मक्का पैक्ट में शामिल हो सकता है बांग्लादेश, भारत के साथ फिर बढ़ेगा तनाव

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। भारत और बांग्लादेश के रिश्ते और भी पेंचीदा होते जा रहे हैं। चर्चा है कि वह मक्का समझौते में शामिल होने की इच्छुक है। अगर वह ऐसा करता है तो निश्चित रूप से भारत के साथ उसके संबंधों में और ज्यादा बदलाव होगा। दूसरी ओर भारत से दूरी बांग्लादेश को अब महंगी पड़ने लगी है।  बिजली संकट और गैस की भारी कमी से कारखाने बंद होने लगे हैं। खबर चल रही है कि बांग्लादेश भी मक्का पैक्ट में शामिल हो सकता है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान के करीबी सहयोगी हुमायूं कबीर ने कहा कि बांग्लादेश सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की से जुड़े किसी आर्थिक या रक्षा ढांचे में शामिल होने की संभावना को लेकर सकारात्मक रुख रखता है। हुमायूं कबीर की इस टिप्पणी से भारत के साथ जारी तनाव और बढ़ सकता है। हुमायूं कबीर ने कहा कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस के निमंत्रण पर बांग्लादेश के प्रधानमंत्री रियाद का दौरा करेंगे। मक्का पैक्ट मामले में भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि हम पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल मैं इतना ही कहना चाहूंगा कि मक्का समझौते को कई विशेषज्ञ भारत के खिलाफ देख रहे हैं। बता दें कि सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने 7 अगस्त को मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत तीनों में से किसी एक देश पर सशस्त्र हमला होता है तो उसे तीनों पर हमला माना जाएगा। 
बांग्लादेश को महंगी पड़ने लगी है दूरी

दूसरी ओर भारत के साथ दूरी बांग्लादेश को अब महंगी पड़ने लगी है। बिजली संकट के बाद बांग्लादेश अब प्राकृतिक गैस की भारी कमी से देश जूझ रहा है। इस संकट का सीधा असर देश की फैक्ट्रियों, घरों और ट्रांसपोर्ट पर पड़ रहा है। इससे खाद उत्पादन और खाद्य सुरक्षा पर भी संकट मंडराने लगा है।  गैस की इस कमी का सबसे बड़ा उदाहरण आशुगंज खाद कारखाना है। करीब 1200 कर्मचारियों वाला यह सरकारी कारखाना रोजाना 1000 टन से अधिक यूरिया बनाता था। मार्च 2025 से गैस न मिलने के कारण यह पूरी तरह बंद पड़ा है और अब मशीनों में जंग लग रही है। बता दें कि पहले गैस या तेल की कमी होने पर भारत मदद कर देता था। दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने और होर्मुज संकट के कारण भारत अब बांग्लोदश की मदद नहीं कर पा रहा है। बांग्लादेश पहले ही बिजली संकट से परेशान था। अब प्राकृतिक गैस की भारी कमी ने उद्योगों, घरों और परिवहन व्यवस्था को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। इसका असर खाद बनाने वाली फैक्ट्रियों पर भी पड़ा है, जिससे आने वाले समय में खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है। गैस संकट का असर बांग्लादेश के सबसे बड़े उद्योगों में से एक कपड़ा क्षेत्र पर भी पड़ा है। सैकड़ों फैक्ट्रियों में उत्पादन कम हो गया है या उन्हें बंद करना पड़ा है। बता दें कि बांग्लादेश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गारमेंट निर्यातक है। देश की करीब 80 प्रतिशत निर्यात आय इसी क्षेत्र से आती है। 
सत्ता परिवर्तन के बाद भी रिश्ते सामान्य नहीं


बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भी भारत के साथ तनाव कम नहीं हुआ है। बता दें कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान भारत आने वाले हैं।  इसके लिए पड़ोसी देश तरह-तरह की नई शर्ते रख रहा है। बांग्लादेश ने शर्त रख दी है कि जब तक भारत शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर कार्रवाई नहीं दिखाता, तब तक कोई दौरा संभव नहीं है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता शाहिदुल करीम ने कहा कि अनुकूल माहौल बनाने की जरूरत है। इसके अलावा बांग्लादेश ने छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के आरोपियों के प्रत्यर्पण की भी मांग की है। भारत ने हसीना के प्रत्यर्पण अनुरोध को प्राप्त करना स्वीकार कर लिया है। भारत ने कहा कि रिश्तों में पारस्परिकता जरूरी है। यानी भारत अब बांग्लादेश की मांगों का एकतरफा जवाब देने की बजाय बराबरी के आधार पर रिश्ते चाहता है। भारत सरकार के सूत्रों ने कहा है कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और द्विपक्षीय दौरे का न्योता बरकरार है। भारत ने अपनी तरफ से दरवाजा खुला रखा है, अब बांग्लादेश को फैसला करना है। बता दें कि बांग्लादेश में तख्ता पलट के बाद दोनों देशों के बीच के रिश्ते आज एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं, जहां गर्मजोशी की जगह ठंडी हवाएं चलने लगी हैं।