जनप्रवाद ब्यूरो, टीम।आखिरकार वैज्ञानिकों को जिसका डर था वहीं हुआ। डायनासोर युग समाप्त होेने के बाद पहली बार अमेरिका की धरती से कोई बड़ा उल्कापिंड टकराया है। इससे सैकड़ों किलोमीटर दूर से आग के गोले को लोगों ने देखा। वहीं इस उल्कापिंड को न पकड़ पाना वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष एजेंसियों की नाकामयाबी मानी जा रही है।
धरती के पास से गुजरते हैं एस्टेरॉयड
आमतौर देखा जाए तो एस्टेरॉयड यानी क्षुद्रग्रह के अक्सर पृथ्वी के पास से गुजरने की खबरें आती हैं। इस सप्ताह भी तीन उल्कापिंडों के धरती के बिल्कुल नजदीक से गुजरने की खबर आई थी। बता दें कि क्षुद्रग्रह अंतरिक्ष में घूमने वाली चट्टानी वस्तुएं हैं, जो मुख्य रूप से मंगल और बृहस्पति के बीच एस्टेरॉयड बेल्ट में पाई जाती हैं। ये 4.6 अरब साल पहले सौरमंडल के निर्माण के समय के अवशेष हैं। ये ग्रहों की तरह विकसित नहीं हो पाए। नासा के अनुसार उल्कापिंड रोजाना धरती के वायुमंडल में टकराते हैं और अक्सर इन रात के समय चमकीली रोशनी के साथ देखा गया है। अब अमेरिका के ओहायो राज्य स्थित क्लीवलैंड में मंगलवार को जो हुआ, उसने वहां रहने वाले लोगों को चौंका दिया। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां जोरदार धमाके की आवाज सुन गई। इतनी भयानक आवाज लोगों ने पहले कभी नहीं सुनी थी। लोगों ने इसकी तुलना शक्तिशाली परमाणु विस्फोट से की। नासा के अनुसार यह एक शक्तिशाली उल्कापिंड था।
बेहद शक्तिशाली थी चमक
लोगों की मानें तो इसकी चमक इतनी शक्तिशाली थी कि कम से वॉशिंगटन डीसी समेत 10 अमेरिकी राज्यों और कनाडा के ओंटारियो में भी बैठे लोगों ने इसे देखा। अमेरिकन मेटियोर सोसाइटी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर खगोल वैज्ञानिक कार्ल हर्गेनरोथन ने इस बारे में अपना अनुमान जाहिर किया। उन्होंने कहा कि यह सच में आग के गोले जैसा था। क्लीवलैंड में नेशनल वेदर सर्विस के स्टाफ ने भी जोरदार धमाके की आवाज सुनी और कंपन महसूस किया।
दिन के समय घटी घटना

उल्कापिंड के टकराने को लेकर सबसे चौंकाने बड़ी बात यह रही कि यह घटना दिन के समय घटी। बता दें कि ऐसे उल्कापिंड दिन में लगभग पूरी तरह से अदृश्य रहते हैं। सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठे लोगों ने भी इस आग के गोले को देखने की बात कही, जबकि उस समय सुबह के 9 बज रहे थे। अमेरिकन मेटेयॉर सोसाइटी ने बताया कि उसे विसकॉन्सिन से लेकर मैरीलैंड तक के इलाके से उल्कापिंड के देखे जाने की रिपोर्ट मिली है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के मेटेरॉयड पर्यावरण कार्यालय ने पुष्टि की की यह वस्तु एक ठोस क्षुद्रग्रह थी। इसका व्यास लगभग 6 फीट और वजन 7 टन था। यह उल्कापिंड लगभग 72,400 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से धरती के वायुमंडल में दाखिल हुआ। सबसे पहले उल्कापिंड को लोरेन के पास लेक एरी से लगभग 80 किलोमीटर ऊपर देखा गया। ऊपरी वायुमंडल से गुजरते हुए यह तेजी से दक्षिण-पूर्व की ओर बढ़ गया। इसके बाद यह उल्कापिंड ओहायो से लगभग 48 किलोमीटर ऊपर टूटकर बिखर गया। वैज्ञानिकों के अनुसार इससे निकलने वाली ऊर्जा विनाशकारी थी। नासा ने अनुमान लगाया है कि हवा में हुए इस धमाके से 250 टन टीएनटी के बराबर ऊर्जा निकली। यह एक बहुत बड़े मिलिट्री ग्रेड धमाके के बराबर है।
एजेंसी नहीं पकड़ पाई उल्कापिंड

इस उल्कापिंड को लेकर सबसे चिंता की बात है कि किसी को इसके आने की खबर तक नहीं लगी। नासा और दूसरी एजेंसियों धरती के करीब से गुजरने वाली हर चीज पर नजर रखती हैं, लेकिन इसका पता नहीं लगा सकतीं। यह धरती के प्लेनेटरी डिफेंस सिस्टम को चकमा देकर अंदर घुस आया। इससे आगे के लिए खतरा बना रहेगा कि उल्कापिंड कभी भी धरती से टकरा सकता है। अब सवाल उठता है कि दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियां और वैज्ञानिक क्या धरती की सुरक्षा की गारंटी दे पाएंगे।





