वैज्ञानिकों ने जिंदा किया 24000 साल से बर्फ में जमा अजीब जीव

जनप्रवाद ब्यूरो, टीम। वैज्ञानिकों ने एक ऐसे जीव को जिंदा करने में कामयाबी हासिल की है जो 24000 साल से बर्फ में जमा था। शोधकर्ताओं ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया है। यह जीव साइबेरिया के पर्माफ्रॉस्ट में जमीन की काफी गहराई में फंसा हुआ था। इस जीव ने जिंदा होने के बाद खुद की संख्या बढ़ानी भी शुरू कर दी है। इसे विज्ञान के क्षेत्र में चमत्कारिक घटना माना जा रहा है।
प्रकृति में कई रहस्यमयी जीव 

प्रकृति में कई ऐसे रहस्यमयी जीव हैं जो आज तक इंसानों की नजरों से दूर हैं। इनकी खोज समय-समय पर वैज्ञानिक करते रहते हैं। इसी खोज की कड़ी में वैज्ञानिकों ने एक प्रागैतिहासिक जीव को फिर से जीवित करने में सफलता हासिल की है। यह 24000 साल से बर्फमें दबा हुआ बताया जा रहा है। शोधकर्ताओं के अनुसार यह बहुत छोटा जीव आर्कटिक क्षेत्र की पर्माफ्रॉस्ट यानी हमेशा जमी रहने वाली बफीर्ली जमीन में लगभग 24000 सालों से फंसा हुआ था। इस जीव को शोधकर्ताओं ने बडेलॉइड रोटिफर नाम दिया है। इस वैज्ञानिक उपलब्धि ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस उपलब्धि ने अस्तित्व, समय और यहां तक कि जैविक सीमाओं के बारे में कई सवाल खड़े किए हैं।
बेहद खास और अजीव जीव 

बेहद खास और अजीव जीव के बारे में करंट बायोलॉजी नाम की साइंस मैगजीन में लेख प्रकाशित हुआ है। इस लेख का शीर्षक 24,000 साल पुरानी आर्कटिक पर्माफ्रॉस्ट से मिला एक जीवित बडेलॉइड रखा गया है। लेख के अनुसार बडेलॉइड रोटिफर जीव को साइबेरिया की बफीर्ली जमीन के नीचे दबा हुआ पाया गया था। इसके बाज इसे प्रयोगशाला में इसे फिर से जीवित किया गया। इससे भी ज्यादा हैरानी की बात यह है कि यह जीव न सिर्फ जीवित रहा, बल्कि इसने अपनी संख्या बढ़ाना भी शुरू कर दिया। यह जीव हजारों सालों तक बर्फ में जमे रहने के बाद सफलतापूर्वक फिर से जीवित हुआ और इसने प्रजनन भी किया है। वैज्ञानिकों के अनुसार बडेलॉइड रोटिफर की खोज उत्तर-पूर्वी साइबेरिया से लाए गए पर्माफ्रॉस्ट के नमूनों में हुई। वैज्ञानिकों ने जमीन में काफी गहराई तक छेद किए, जहां की मिट्टी कई शताब्दियों से जमी हुई थी। मिट्टी की उम्र का पता लगाने के लिए रेडियोकार्बन डेटिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इस शोध में अनुमान लगाया गया कि यह लगभग 24,000 साल पुरानी है। बता दें कि बडेलॉइड रोटिफर बहुत छोटे यानी सूक्ष्म जीव होते थे। हजारों साल पहले ये आमतौर पर ताजे पानी में पाए जाते थे। वैज्ञानिकों का कहना है कि बडेलॉइड रोटिफर क्रिप्टोबॉयोसिस की प्रक्रिया के कारण जिंदा रहा। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें किसी जीव का मेटाबॉलिज्म लगभग पूरी तरह से रुक जाता है, जिससे वह बेहद कठोर वातावरण में भी जीवित रह पाता है। यह बहुत कम तापमान, पानी की कमी और यहां तक कि आॅक्सीजन की अनुपस्थिति में भी खुद को जीवित रख लेता है। यह जीव हजारों सालों तक जीवित कैसे रह पाया, इसका राज इसी प्रक्रिया में छिपा हुआ है। वैज्ञानिकों के अनुसार अगर इस अधिक शोध किया गया तो यह पता चल सकता है कि धरती पर मानव जीवन की उत्पत्ति और विकास कैसे हुआ।