जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारत को लेकर अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने सकारात्मक रिपोर्ट पेश की है। एजेंसियों के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था जोरदार तेजी से आगे बढ़ रही है। एक ही दिन में तीन ग्लोबल एजेंसियों ने जीडीपी और ग्रोथ अनुमान को बढ़ा दिया है। अमेरिका-ईरान, रूस-यूक्रेन और अन्य ग्लोबल टेंशन के बाद भी भारतीय एकॉनामी ने पूरी दुनिया में अपना लोहा मनवा दिया है। भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का लोहा एक ही दिन में तीन ग्लोबल एजेंसियों ने माना है। तीनों एजेंसियों ने अपनी रिपोर्ट में भारत की जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को बढ़ा दिया है। देश की आगे बढ़ती इकोनॉमी को लेकर फिच रेटिंग्स से लेकर एस एंड पी और एडीबी तक ने एक साथ गुड न्यूज दी है। बता दें कि यह अच्छी खबर ऐसे समय में आई है जब पूरी दुनिया तेल-गैस संकट, महंगाई, इकोनॉमी स्लोडाउन से जूझ रही है। मूडीज के बाद अब एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स, फिच रेटिंग्स, आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने रिपोर्ट जारी की है। इन एजेंसियों ने 2026-27 के लिए भारत की वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7.1 फीसदी तक कर दिया है। इससे पहले मूडीज रेटिंग्स ने भी चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की आर्थिक वृद्धिदर का अनुमान बढ़ाकर 7 प्रतिशत किया था।
तिमाही में उम्मीद से बेहतर आर्थिक वृद्धि
एजेंसियों ने अनुमान बढ़ाने के पीछे पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर आर्थिक वृद्धि, मजबूत घरेलू मांग, निवेश, विनिर्माण, सेवा क्षेत्र और निर्यात को प्रमुख कारण बताया है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून में जीडीपी दर उम्मीद से बेहतर 7.8 प्रतिशत रहने के बाद वैश्विक स्तर पर भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति भरोसा और पुख्ता हुआ है। आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन यानी ओईसीडी ने 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 0.80 प्रतिशत अंक बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है। यह आंकड़ा अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों में सबसे अधिक है। इससे पहले जून में ओईसीडी ने चालू वित्त वर्ष में भारत की वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। इसी तरह एशियाई विकास बैंक यानी एडीबी ने चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान जुलाई में लगाए गए 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 फीसदी कर दिया है। इन आंकड़े में 0.4% की बढ़ोतरी देखी जा सकती है। व्हीं महंगाई का अनुमान भी 5.2% से घटाकर 5% कर दिया है।
एसएंडपी और फिच की रिपोर्ट

एसएंडपी और फिच ने भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर क्रमश: 7 प्रतिशत और 6.9 प्रतिशत किया है। दोनों एजेंसियों ने कहा कि मुद्रास्फीति का दबाव आरबीआई को चालू वित्त वर्ष में नीतिगत ब्याज दर कम से कम 0.25 प्रतिशत बढ़ाने के लिए प्रेरित कर सकता है। एसएंडपी ने वित्त वर्ष 2026-27 में खुदरा महंगाई औसतन 5.1% रहने का अनुमान लगाया है और इस दौरान आरबीआई की नीतिगत दर में 0.25 प्रतिशत बढ़ोतरी की संभावना जताई है। फिच ने भी अक्तूबर की मौद्रिक नीति बैठक में 0.25 प्रतिशत दर बढ़ोतरी की संभावना जताई है।
घरेलू खपत पर निर्भरता अधिक
आर्थिक जानकारों के अनुसार इस तेजी के पीछे का कारण निर्यात पर कम और घरेलू खपत पर अधिक निर्भर है। खुदरा महंगाई के नियंत्रण में रहने और ईंधन की कीमतों के सीमित असर के कारण मध्यम वर्ग और परिवारों की क्रय शक्ति सुरक्षित रही है। इसमें कारों, आवास और रोजमर्रा की उपभोक्ता वस्तुओं की मांग लगातार बनी हुई है। सरकारी पूंजीगत व्यय और निजी निवेश में तेजी देखने को मिल रही है। फिच के अनुसार, इस वित्त वर्ष में निवेश में 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि होने की उम्मीद है।





