कौन चलता है प्रकाश से तेज, वैज्ञानिकों की खोज से सब हैरान

जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। वैज्ञानिकों ने ऐसी खोज की है जिसने पुरानी थ्योरी को ही पलट दिया है। अभी तक यह माना जा रहा था कि दुनिया में प्रकाश की रफ्तार सबसे तेज होती है। अब शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रकाश के बीच में बनने वाला छिद्र प्रकाश से भी तेज चलता है। वैज्ञानिकों की ये नई खोज बेहद चौंकाने वाली है।
सार्वभौमिक सत्य को भी किया फेल

हम सभी यह मानते हैं कि प्रकाश के आने से अंधकार दूर हो जाता है। यह सामान्य अवधारण है। अब वैज्ञानिकों की नई थ्योरी ने इस सार्वभौमिक सत्य को ही झुठला दिया है। अब सवाल उठता है कि क्या अंधेरा रोशनी से भी तेज चल सकता है? हालिया वैज्ञानिक खोज ने ब्रह्मांड में रोशनी और अंधेरे को लेकर हमारी समझ को पूरी तरह से बदल दिया है। इस खोज ने दुनिया भर के वैज्ञानिकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। शोधकर्ताओं ने साबित कर दिया है कि अंधेरे की आकृतियां रोशनी से भी तेज गति से चल सकती हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह अल्बर्ट आइंस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत थ्योरी आॅफ रिलेटिविटी को गलत भी नहीं ठहराता है। नई खोज में शोधकर्ताओं ने रोशनी की लहरों के बीच अंधेरे के भंवर को खोज निकाला है। यह वह तत्व है जो खुद प्रकाश की गति से भी तेज चल सकते हैं।
अल्बर्ट आइंस्टीन ने थ्योरी को किया फेल

बता दें कि 20वीं सदी की शुरुआत में अल्बर्ट आइंस्टीन ने बताया था कि वैक्यूम यानी जहां हवा न हो वहां रोशनी की गति सबसे तेज होती है। कोई भी वजन वाली चीज इससे तेज नहीं चल सकती। यह नियम उन सिग्नल्स पर भी लागू होता है जो ऊर्जा या जानकारी ले जाते हैं। जिन चीजों में कोई वजन या ऊर्जा नहीं होती, वे अलग तरीके से बर्ताव कर सकती हैं। यहीं से सुपरलूमिनल इफेक्ट्स यानी रोशनी से भी तेज चलने की घटना की संभावना पैदा होती है। इसकी खोज करने के लिए वैज्ञानिक पिछले कई दशकों से काम कर रहे थे। अब जाकर उन्हें सफलता मिली है। बता दें कि रोशनी लहरों के रूप में आगे बढ़ती है। इन लहरों के बीच कुछ ऐसे हिस्से भी होते हैं जहां रोशनी का प्रभाव बिल्कुल शून्य होता है। इन खाली जगहों को नल पॉइंट्स कहा जाता है। आसान शब्दों में कहें तो यह रोशनी के बीच में मौजूद अंधेरे वाले हिस्से हैं।
प्रोफेसर इदो कामिनर का बयान

बता दें कि प्रोफेसर इदो कामिनर और उनकी अंतरराष्ट्रीय टीम इस थ्योरी पर काम कर रही है। शोधकर्ताओं ने रोशनी की तुलना पानी से की है। उनके अनुसार यह वैसे ही है जैसे पानी में गोल घूमता हुआ भंवर अपने आस-पास की लहरों से बिल्कुल अलग और स्वतंत्र होकर चलता है, ठीक वैसे ही रोशनी के बीच बने ये अंधेरे के भंवर भी काम करते हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि प्रयोगों में इन अंधेरे के भंवरों को उस रोशनी की लहर से भी ज्यादा तेजी से आगे बढ़ते देखा गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस प्रयोग का विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में बहुत बड़ा असर दिखेगा। प्रोफेसर कामिनर के अनुसार यह खोज लहरों से जुड़े उन यूनिवर्सल नियमों को सामने लाती है, जो ध्वनि और तरल पदार्थों पर भी लागू होते हैं। इसके कई अहम तकनीकी फायदे भी देखने को मिलेंगे। इसके जरिए अब उन बेहद तेज प्रक्रियाओं को देखना और उनका सटीक विश्लेषण करना संभव हो जाएगा, जिन्हें अब तक नामुमकिन माना जाता था। कुल मिलाकर, यह महत्वपूर्ण खोज भविष्य में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के क्षेत्र में रिसर्च के कई नए दरवाजे खोलने जा रहा है।