जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली : मार्च माह में चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो रही है। नवरात्रि में 19 मार्च से 27 मार्च के दौरान मां भवानी के नौ स्वरूपों की पूजा- अर्चना की जाएगी। माना जाता है कि माता रानी के अलग- अलग स्वरूप अलग- अलग रंगों और ऊर्जा का प्रतीक होते हैं। मां भवानी के अलग- अलग रूप और अलग-अलग स्वरूप का अपना एक अलग महत्व है। आइए, हम आपको बताते हैं कि नवरात्रि के इन नौ दिनों में आपको कौन-कौन से रंग के परिधान पहनने हैं।
पहला दिन
मां शैलपुत्री नवदुर्गा में प्रथम दुर्गा हैं जिनकी पूजा नवरात्रि के पहले दिन की जाती है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री और भगवान शिव की अर्धांगिनी माता पार्वती का यह स्वरूप वृषभ (बैल) पर सवार है, जिसके दाएं हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल है। वे मूलाधार चक्र की शक्ति, स्थिरता और योग साधना का प्रतीक मानी जाती हैं। नवरात्रि के पहले दिन नारंगी रंग के परिधान पहनने चाहिए। नारंगी रंग उत्साह और ऊर्जा का प्रतीक है।
दूसरा दिन
नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है। ब्रह्म' का अर्थ तपस्या और 'चारिणी' का अर्थ आचरण करने वाली है। नारद मुनि की सलाह पर भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए हज़ारों वर्षों की कठोर तपस्या के कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी (अपर्णा) कहा गया। मां ब्रह्मचारिणी के दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमण्डल है। वे श्वेत वस्त्र धारण किए हुए दिव्य रूप में हैं। दूसरे दिन हरे रंग के वस्त्र पहने जाते हैं। हरा रंग समृद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक है।

तीसरा दिन
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। देवी दुर्गा की तीसरी शक्ति साहस, शक्ति और शांति का प्रतीक हैं। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, जिसके कारण उन्हें यह नाम मिला। स्वर्ण के समान चमकीले शरीर वाली, दस भुजाओं वाली माँ चंद्रघंटा सिंह पर सवार हैं और उनके दसों हाथों में विभिन्न शस्त्र हैं। वे भक्तों के दुखों और भय का नाश करती हैं। उन्हें निर्भयता प्रदान करती हैं। तीसरे दिन भूरे या लाल रंग के परिधान पहने जाते हैं। यह शक्ति और साहस का प्रतीक हैं।
चौथा दिन
मां कुष्मांडा देवी दुर्गा का चौथा स्वरूप हैं, जिन्हें 'ब्रह्मांड की रचयिता' माना जाता है। वे अपनी हल्की हंसी से इस ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के लिए जानी जाती हैं। नवरात्र के चौथे दिन पूजा जाने वाला उनका अष्टभुजा रूप (आठ भुजाओं वाला) ऊर्जा का प्रतीक है और सूर्य देव को ऊर्जा प्रदान करता है। इस दिन नारंगी रंग के कपड़े पहने जाते है। यह ऊर्जा का प्रतीक है।
पांचवा दिन
नवरात्रि के पांचवे दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। मां स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय की माता है, जो ममता, करुणा और शक्ति का प्रतीक हैं। चार भुजाओं वाली, सिंह पर सवार और कमल आसन पर विराजमान मां स्कंदमाता ज्ञान और कर्म की देवी हैं, जो अपने भक्तों को मोक्ष और मनोवांछित फल प्रदान करती हैं। इस दिन सफेद या पीले वस्त्र पहने जाते है। यह पवित्रता और शांति का प्रतीक है।
छठा दिन
मां कात्यायनी नवदुर्गा का छठा स्वरूप हैं, जिनकी पूजा नवरात्रि के छठे दिन होती है। इन्हें महर्षि कात्यायन की पुत्री और तपस्या से प्रकट होने के कारण कात्यायनी कहा जाता है। यह योद्धा देवी हैं, जो सिंह पर सवार, चार भुजाओं वाली और तलवार-कमल धारण करने वाली हैं, जो विवाह बाधा दूर करने और शत्रुओं पर विजय के लिए पूजी जाती हैं। इस दिन लाल रंग के वस्त्र पहने जाते है। लाल रंग शक्ति और साहस का प्रतीक है।

सातवां दिन
मां कालरात्रि दुर्गा जी की सातवीं शक्ति और शक्ति का सबसे उग्र रूप है, जो नवरात्रि के सातवें दिन पूजी जाती हैं। अंधकार को नष्ट करने वाली यह देवी शुभ फल देने के कारण 'शुभकारी' भी कहलाती हैं, जो दुष्टों का विनाश कर भक्तों को भय-मुक्त, साहसी और ग्रह-बाधाओं से मुक्त करती हैं। इस दिन रॉयल ब्लू रंग के कपड़े पहने जाते हैं। यह दृढ़ता का प्रतीक है।
आठवें दिन
माता महागौरी आदिशक्ति दुर्गा का 8वां रूप हैं, जिनकी पूजा नवरात्रि के आठवें दिन (महाअष्टमी) की जाती है। 'महा' का अर्थ अत्यंत और 'गौरी' का अर्थ गोरा (सफेद) है, क्योंकि इनका रंग शंख/चंद्रमा के समान अत्यंत श्वेत है। माता महागौरी को सौंदर्य, पवित्रता, और दयालुता की देवी माना जाता है, जो भक्तों के सभी कष्ट दूर करती हैं और मन को एकाग्र करती हैं। इस दिन गुलाबी रंग के कपड़े पहने जाते है। गुलाबी रंग सुंदरता और सौम्यता का प्रतीक है।
नौवें दिन
मां सिद्धिदात्री नवरात्रि के नौवें दिन पूजी जाने वाली मां दुर्गा की नौवीं शक्ति हैं, जो सभी प्रकार की सिद्धियों (आध्यात्मिक शक्तियों) को प्रदान करती हैं। कमल पर विराजमान चार भुजाओं वाली यह देवी ब्रह्मा, विष्णु और शिव को दिव्य शक्ति प्रदान करती हैं, जिन्हें देवी पार्वती का सर्वोच्च रूप माना जाता है। इस दिन बैंगनी या मोरपंखी रंग के परिधान पहने जाते है। यह ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक है।





