खत्म हो सकता हैरूस-यूक्रेन के बीच युद्व, भारत निभा सकता है बड़ी भूमिका

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। सालों से जारी रूस-यूक्रेन के बीच शांति की हल्की किरण नजर आई है। इस बार यूक्रेन में शांति की पहल भारत ने शुरू की है। पीएम मोदी की पुतिन से अपील के बाद अमेरिका भी एक्टिव हो गया है।  रूस-यूक्रेन का युद्ध हर दिन नए-नए मार्चों पर शुरू हो जाता है। कभी यूक्रेन ने रूस पर हमला कर दिया तो कभी खबरें आती हैं कि रूस ने यूक्रेन पर भीषण बमबारी की है। देखा जाए तो पिछले साढ़े चार वर्षों से चल रहे इस युद्ध को समाप्त करने की वैश्विक स्तर पर कोई बड़ी कोशिश भी नहीं हो रही है। अब भारत ने कूटनीतिक पहल की शुरुआत की है। भारत ने पहली बार रूस-यूक्रेन युद्ध में खुलकर मध्यस्थता का प्रस्ताव रखा है। इस पहल की शुरुआत तब से मानी जा रही है जब एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और पुतिन की मुलाकात हुई थी। अब विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि भारत रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए हर संभव मदद को तैयार है। जयशंकर का यह बयान तब आया जब वे यूक्रेन दौरे पर पहुंचे। 
पीएम मोदी की पुतिन से मुलाकात

बता दें कि पीएम मोदी की पुतिन से बातचीत के बाद यूक्रेन में शांति कोशिशों पर नई हलचल दिखी है। अब अमेरिकी वार्ताकार कीव और मॉस्को जाने वाले हैं। जेलेंस्की ने इसे अहम बताया, जबकि रूस ने स्थायी शांति की बात करते हुए बातचीत के लिए तैयारी तेज कर दी है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि इस बार अमेरिका से लेकर यूक्रेन तक में शांति प्रस्ताव लागू करने में तेजी देखी जा सकती है। जेलेंस्की ने अपने एक वीडियो संबोधन में कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के प्रतिनिधियों के यूक्रेन आने की शुरूआती तारीखें तय हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिकी प्रतिनिधियों की मॉस्को और कीव दोनों जगह बैठक होनी है। जेलेंस्की ने कहा कि आने वाले दिनों में होने वाली इन बैठकों का काफी प्रभाव दिखाई देगा। बता दें कि विदेश मंत्री एस जयशंकर कल युक्रेन पहुंचे। यहां उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के तरीकों और शांति स्थापित करने को लेकर चर्चा हुई। जयशंकर ने कहा कि भारत युद्ध समाप्त कराने के लिए किसी भी तरह की मदद देने को तैयार है। जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म  पर भारत के स्पष्ट रुख का धन्यवाद जताया। उन्होंने लिखा कि हम इस अन्यायपूर्ण युद्ध को खत्म करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता के आभारी हैं। यह निश्चित रूप से युद्ध का समय नहीं है, शांति की आवश्यकता है। यही भारत का स्पष्ट रुख है। इसके अलावा जेलेंस्की ने खुलासा करते हुए दावा किया कि जब विदेश मंत्री कीव में हमारे साथ थे, रूस ने फिर से ईरान निर्मित शाहेद ड्रोन्स से हमला किया। हमारी वायुसेना के लड़ाकू विमानों की सतर्कता के कारण प्रतिनिधिमंडल सुरक्षित रहा।
जयशंकर ने की जेलेंस्की से मुलाकात 

बता दें कि जेलेंस्की से मुलाकात से पहले जयशंकर ने यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के साथ व्यापक बातचीत की। संयुक्त बयान में उन्होंने कहा कि भारत लगातार यह मानता रहा है कि यह युद्ध का दौर नहीं है। युद्ध के मैदान से किसी समस्या का समाधान नहीं निकलेगा।  जयशंकर ने बताया कि भारत यूक्रेन को मानवीय सहायता भी देता रहा है। अब तक 19 खेप मानवीय सहायता भेजी जा चुकी हैं। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार पर भी चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि भारत और यूक्रेन के बीच दवाइयों, खाद्य एवं कृषि उत्पादों, उर्वरकों, मशीनरी, रसायन और उपभोक्ता वस्तुओं समेत कई क्षेत्रों में व्यापार होता है। युद्ध और रसद संबंधी चुनौतियों के कारण पिछले चार वर्षों में इसमें बाधा आई है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद व्यापार में मजबूती दिखाई दी है और कुछ नए अवसर भी सामने आए हैं। इसके सबसी अहम बात यह रही कि विदेशमंत्री एस जयशंकर ने दुनिया को आइना दिखा दिया। उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन जंग का समाधान इस बात से नहीं निकलेगा कि कोई देश रूसी तेल खरीदता है या नहीं।