जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। दुनियाभर में तेल और गैस संकट के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। ओएनजीसी ने ओडिशा तट से करीब 43 किलोमीटर दूर महानदी डीपवॉटर बेसिन में गैस की खोज की है। यह समुद्र मंथन पहल के तहत पहली डीपवॉटर ड्रिलिंग खोज मानी जा रही है। यहां लगातार गैस का प्रवाह मिल रहा है और रिजर्वायर प्रेशर भी उत्साहजनक बताया गया है।
युद्ध से पूरी दुनिया त्रस्त
अमेरिका, इलरायल और ईरान बीच चल रहे युद्ध से पूरी दुनिया त्रस्त हो चुकी है। यहां तक की दुनिया के बडे तेल उत्पादक खाड़ी देशों पर संकट आ यगा है। इससे पूरी दुनिया पेरशान है। तेल आर्पूर्ति प्रभवित होने से कई देश डर गए हैं। तेल और गैस की समस्या को हल करने में ओएनजीसी को बड़ी कामयाबी मिली है। कंपनी ने ओडिशा के तट से लगभग 43 किलोमीटर दूर समुद्र में एक गहरे कुएं में गैस की बड़ी खोज की है। यह खोज महानदी बेसिन में 18 सितंबर को लगभग 1450 मीटर की गहराई पर हुई। यह खोज भारत के लिए बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि इससे देश का तेल और गैस आयात बिल कम हो सकता है। कंपनी ने बताया कि इस कुएं से पिछले तीन दिनों से लगातार अच्छी रफ्तार और दबाव के साथ गैस निकल रही है। अभी तक गैस की सही मात्रा या कुल भंडार की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। अब आगे की जांच से यह पता चलेगा कि इस कुएं से कितनी गैस निकाली जा सकती है और क्या इसका व्यावसायिक उत्पादन फायदेमंद होगा। ओएनजीसी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि कंपनी गहरे और अत्यंत गहरे समुद्री क्षेत्रों में तेल और गैस की खोज जारी रखेगी।
अच्छे से गैस का हो रहा प्रवाह
ओएनजीसी ने बताया कि कुएं से पिछले तीन दिनों से अच्छे से गैस का प्रवाह हो रहा है। यह खोज कंपनी के डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन प्रोग्राम और भारत के घरेलू हाइड्रोकार्बन संसाधन आधार को बढ़ाने के प्रयासों को मजबूत करती है। कंपनी के मुताबिक गैस का फ्लो और रिजर्वायर प्रेशर उत्साहजनक है। साथ ही, भारत के अपने देश में मौजूद तेल और गैस संसाधनों का आधार बढ़ाने की कोशिशों को भी इससे मदद मिलेगी। बमता दें कि इस खोज के अलावा इलाके में हुई अन्य खोजों को भी पीएनजी रूल्स, 2025 के तहत साझा सुविधाओं के जरिए विकसित करने की संभावना है। इससे गहरे समुद्र में मौजूद गैस संसाधनों को उत्पादन में लाने में मदद मिल सकती है। इस खबर के बीच ओएनजीसी के शेयर में भी तेजी देखी गई। बता दें कि इससे पहले ओएनजीसी ने दो साल पहले 2024 में महानदी बेसिन में ही उत्कल और कोणार्क नाम की गैस खोजें की थीं। जिस कुएं में अब गैस मिली है उसका नाम एमडीडब्ल्यू 28 है। यह कोणार्क से करीब 23 नॉटिकल मील दूर लगभग 770 मीटर गहरे पानी में स्थित है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस खोज को भारत के अपतटीय खोज कार्यक्रम के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में मिली अन्य खोजों के साथ मिलकर अब साझा सुविधाओं के जरिए विकास की संभावना बनती है, जिससे लागत और समय दोनों कम हो सकते हैं। बता दें कि एमडीडब्ल्यू 28 कुएं की खुदाई 25 जुलाई को शुरू हुई थी। यह समुद्र मंथन पहल के तहत महानदी बेसिन के अनछुए गहरे समुद्री इलाकों की खोज का हिस्सा है। सरकार की एजेंसी के अनुसार इस बेसिन में जमीन पर करीब 45 मिलियन टन और उथले पानी में करीब 100 मिलियन टन संसाधन होने का अनुमान है। वहंी गहरे पानी के हिस्से का अभी आकलन नहीं हुआ है। बता दें कि केंद्र सरकार ने जुलाई में समुद्र मंथन को 84,084 करोड़ रुपये के बजट के साथ मंजूरी दी थी। यह 2030-31 तक चलेगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे देश के हाइड्रोकार्बन भंडार में 600 मिलियन टन से ज्यादा की बढ़ोतरी होगी।





