ब्राहांड को लेकर वैज्ञानिकों ने पेश की थ्योरी, 90 डिग्री तक पलट गई थी गैलेक्सी 

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। ब्राहांड को लेकर वैज्ञानिकों ने ऐसी थ्योरी पेश की है जिस पर विश्वास करना नामुमकिन है। नए अध्ययन के अनुसार 10 अरब साल पहले एक झटके में हमारी मिल्की वे गैलेक्सी एक झटके में 90 डिग्री तक पलट गई थी। इसका मतलब है कि पूरा का पूरा अंतरिक्ष उल्टा हो गया था। इसके बाद पूरी दुनिया का क्या हुआ था यह अभी शोध का विषय है। चिंता की बात यह है कि अब एक बार ऐसे ही हालात बन रहे हैं।
आसमान में दिखते हैं तारे


जब हम धरती से आसमान की ओर देखते हैं तो हमें चांद, सूरज और अनगिनत टिमटिमाते तारे नजर आते हैं। कभी-कभी यह दृश्य बेहद शानदार नजारे में बदल जाता है। अंतरिक्ष हुई ये घटनाएं वैज्ञानिकों के लिए अध्ययन का केंद बन जाती हैं। जब हम अपनी आकाशगंगा यानी मिल्की वे गैलेक्सी को ओर देखते हैं तो अंतरिक्ष में एक स्थिर और शांत जगह प्रतीत होता है। यह किसी चमकती हुई डिस्क की तरह एक ही दिशा में घूमता हुआ दिखाई देता है। एक नई रिसर्च ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। डरहम यूनिवर्सिटी के एस्ट्रोनॉमर्स ने एक सिमुलेशन स्टडी के आधार पर बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि अरबों साल पहले हमारी गैलेक्सी पूरी तरह से एक तरफ पलट गई थी। यह कोई अचानक होने वाली घटना नहीं थी। यह कई छोटी गैलेक्सी के साथ हुई भयानक टक्करों ने इसे अपनी धुरी से 90 डिग्री तक झुका दिया था। वैज्ञानिकों के अनुसार इसके घटना के पीछे एक जोरदार टक्कर थी। जिसने मिल्की वे के  पूरे ढांच को ही बदल दिया था। इसके साथ ही डार्क मैटर का प्रभाव भी पूरी तरह बदल गया था। वैज्ञानिकों के इस नए अध्ययन ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। अध्ययनकर्ताओं के अनुसार यह शोध अंतरिक्ष के कई अन्य रहस्यों को भी सुलझा सकता है। इससे यह पता चगाया जा सकेगा कि 13.6 अरब साल पुराने गैलेक्सी के इतिहास में क्या-क्या हुआ था। 
शोधकर्ता किरिल ने किया बड़ा दावा 

अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता किरिल ने बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि तारों की स्पीड और गैलेक्सी के पलटने के बीच कनेक्शन मिलना मेरे लिए बहुत अप्रत्याशित था। उनका मानना है कि यह घटना मिल्की वे और दूसरी गैलेक्सी के जटिल स्वभाव को दर्शाती है। जहां टक्कर हुई थी वह गैलेक्सी वह हिस्सा है जहां ज्यादातर तारे, धूल और गैस मौजूद हैं। यह पूरा हिस्सा एक पंखे के ब्लेड की तरह गैलेक्सी के केंद्र के चारो ओर घूमता है। इसके ऊपर और नीचे बहुत पुराने तारों का एक बड़ा घेरा मौजूद है। इस घेरे को विज्ञान की भाषा में स्टेलर हेलो कहा जाता है। यह पूरा हिस्सा डार्क मैटर के एक विशाल बुलबुले में कैद रहता है। वैज्ञानिक भाषा में इस बुलबुले को डार्क मैटर हेलो भी कहा जाता है।
मिल्की वे गैलेक्सी में तारों की स्थिति 

बता दें कि

गैया सैटेलाइट को मिल्की वे गैलेक्सी में तारों की स्थिति का मैप बनाने के लिए भेजा गया था। इस सैटेलाइट ने अंतरिक्ष में स्टेलर हेलो के भीतर कुछ बहुत अजीब चीजे रिकॉर्ड की। गैया के डेटा से पता चला कि गैलेक्सी के बाहरी हिस्से में मौजूद तारे बहुत धीमी गति से घूम रहे हैं। पहले वैज्ञानिक मान रहे थे कि शायद मिल्की वे में कुछ गलत अनुमान लगाया गया है। वहीं जब किरिल ने अपने साथी वैज्ञानिक बट्राकोव और रिसर्च टीम ने अलग एंगल से जांच शुरू की तो पूरा दृश्य ही पलट गया। वैज्ञानिकों ने इस जांच को पूरा करने के लिए आॅरिगा नामक एक खास सिमुलेशन टूल का उपयोग किया। इसके जरिए ब्रह्मांड के शुरूआती दौर में गैलेक्सी के रोटेशन का एनालिसिस किया गया। रिजल्ट में सामने आया कि गैलेक्सी के शुरूआती दौर में कई बड़े मर्जर हुए थे। इन पुरानी घटनाओं का असर आज भी गैलेक्सी की गति पर दिखाई दे रहा है। अंतरिक्ष के पुराने रिकॉर्ड्स से पता चलता है कि मिल्की वे गैलेक्सी कई छोटी गैलेक्सी से टकराई थी। इसका सबसे बड़ा सबूत वे अजीबोगरीब तारे हैं जिनका केमिकल स्ट्रक्चर बाहरी वातावरण जैसा है। यह साबित करता है कि वे तारे किसी एलियन वातावरण में बने थे। सिमुलेशन के अनुसार इस जोरदार टक्कर ने मिल्की वे गैलेक्सी पर एक मजबूत गुरुत्वाकर्षण बल डाला था। इसी भारी दबाव ने गैलेक्सी की डिस्क को धीरे-धीरे डार्क मैटर हेलो के भीतर घुमा दिया थी। इसका परिणाम यह हुआ कि हमारी आकाशगंगा का पूरा नक्शा ही बदल गया। यह घटना किसी रोमांचक साइंस फिक्शन फिल्म जैसी है। चीन की एकेडमी आॅफ साइंसेज की एक अन्य रिसर्च भी अब इसी बात का समर्थन करती है।  चीनी एस्ट्रोनॉमर्स ने भी यही निष्कर्ष निकाला कि गैलेक्सी की डिस्क अरबों सालो में धीरे-धीरे पलटी थी। वैज्ञानिकों के अनुसार दोबारा ऐसी घटना कब होगी इस पर अभी और रिसर्च की जरूरत है। अध्ययन पूरा होने के बाद ही इसके भयावह परिणामों से पर्दा उठ सकता है।