जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली।10 नवंबर को लाल किले के पास हुए विस्फोट में 15 लोगों की मौत के मामले में सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल की जांच के दायरे में आए अल-फलाह समूह के अध्यक्ष राहत नहीं मिली। दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को अल-फलाह समूह के अध्यक्ष जावेद अहमद सिद्दीकी को दिल्ली में 45 करोड़ रुपये की जमीन के धोखाधड़ी से किए गए अधिग्रहण से जुड़े धन शोधन मामले में 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। सिद्दीकी को शनिवार को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल चौधरी प्रधान के समक्ष पेश किया गया। उसे 25 मार्च को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की दस दिन की हिरासत की अवधि समाप्त होने पर न्यायाधीश के समक्ष पेश किया गया। अब उसे 17 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
पीएमएलए के तहत मामला दर्ज
ईडी ने 24 मार्च को धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दूसरे मामले में सिद्दीकी को गिरफ्तार किया था। उनकी जांच में पाया गया कि फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और उनका इस्तेमाल जमीन के धोखाधड़ीपूर्ण अधिग्रहण के लिए किया गया और तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन के निदेशक और अधिकतर शेयर रखने वाले सिद्दीकी ने कुछ व्यक्तियों के साथ मिलकर इस जालसाजी को अंजाम दिया। ईडी के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी के मदनपुर खादर गांव में स्थित विवादित 1.14 एकड़ जमीन का मूल्य 45 करोड़ रुपये है। यह जमीन खसरा संख्या 792 में है। एजेंसी ने बताया कि दस्तावेजों में जमीन की खरीद के लिए तय राशि 75 लाख रुपये थी।
विस्फोट के बाद विवादों में था विवि
सिद्दीकी को इससे पहले नवंबर 2025 में पीएमएलए मामले में गिरफ्तार किया गया था। उस पर अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित शिक्षण संस्थानों में पंजीकृत छात्रों के साथ धोखाधड़ी से जुड़े धन शोधन के आरोप थे। संघीय जांच एजेंसी ने आरोप लगाया था कि विश्वविद्यालय ने 2018 से 2025 के बीच 415.10 करोड़ रुपये जुटाए और छात्रों के फंड का निजी इस्तेमाल किया। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने पांच फरवरी को सिद्दीकी को उसके निजी विश्वविद्यालय में अनियमितताओं से जुड़े कथित जालसाजी के आरोप में गिरफ्तार किया। यह मामला अल फलाह विश्वविद्यालय पर छात्रों को गुमराह करने के लिए राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (एनएएसी) और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की मान्यता का झूठा दावा करने के आरोप में दर्ज दो प्राथमिकियों से जुड़ा है। बता दें कि विश्वविद्यालय 10 नवंबर को लाल किले के पास हुए विस्फोट में 15 लोगों की मौत के मामले में सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल की जांच के दायरे में आ गया था।





