यूरोप के कई देशों विरोध प्रदर्शन तेज, फ्रांस, अल्बानिया, इटली, स्पेन और पुर्तगाल शामिल 

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। यूरोप के कई देशों विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। इसमें फ्रांस, अल्बानिया, इटली, स्पेन और पुर्तगाल शामिल हैं। वहीं फ्रांस में छात्रों से शुरू हुआ आंदोलन अब पूरे देश में पहुंच रहा है। हालात इस कदर खराब हो चुके हैं कि प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करना पड़ा। पुलिस ने 1300 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं भारत में भी कांग्रेस ने 1 नवंबर को सबसे बड़ी रैली का ऐलान कर दिया है।
अन्य देशों में पहुंच रही है स्कूलों से उठी आग 

31 अक्टूबर को होने वाले त्योहार हैलोवीन के लिए यूरोप में आतिशबाजी के डिब्बे खरीदे जा रहे हैं। पार्टियों की तैयारियां हो रही हैं। बाजार मुखौटों से सजे हैं। वहीं जश्न की रात से पहले यूरोप कांप रहा है। उसे यह डर किसी भूत प्रेत से नहीं बल्कि अपने देश के प्रर्दशनकारियों से है। फ्रांस के स्कूलों से उठी आग इटली, बेल्जियम और स्पेन तक पहुंच चुकी है। इटली में छात्र मेलनी सरकार के खिलाफ ‘पैसा स्कूलों को दो, हथियारों को नहीं’ के नारे लगा रहे हैं। अब जर्मनी उसका इंतजार कर रहा है। जर्मनी में भी हर तरफ बेचैनी हैं। यहां हर तरफ फलस्तीन का सवाल है। एम्सटर्डम के ओल्ड टाउन में एक फलस्तीनी व्यक्ति गाजा बचाओ की तख्ती लेकर बैठा मिला। बता दें कि पिछले साल अक्तूबर में करीब 2.5 लाख लोग लाल कपड़े पहनकर एम्सटर्डम की सड़कों पर उतरे थे और मांग की थी कि डच सरकार इजरायल पर सख्त रुख अपनाए। 
लाखों लोग सड़कों पर उतरे


बात फ्रांस की करें तो यहां महंगाई, स्कूलों की बदहाली और पुलिस की सख्ती के खिलाफ लाखों लोग सड़कों पर उतर आए। पेरिस समेत कई शहरों में प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। मार्च के अंत में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया और आंसू गैस छोड़ी। गृह मंत्रालय के अनुसार देशभर में करीब 1300 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सरकारी आकंड़ों के अनुसार प्रदर्शनों में करीब 4 लाख लोग शामिल हुए। दूसरी तरफ ट्रेड यूनियनों ने 8 लाख लोगों के शामिल होने का दावा किया है। बता दें कि  इस लहर की शुरूआत फ्रांस से हुई। 21 सितंबर को पेरिस के पास क्रेतेई के एक स्कूल से घेराव का आंदोलन शुरू हुआ और एक हफ्ते में 410 स्कूलों तक फैल गया। बता दें कि फ्रांस में पिछले शनिवार को भी बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी। उपद्रवियों ने दुकानों के शीशे तोड़े, सामान लूटा, गाड़ियों में आग लगाई और सरकारी इमारतों को निशाना बनाया था। इसको लेकर देशभर में कम से कम 2700 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। प्रदर्शनों को लेकर वामपंथी नेता ज्यां-लुक मेलेंशों ने पुलिस की सख्त कार्रवाई की आलोचना की। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने चुनावी रैली में फ्रांस के हालात के लिए वहां की इमिग्रेशन नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। इसी तरह हिंसक प्रदर्शनों के बीच एक बार फिर राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उनका कहना है कि लोग बांटने वालों के बहकावे में न आएं। मैक्रों ने कहा कि यह तनाव पिछले कुछ सालों से कई वजहों से पनप रहा था। हमने इस तनाव को बढ़ने दिया और हाल के सालों में ऐसी कई घटनाएं हुईं जिन्होंने हमारे गणतंत्र की नींव को हिला दिया है। 
विरोध अभियान को तेज करने की तैयारी 


वहीं भारत में कथित वोट चोरी और चुनावी गड़बड़ियों के मुद्दे पर कांग्रेस ने अपने विरोध अभियान को तेज करने की तैयारी कर ली है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पार्टी के सभी सांसदों से 30 अक्टूबर से 1 नवंबर तक दिल्ली में मौजूद रहने का आग्रह किया है। बता दें कि कांग्रेस 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में वोट बचाओ, देश बचाओ जन मार्च और मेगा रैली आयोजित करने जा रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी रविवार को छात्रों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं, युवाओं और व्यापारियों से 1 नवंबर को होने वाली रैली में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाए गए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि वोट चुराए जा रहे हैं। इस प्रक्रिया पर सवाल उठाने वालों के खिलाफ बल प्रयोग किया जा रहा है।