जन प्रवाद, ब्यूरो।
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के बरुईपुर में 12 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में मुख्य आरोपी पुलिस मुठभेड़ में ढेर हो गया। बताया जा रहा है कि पुलिस घटनास्थल पर क्राइम सीन रिक्रिएशन के लिए लेकर गई थी। तभी आरोपी ने भागने की कोशिश की। साथ ही उसने पुलिस पर हमला कर दिया। इसके बाद पुलिस ने आत्मरक्षा की कार्रवाई करते हुए उसे एनकाउंटर में ढेर कर दिया।
बता दें कि रोंगटे खड़े कर देने वाले इस मामले में जनता में काफी आक्रोश है। मंगलवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी जायजा लेने बरुईपुर पहुंचे थे। उन्होंने बरुईपुर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में पीड़िता के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी थी और त्वरित व निष्पक्ष न्याय का पक्का भरोसा दिलाया था। इससे पहले मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार से फोन पर भी बात की थी। इस दौरे पर राज्य के पुलिस महानिदेशक सिद्धनाथ गुप्ता भी उनके साथ मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए जो भविष्य के लिए नजीर बने।

पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए पहले आनंद सरदार, प्रभास मंडल और दिवाकर सरदार नामक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। बीती रात जांच टीम एक आरोपी को घटना से जुड़े सबूतों की बरामदगी के लिए बरुइपुर के एक सुनसान इलाके में ले गई थी। पुलिस के अनुसार आरोपी ने पुलिस की गिरफ्त से भागने की कोशिश की और पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। आत्मरक्षा में पुलिस द्वारा चलाई गई गोली से वह गंभीर रूप से घायल हो गया और अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
बता दें कि बरुईपुर में शनिवार को लापता मासूम बच्ची का शव रविवार सुबह रेलवे लाइन के पास एक तालाब से बरामद हुआ था। शव मिलने की खबर फैलते ही स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए और हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गया। जनाक्रोश के दौरान उत्तेजित भीड़ ने एक अन्य युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। इसके बाद से इलाके में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गई थी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पीड़ित परिवार से मिलने के बाद इस मॉब लिंचिंग में जान गंवाने वाले युवक के परिजनों से भी मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाया।
इस घटना के बाद स्थानीय पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठा रहे थे। मृतका के परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि बच्ची के लापता होने की तुरंत शिकायत करने के बावजूद पुलिस ने समय पर खोजबीन शुरू नहीं की और घटनास्थल पर भी देरी से पहुंची। इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए डीजी सिद्धनाथ गुप्ता ने स्वयं उस तालाब और घटनास्थल का निरीक्षण किया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि तीन आरोपियों की गिरफ्तारी और एक के एनकाउंटर के बाद भी पुलिस की लापरवाही के आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी।





