जन प्रवाद ब्यूरो।
नई दिल्ली। भारतीय संसद के इतिहास में 17 अप्रैल का दिन काफी अहम रहा। 12 सालों में पहली बार एनडीए सरकार को लोकसभा के अंदर महिला आरक्षण बिल पर सीधी हार का सामना करना पड़ा। सरकार को संविधान का 131वां संशोधन विधेयक 2026 को पास कराने में विफलता हाथ लगी। इसके बाद सरकार ने परिसीमन से जुड़े दो अन्य अहम बिल भी वापस लेने पड़े।

बता दें कि मोदी सरकार ने 2023 नारी शक्ति वंदन अधिनियम यानी महिला आरक्षण कानून पास कराया था। लेकिन इसे अगली जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होना था। इस प्रक्रिया में हो रही देरी को देखते हुए सरकार 131 वां संशोधन बिल लेकर आई थी। बता दें कि इस बिल का मकसद लोकसभा की 543 सीटों को बढ़ाकर 850 करना था। 2011 की जनगणना के आधार पर जल्द से जल्द नया परिसीमन लागू करना ताकि 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को 2029 के आम चुनावों से पहले ही लागू किया जा सके।

बता दें कि संविधान संशोधन बिल होने के कारण इसे पास कराने के लिए लोकसभा में दो तिहाई विशेष बहुमत की आवश्यकता थी। वोटिंग के दौरान सदन में 528 सांसद मौजूद थे। सरकार को बिल पास कराने के लिए 352 वोटों की आवश्यकता थी। लेकिन, विपक्ष की एकजुटता के चलते बिल के पक्ष में सिर्फ298 वोट पड़े। इस तरह मोदी सरकार को आवश्यक आंकड़े से 54 वोट कम मिले और यह ऐतिहासिक बिल सदन में गिर गया। बिल पास होने के लिए मोदी सरकार को 54 वोट कम मिले और यह ऐतिहासिक बिल सदन में गिर गया।





