जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने एक बार फिर एक ऐसे ग्रह की खोज की है जहां बारिश में पानी की बूंदें नहीं बल्कि हीरों की बरसात होती है। इस खोज ने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों को स्तब्ध कर दिया है। अब दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियां इस हीरे को धरती पर लाना चाहती हैं।
हीरो की बारिश करने वाला मिला ग्रह
जब भी हम बारिश का नाम सुनते है तो हमारे दिमाग में पानी की बूंदें, ओले या बर्फ गिरने की तस्वीर बनती है, लेकिन क्या आपने कभी ऐसी बारिश के बारे में सुना है, जिसमें आसमान से पानी नहीं बल्कि हीरे बरसते हों? पहली नजर में यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म या काल्पनिक कहानी जैसा लग सकता है। वैज्ञानिकों की नई खोज ने इसको सत्य साबित कर दिया है। यह खोज यह बताती है कि अंतरिक्ष यानी स्पेस और हमारा सौरमंडल ऐसे अनगिनत रहस्य और कौतुहलों से भरा हुआ है जिनके बारे में आम आदमी ही नहीं वैज्ञानिक भी पूरी तरह से परिचित नहीं हैं। जब भी कोई बड़ी खोज होती है तो उनके भी होश पाख्ता हो जाते हैं। अब इस बार भी ऐसा ही हुआ है।
बेहद रहस्यमयी है नया ग्रह
वैज्ञानिकों ने जिस नए ग्रह की खोज की है वह बेहद रहस्यमयी माना जा रहा है। यानी हमारी कल्पना से परे है। यह ग्रह एक मृत तारे के चारों ओर घूमता है और इसके वातावरण को देखकर वैज्ञानिक हैरान हैं। रिपोर्ट के अनुसयार इस अनोखे ग्रह का नाम पीएसआरजे 2322-2650 बी रखा गया है। इस ग्रह की खोज पल्सर टाइमिंग विधि से हुई है। वहीं जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ने हाल में इसके वातावरण का विस्तृत अध्ययन किया है। इसके बाद यह रहस्य सामने आया है। हीरों की बारिश के पीछे वैज्ञानिकों ने अनुमान जताया है कि यहां घने बादल पानी से नहीं बल्कि कार्बन से बन रहे हैं। ऐसे में इन बादलों से पानी की बूंदे नहीं बल्कि हीरों की बरसात हो रही है। यह ग्रह लगभग हमारे सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति के बराबर है। इसकी खास बात इसका वातावरण और संरचना है। यह पूरी तरह अलग और रहस्यमयी ह। यह ग्रह अपने डेड स्टार के बहुत करीब घूमता है, इसलिए इसकी परिस्थितियां बेहद गर्म और खतरनाक हो चुकी हैं। इस ग्रह का वातावरण लगभग पूरी तरह कार्बन और हीलियम से बना है। यहां आॅक्सीजन और नाइट्रोजन जैसे तत्वों का नामोनिशान नहीं है। बात दें कि यहे तत्व पृथ्वी जैसे ग्रहों में पाए जाते हैं। इनसे जीवन का निर्माण होता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यहां का वातावरण धुएं जैसे कणों से भरा हुआ है, जो इसे बेहद अजीब बनाता है। इस ग्रह पर बहुत अधिक गर्मी और भारी दबाव मौजूद है। ऐसे हालात में कार्बन के धुएं जैसे कण धीरे-धीरे जमकर कठोर हो सकते हैं और हीरे का रूप ले सकते हैं। यही कारण है कि वैज्ञानिक अनुमान लगाते हैं कि यहा डायमंड रेन यानी हीरे की बारिश जैसी घटना हो सकती है।
नेपच्यून और यूरेनस ग्रह पर भी बारिश
इससे पहले नेपच्यून और यूरेनस ग्रह पर भी बारिश के दौरान हीरे के कण पाए गए थे। बता दें कि धरती से नेपच्यून करीब 15 गुना बड़ा है, जबकि पृथ्वी से यूरेनस 17 गुना बड़ा है। यहां का वातावरण इस प्रकार का है कि यहां पर भारी मात्रा में हीरें बनते हैं। वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार हमारे सौर मंडल के अलावा भी ऐसे हजारों ग्रह मौजूद हैं, जिन पर हीरे की बारिश होती है। एक वैज्ञानिक प्रयोग के अनुसार अंतरिक्ष में सैकड़ों एक्सोप्लैनेट पर हीरों की बारिश हो सकती है। ये हीरे अत्यधिक कम तापमान पर एक्सोप्लैनेट के अंदरूनी भाग में मौजूद अत्यधिक संकुचित कार्बन यौगिकों का परिणाम होंगे। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 5600 एक्सोप्लानेट्स में से 1900 से अधिक पर हीरों की बारिश हो सकती है। इसमें हमारे सौर मंडल पृथ्वी के करीबी ग्रह यूरेनस और नेप्च्यून भी शामिल हैं। इस बारे में वैज्ञानिकों का मानना है कि जैसे-जैसे अंतरिक्ष के क्षेत्र में खोज आगे बढ़ेगी वैसे-वैसे इन ग्रहों का रहस्य दुनिया के सामने आता रहेगा।





