समुद्र में मिलीं बेहद डरावनी मछलियां, वैज्ञानिकों ने खोजीं 31 नई प्रजातियां

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। अटलांटिक महासागर में वैज्ञानिकों के खास अभियान के दौरान हैरान करने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। इस सच ने पूरी दुनिया के शोधकर्ताओं के होश उड़ा दिए हैं। पानी के भयंकर दबाव और गहरे अंधकार के बीच तैरते पारदर्शी ग्लास स्क्विड और डरावनी मछलियों समेत 31 नई प्रजातियों का पता चला है। कई वैज्ञानिक इसे एलियन से भी जोड़कर देख रहे हैं। वैज्ञानिकों के लिए ब्रह्माण्ड जितना रहस्यमयी है समुद्र भी उतना ही रहस्य अपने भीतर समेटे हुए है। दोनों क्षेत्रों में वैज्ञानिक अक्सर खोज करते रहते हैं। कई बार इस शोध के दौरान चौंकानी वाली जानकारियां समाने आ जाती हैं। एक बार फिर से वैज्ञानिकों ने ऐसा ही कारनामा कर दिखाया है। ब्राजील के तट पर दो सप्ताह तक चले एक अंतरराष्ट्रीय अभियान के दौरान वैज्ञानिकों ने 31 नई और दुर्लभ समुद्री प्रजातियों की खोज की है। इस अद्भुत खोज में तेजी से तैरने वाला गोसामर वर्म, एक डरावनी दिखने वाली मछली और अंतरिक्ष के एलियन जैसे दिखने वाले कई जीव शामिल हैं। यह खोज दक्षिणी अटलांटिक महासागर की रहस्यमयी गहराइयों में की गई है। इन जीवों को लंबे समय से बेहद दुर्लभ माना जाता रहा है। नई रिसर्च से पता चलता है कि  ये दुर्लभ जीव इसलिए माने जा रहे हैं क्योंकि अब तक इन्हें ठीक से खोजा नहीं गया था।
मिडवाटर क्षेत्र पर केंद्रित था रिसर्च

इस बार वैज्ञानिकों ने अपने पूरे मिशन को मुख्य रूप से महासागर के मिडवाटर क्षेत्र पर केंद्रित किया था। इसे समुद्र की सतह के नीचे और तलहटी के ऊपर का हिस्सा माना जाता है। लगभग 600 से 3,300 फीट गहरा यह इलाका पृथ्वी का सबसे कम समझा जाने वाला इकोसिस्टम है। बता दें कि यह पानी के भारी दबाव और गहरे अंधकार के कारण रिसर्च के लिए बेहद कठिन माना जाता है। समुद्र के गहर इलाके में अभी तक बहुत कम रिसर्च किए गए हैं। अभियान की मुख्य वैज्ञानिक करेन ओसबोर्न ने इस राज के बारे में जानकारी साझा की। उनके अनुसार मिडवाटर पृथ्वी का सबसे बड़ा आवास है जो अविश्वसनीय जीवों से भरा हुआ है। इस चुनौतीपूर्ण और अंधकारमय वातावरण में जीवित रहने के लिए इन जीवों ने विकास के कई अनोखे तरीके अपनाए हैं। यह वैज्ञानिकों को समुद्र के बारे में लगातार नए शोध करने के लिए प्रेरित करता है। वैज्ञानिक इस शोध के बाद हैरान हैं कि पानी के भारी दवाब में ये इतने सालों से कैसे जीवित हैं। ओसबोर्न ने कहा कि इस अभियान को पूरा करने के लिए ओशन इंस्टीट्यूट के खोजी जहाज फाल्कोर (टू) का प्रयोग किया गया। साथ ही इस मुश्किल अभियान को अंजाम देने के लिए कई अत्याधुनिक तकनीकों का सहारा लिया गया। रिसर्च के दौरान सुबास्टियन नामक अंडरवाटर रोबोट, एक वर्चुअल रियलिटी चैंबर और पानी के भीतर रोबोटिक उपकरणों के साथ माइक्रोब्स का अध्ययन करने वाली विशेष ग्रेविटी मशीन का इस्तेमाल किया गया।
खास स्पिनिंग व्हील का प्रयोग


वैज्ञानिकों ने द स्क्विड नाम के एक खास स्पिनिंग व्हील कॉनफोकॉल माइक्रोस्कोप की मदद से पहली बार इन गहरे समुद्री जीवों की तस्वीरें लीं। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के बायोइंजीनियर मनु प्रकाश ने भी इस बारे में जानकारी साझा की। उनके अनुसार अत्यधिक दबाव और अंधेरे में रहने वाले जीवों की आंतरिक प्रक्रियाओं को लाइव देखना बेहद रोमांचक रहा।  उन्होंने समुद्री विज्ञान के एक नए भविष्य की शुरुआत बताया। यह मिशन मरीन बायोलॉजिकल साइंस के भविष्य की एक शानदार शुरुआत है।