जन प्रवाद, ब्यूरो।
लखनऊ। घुमन्तू जातियों के साथ-साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के बच्चों के लिए आश्रम पद्धति विद्यालय स्थापित किए हैं, जहां उन्हें अत्याधुनिक शिक्षा के साथ-साथ लॉगिंग और फूडिंग की नि:शुल्क सुविधा भी उपलब्ध हो सके। यह बातें सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहीं। वे घुमंतू समाज द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विमुक्त जातियों को कोई क्रिमिनल ट्राइव नहीं कह सकता। ये वे समुदाय हैं, जिन्होंने भारत के स्वाधीनता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया। स्वाधीनता संग्राम सेनानियों के रूप में उन्हें जो सम्मान मिलना चाहिए था, वही सम्मान प्रदान करने के संकल्प के साथ डबल इंजन की सरकार कार्य कर रही है।

सीएम योगी ने कहा कि वनटांगिया गांवों को पहली बार राजस्व गांव के रूप में मान्यता दी गई। आज वहां के लोग समाज की मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं। मुसहर समाज का पहले कोई संरक्षक नहीं था। उन्हें भी शासन की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं से आच्छादित करने का कार्य किया गया। थारू, गोंड, चेरो, बुक्सा, कोल और सहरिया इन सभी जनजातियों एवं समुदायों को डबल इंजन सरकार ने शासन की योजनाओं से आच्छादित किया। अनेक जातियों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा है। वनटांगिया गांवों को पहली बार राजस्व गांव के रूप में मान्यता दी गई। आज वहां के लोग समाज की मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं।

सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों से कहा था कि शासन की योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचेगा और जाति, क्षेत्र या भाषा के आधार पर किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा।
सीएम योगी ने कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ का यही मंत्र आज समाज के प्रत्येक वर्ग के उत्थान का आधार बना है और उत्थान की इसी यात्रा की नई कड़ी का नाम है ‘उत्तर प्रदेश घुमन्तू विकास बोर्ड’। हमारे लिए जनता-जनार्दन वोटबैंक नहीं है। लोकतंत्र में बिना किसी भेदभाव के प्रत्येक नागरिक तक शासन की योजनाओं और सुविधाओं का लाभ पहुंचना चाहिए। हमने जनता को जनार्दन मानकर उनका सम्मान किया है, उनकी पूजा की है।

सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश घुमन्तू विकास बोर्ड अनेक जातियों को चिह्नित कर उन्हें शासन की विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित करते हुए उनके जीवनस्तर को बेहतर बनाने का प्रयास करेगा। बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के प्रयासों से क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट-1871 समाप्त हुआ। वर्तमान में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ी जातियों में अनेक जातियां हैं, जो विमुक्त जाति के रूप में समाज के बीच कार्य कर रही हैं।





