साली ने जीजा पर लगाया छेड़छाड़ का झूठा आरोप, कोर्ट में सच्चाई सामने आते ही उड़ गए सबके होश, जानिए क्या है पूरा मामला

जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली: उत्तरप्रदेश के कानपुर जिले से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। कानपुर के नौबस्ता की रहने वाली एक नाबालिग लड़की ने 8 मार्च 2019 को अपने जीजा पर कथित तौर पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया। जीजा वायुसेना का जवान है। लड़की के आरोपों के आधार पर लगभग 5 महीने बाद 3 अगस्त 2019 को नौबस्ता थाने में पॉक्सो अधिनियम के तहत जीजा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई। कुछ समय बाद जीजा को जमानत मिल गई लेकिन जमानत मिलने से पहले जीजा अनुराग शुक्ला को 19 दिन जेल में बिताने पड़े थे वहीं अब मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जीजा को पीड़िता के उस बयान के बाद बरी कर दिया जिसमें उसने कहा कि घटना ‘‘सपने में हुई थी’’ और उसने गलतफहमी में शोर मचा दिया था। कथित तौर पर लगाए गए इन आरोपों से जवान को मानसिक तनाव झेलना पड़ा। 

लड़की ले रही थी एंटीबायोटिक’ दवाएं
बचाव पक्ष के वकील करीम अहमद सिद्दीकी ने बुधवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि मामले की सुनवाई के दौरान लड़की ने अदालत को बताया कि वह ‘एंटीबायोटिक’ दवाएं ले रही थी और घटना वाली रात वह अर्द्धबेहोशी की हालत में थी तभी उसे ‘‘सपने में महसूस’’ हुआ कि उसके जीजा अनुराग शुक्ला ने उसे पकड़ लिया और उससे छेड़छाड़ की, जिसके बाद वह डरकर जाग गई और शोर मचा दिया। उन्होंने बताया कि लड़की के पिता और बड़ी बहन ने भी अदालत को बताया कि शुक्ला के खिलाफ शिकायत गलतफहमी में दर्ज कराई गई थी। सिद्दीकी ने बताया कि विशेष पॉक्सो अदालत की न्यायाधीश रश्मि सिंह ने सात मार्च को शुक्ला को बरी कर दिया, जिससे सात साल की कानूनी लड़ाई खत्म हो गई।

अनुराग शुक्ला ने मायके पक्ष पर लगाए गंभीर आरोप 
शुक्ला ने फोन पर ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि उसके खिलाफ तीन अगस्त 2019 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी और उन्हें उसी वर्ष 29 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा कि 17 अक्टूबर को जमानत मिलने से पहले उन्हें 19 दिन जेल में बिताने पड़े। शुक्ला ने कहा कि इस मुकदमे की वजह से उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा तथा करियर की संभावनाओं को नुकसान पहुंचा। उन्होंने दावा किया कि इस मुकदमे के कारण वह 2020 में कॉर्पोरल के पद पर प्रोन्नति नहीं पा सके और उन्हें ‘लीडिंग एयरक्राफ्टमैन’ के तौर पर ही काम करना पड़ा। शुक्ला ने यह भी आरोप लगाया कि मुझे इस मामले में झूठा फंसाया गया क्योंकि मेरे ससुर विजय तिवारी चाहते थे कि मैं अपनी जमीन, घर और दूसरी संपत्ति अपनी पत्नी और साली के नाम कर दूं।