सरकार ने नए नियमों को दी मंजूरी, भारत की सड़कों पर दिखेंगी सेल्फ-ड्राइविंग कारें

जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। भारत में कार बाजार का नया दौर शुरू होने वाला है। जल्द ही यहां की सड़कों पर सेल्फ-ड्राइविंग कार दौड़ती नजर आएगी। इसका कारण है कि भारत सरकार ने आटोनॉमस वाहन तकनीक को नई मंजूरी दे दी है। इसमें कार कंपनियों का कई तरह की सहूलियत प्रदान की गई है।
विदेशी कारों का शुरू होगा दौर

जिस कार तकनीक को अब तक लोग केवल विदेशी बाजारों या भविष्य की फिल्मों में देखते थे, वह अब जल्द भारत की सड़कों पर दिखाई देगी। यानी देश के लोग अब इन कारों में सफर करते नजर आएंगे। बता दें कि सरकार ने ऐसी उन्नत वाहन सुरक्षा तकनीकों को मंजूरी दी है। मोदी सरकार ने नई तकनीक को भारत में लाने के लिए आॅटोमोटिव रडार और कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी के लिए लाइसेंस की अनिवार्यता खत्म करने का फैसला किया है। देखने और सुनने में यह ऐसा कदम है सिर्फ नियमों में बदलाव जैसा लगता है। जब इसे बडे स्तर पर देखा जाए तो समझ में आता है कि यह वास्तव में यह भारत को सेफ, स्मार्ट और फ्यूचर की सेल्फ-ड्राइविंग मोबिलिटी की ओर ले जाने वाला बड़ा दरवाजा खोल सकता है। इस मंजूरी के बाद आने वाले समय में भारत की सड़कों पर खुद चलने वाली कारें दिखाई देने लगेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक सुरक्षा तकनीकों के इस्तेमाल से न केवल ड्राइविंग अनुभव बेहतर होगा, बल्कि सड़क हादसों को कम करने में भी मदद मिल सकती है। यही वजह है कि इस फैसले को भारतीय आॅटो सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
77 जीएचजेड से 81 जीएचजेड फ्रीक्वेंसी 

रिपोर्ट के अनुसार भारत सरकार ने 77 जीएचजेड से 81 जीएचजेड फ्रीक्वेंसी बैंड पर काम करने वाले आटोमोटिव रडार सिस्टम के लाइसेंस की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है। इसके अलावा 5.9 जीएचजेड बैंड पर चलने वाले सिस्टम के लिए भी लाइसेंस की जरूरत खत्म कर दी गई है। यही फ्रीक्वेंसी वाहन और सड़क किनारे लगे इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच कम्युनिकेशन के लिए इस्तेमाल होती है। यह फैसला भारत को अमेरिका और यूरोप जैसे विकसित आॅटोमोबाइल बाजारों के बराबर खड़ा करता है, जहां ऐसी तकनीकों के इस्तेमाल के लिए पहले से कहीं ज्यादा आसान नियम बनाए गए हैं। बता दें कि भारत में जब भी नई आटोमोबाइल तकनीक आती है तो उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ कीमत नहीं होती, बल्कि नियमों और मंजूरियों की जटिल प्रक्रिया भी होती है। किसी नई तकनीक को बाजार में लाने के लिए कंपनियों को ज्यादा समय और पैसे खर्च करने पड़ते है।  इसका सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ता है। अब इस मंजूरी के मिलने के बाद न केवल इन कारों कीमत कम होगी बल्कि भारत में आसानी से इनका परिचालन भी होगा। 
आटोनॉमस वाहन तकनीक प्रणाली पर काम

आटोनॉमस वाहन तकनीक प्रणाली पर बात करें तो इसमें कार कई सेंसर, कैमरा, रडार और सॉफ्टवेयर की मदद से आसपास के माहौल को समझती है। यह तकनीक वाहन को लेन में बनाए रखने, आगे चल रही गाड़ी से सुरक्षित दूरी रखने और संभावित खतरे की पहचान करने में मदद करती है।  इनमें आटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग, लेन कीप असिस्ट, अडैप्टिव क्रूज कंट्रोल और ड्राइवर अलर्ट जैसे फीचर्स शामिल हो सकते हैं। इन तकनीकों का मकसद चालक की मदद करना और दुर्घटना के जोखिम को कम करना है। दुनिया के कई देशों में ऐसी तकनीक तेजी से लोकप्रिय हो रही है और अब भारत भी इस दिशा में आगे बढ़ता नजर आ रहा है।
भारत में आएंगी वाहन निर्माता कंपनियां 

नई मंजूरी के बाद वाहन निर्माता कंपनियां भारत में और अधिक आधुनिक तकनीक वाली कारें पेश करने के लिए उत्साहित हैं। आने वाले वर्षों में ग्राहकों को ऐसी गाड़ियां देखने को मिल सकती हैं जिनमें सुरक्षा और सुविधा का स्तर पहले से कहीं ज्यादा होगा। खास बात यह है कि ऐसी तकनीक केवल लग्जरी कारों तक सीमित नहीं रहेगी। कई कंपनियां इसे मास मार्केट मॉडल्स में भी शामिल करने लगी हैं। इससे आम ग्राहकों को भी आधुनिक सुरक्षा तकनीकों का फायदा मिल सकेगा।