जापान ने समुद्र की तलहटी में खोज निकाला सोने का भंडार, खजाने की खोज में लगे भारत के वैज्ञानिक

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। भारत के दोस्त जापान ने समंदर की तलहटी में बड़ी खोज कर सभी देशों को हैरान कर दिया है। इस बार जापान ने अपने सेकेंडरी-आयन मास स्पेक्ट्रोमेट्री के जरिए उच्च-ग्रेड वाले अदृश्य सोने के गुप्त भंडार का पता लगाया है। ​​रिसर्च बताती है कि पानी के नीचे मौजूद क्रेटर में सोने की मात्रा अब तक दर्ज सबसे ज्यादा है। इसे अंडरवॉटर गोल्ड माइन कहा जा रहा है। अब भारत भी जल्द समुद्र में बड़ी खोज शुरू करने वाला है।
समुद्र की तलहटी में छिपा खजाना

पिछले दो दशकों में दुनियाभर के देशों में समुद्र की तलहटी में छिपे रत्न भंडारों को खोजने और उसे प्राप्त करने की होड़ मच गई है। अमेरिका, भारत, चीन समेत कई देश समुद्री भंडार को खोजने को लेकर तरह-तरह के अभियान शुरू करने जा रहे हैं या शुरू कर चुके हैं। इसमें सबसे ज्यादा खोज रेयर अर्थ को लेकर हो रही है। इस कड़ी में जापान के हाथ सोने का एक बड़ा भंडार लगा है। जापान के वैज्ञानिकों ने दक्षिण-पूर्वी तट के पास समुद्र के नीचे मौजूद ज्वालामुखी क्रेटर पर ब्लैक स्मोकर चिमनी और हाइड्रोथर्मल यानी टीले खोजे हैं। ये बड़ी मात्रा में सोना बना रहे हैं। ये हाइड्रोथर्मल वेंट ना केवल सोने के छोटे कण छोड़ रहे हैं बल्कि अदृश्य सोना भी बना रहे हैं, जिसे नंगी आंखों या सामान्य माइक्रोस्कोप से भी नहीं देखा जा सकता है। यह सोना समुद्र तल पर मौजूद पदार्थों के अंदर छिपा होता है। एक्सपर्ट इसे कमर्शियल अंडरवॉटर सोने की खदान बनाने के लिए एक बेहतरीन जगह मान रहे हैं।
वैज्ञानिकों ने किया हैरान वाल खुलासा

वैज्ञानिकों ने इसको लेकर हैरान करने वाला दावा भी किया है। उनके अनुसार पानी के नीचे मौजूद इस क्रेटर में छिपे सोने की मात्रा दुनियाभर में अब तक खोजे गए गोल्ड से तादाद है। बता दें कि जिस जगह पर यह खोज हुई है उसे हिगाशी-आओगाशिमा वेंट कहा जा रहा है। जापान के वैज्ञानिक 2015 से इसकी खोज कर रहे थे। जापान में शिजुओका यूनिवर्सिटी, वासेडा यूनिवर्सिटी और टोक्यो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने मिलकर यह खोज की है। इसके लिए सेकेंडरी-आयन मास स्पेक्ट्रोमेट्री तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यह सोने की कम मात्रा का पता लगाने का संवेदनशील तरीका है। सोने के छोटे नैनोकण पाइराइट के अंदर फंसे होते हैं। पाइराइट सल्फाइड मिनरल है, जो तब बनता है जब समुद्र तल से गर्म, धातु-युक्त तरल पदार्थ निकलते हैं। चमकदार बनावट के कारण पाइराइट को फूल्स गोल्ड कहा जाता है। 
पाइराइट में छिपा है असली सोना

अध्ययन में पाया गया कि असली सोना पाइराइट के अंदर दो रूपों में मौजूद होता है। इसमें पहला सूक्ष्म नैनोकणों के रूप में और दूसरा- मिनरल के क्रिस्टल स्ट्रक्चर में पाए जाते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि यहां दोनों तरह के सोने के परमाणु पाए गए हैं। रिसर्चर्स के अनुसार, पानी के नीचे मौजूद क्रेटर में पाए जाने वाले पाइराइट में सोने की मात्रा अब तक दर्ज सबसे ज्यादा है। जापान में संसाधन विकास के लिए अन्य हाइड्रोथर्मल वेंट क्षेत्रों की तुलना में यह जगह अपेक्षाकृत कम गहरी है। इससे यह भविष्य में माइनिंग के लिए एक अच्छी जगह बन जाती है। बता दें कि समुद्र तल पर फिलहाल कोई कमर्शियल सोने की खदान नहीं है। वहीं आने वाले समय में हिगाशी-आओगाशिमा वेंट तक आसान पहुंच और सोने की मात्रा से यहां भारी मात्रा में माइनिंग की जा सकती है। वैज्ञानिक समुद्र तल के मिनरल्स से अदृश्य सोने को निकालने के लिए किफायती तरीके पर काम कर रहे हैं।
भारत जल्द शुरू करेगा समुद्री अभियान 
भारत भी जल्द अपना समुद्री अभियान शुरू करने वाला है। इसे डीप ओशन मिशन कहा जा रहा है। इसके तहत असीमित खजाने और रहस्यों की खोज की जाएगी। इसके लिए स्वदेशी मत्स्य

6000 पनडुब्बी तैयार की गई है। इसके तह दुर्लभ खनिजों, तेल-प्राकृतिक गैस व समुद्री जीवों का अध्ययन करेगी। इसके अलावा मैंगनीज, निकल, कोबाल्ट और तांबा जैसे बेशकीमती खनिजों की भी खोज होगी। समुद्र मंथन जैसे अभियानों के माध्यम से गहरे समुद्र में छिपे तेल, प्राकृतिक गैस और गैस हाइड्रेट्स के विशाल भंडारों का भी पता लगाया जाएगा। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।