावा भारत की मेजबानी में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस भी हिस्सा लेंगे। यह सम्मेलन नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा। संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि गुटेरेस के सम्मेलन में शामिल होने की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है। हालांकि, उन्होंने संकेत दिया कि संयुक्त राष्ट्र प्रमुख करीब 10 दिन बाद नई दिल्ली में होने वाली ब्रिक्स बैठक में भाग लेंगे। बता दें कि यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेस का इस साल भारत का यह दूसरा महत्वपूर्ण दौरा होगा। फरवरी 2026 में वह नई दिल्ली में आयोजित इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में शामिल हुए थे। इससे एससीओ बैठक में भी वे ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने ईरान में जारी संघर्ष के मानवीय और आर्थिक प्रभावों पर चिंता जताई थी।
आमंत्रित होंगे कई देश
इस बार ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सदस्य और साझेदार देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ-साथ आउटरीच के तहत आमंत्रित देशों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। भारत ने अपनी अध्यक्षता के लिए बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोआॅपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी यानी लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता को थीम बनाया है। बता दें कि भारत ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य है। इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में इस समूह की अध्यक्षता कर चुका है। 1 जनवरी 2026 से भारत ने चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली है। इस वर्ष ब्रिक्स की स्थापना के 20 साल भी पूरे हो रहे हैं। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को परखने के लिए आज मोटरकेड रिहर्सल आयोजित की जा रही है। इसे देखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रतिबंध, डायवर्जन सिस्टम लागू किया है। साथ ही विस्तृत एडवाइजरी भी जारी की है। ऐसे में अगर आप भी दिल्ली जाना चाह रहें तो आज से लेकर 13 सितंबर तक डायवर्जन सिस्टम समझकर ही घर से निकलें। अधिकारियों के मुताबिक मोटरकेड रिहर्सल करीब 22 डायवर्जन प्वाइंट बनाए गए हैं। 35 से अधिक महत्वपूर्ण सड़कों पर यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की संभावना है। ट्रैफिक पुलिस ने वाहन चालकों से अपील की है कि वे अपनी यात्रा की पहले से योजना बनाएं, निर्धारित समय के दौरान प्रभावित मार्गों पर जाने से बचें और संभव हो तो वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करें। विदेश मंत्रालय के अनुसार, 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा। शिखर सम्मेलन में कई देशों के शीर्ष नेताओं और प्रतिनिधिमंडलों के शामिल होने की संभावना के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था के तहत मोटरकेड की रिहर्सल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।





