वायनाड (केरलम), एजेंसी। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने बृहस्पतिवार को कहा कि पश्चिमी घाट के पारिस्थितिकी के नजरिये से संवेदनशील क्षेत्र (ईएसए) की मसौदा अधिसूचना का मुद्दा महत्वपूर्ण है और उनकी पार्टी तथा केरलम सरकार इससे प्रभावित होने वाली लोगों की आजीविका और बस्तियों की रक्षा करेगी। केरलम में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार है। प्रियंका गांधी ने यहां संवाददाताओं से कहा कि ईएसए के मसौदा अधिसूचना में संभवत: कुछ गांवों को शामिल किया गया है और मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने इस मामले पर गौर करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘यह (ईएसए) हमारे लिए एक मुद्दा है। ऐसा लगता है कि इसमें कुछ गांवों को शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री इस बारे में अवगत हैं। मुझे लगता है कि उन्होंने एक दिन पहले केंद्र सरकार के लोगों से मुलाकात की थी।
उन्होंने कहा है कि वह इस मामले को देखेंगे।’’ केरलम के वायनाड से लोकसभा सदस्य ने कहा, ‘‘हमारा काम आजीविका की रक्षा करना है। हमारा काम बस्तियों और वहां रहने वाले लोगों की रक्षा करना है। हम अपना काम करेंगे। यह बिल्कुल स्पष्ट है।’’ सतीशन ने बुधवार को कहा था कि राज्य सरकार ने केंद्र को एक प्रस्ताव सौंपने का फैसला किया है, जिसमें ईएसए की मसौदा अधिसूचना से आबादी वाले क्षेत्रों और कार्डमम हिल रिजर्व (सीएचआर) क्षेत्रों को पूरी तरह बाहर रखने का अनुरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा था कि इस उद्देश्य के लिए पर्यावरण विभाग एक व्यापक रूपरेखा तैयार करेगा। राज्य के कृषि मंत्री टी. सिद्दीकी ने 20 सितंबर को कहा था कि सरकार पश्चिमी घाट से संबंधित केंद्र की ईएसए मसौदा अधिसूचना से राज्य के आवासीय और कृषि क्षेत्रों को बाहर रखने के लिए कदम उठा रही है। उन्होंने कहा था कि केरल के करीब 131 गांवों और 9,993 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को अधिसूचना से बाहर रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। मंत्री का कहना था कि 25 जुलाई, 2026 को जारी मसौदा अधिसूचना पर आपत्तियां और सुझाव देने की 60 दिन की समयसीमा 24 सितंबर को समाप्त होगी और राज्य सरकार इस अवधि के भीतर केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को अपना व्यापक और सटीक जवाब सौंपेगी। उन्होंने कहा था कि सरकार 30 से अधिक गांवों को सूची से पूरी तरह बाहर करने तथा शेष गांवों में आवासीय और कृषि भूमि को ईएसए की सीमा से हटाने का लक्ष्य रखती है। कांग्रेस शासित कर्नाटक ने भी ईएसए अधिसूचना पर अपनी आपत्तियां जताई हैं। कस्तूरीरंगन समिति ने पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन कायम करने के लिए गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरलम और तमिलनाडु में फैले पश्चिमी घाट के करीब 60,000 वर्ग किलोमीटर यानी 37 प्रतिशत क्षेत्र को पारिस्थितिकी की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने की सिफारिश की थी।





