जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। खगोलविदों ने अंतरिक्ष में करीब 12.5 अरब साल पुरानी बेहद ताकतवर रेडियो गैलेक्सी की खोज की है। इस गैलेक्सी का नाम टीएक्सएस 2354+015 दिया गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह अब तक खोजी गई सबसे ताकतवर रेडियो गैलेक्सी हो सकती है। इसके केंद्र में मौजूद विशाल ब्लैक होल से निकलने वाले प्लाज्मा जेट्स ने अंतरिक्ष में भारी हलचल मचाई है।
हमारा ब्रह्माण्ड रहस्यों का भंडार
हमारा ब्रह्माण्ड रहस्यों का भंडार है। इसको लेकर वैज्ञानिक और खगोलविद खोज करते हैं। उनके द्वारा किए गए शोध विज्ञान पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं। इसी कड़ी में अब खगोलविदों ने अंतरिक्ष में अब तक की सबसे विशालकाय रेडियो गैलेक्सी खोजी है। यह हमारी आकाशगंगा से 100 गुना ज्यादा चौड़ी और सौरमंडल से 300 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसका निर्माण ब्रह्माण्ड बनने के करीब एक अरब साल बाद हुआ है। बता दें कि ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति लगभग 13.8 अरब वर्ष पहले एक अत्यधिक गर्म और सघन अवस्था के बिग बैंग के द्वारा हुई थी। वहीं वैज्ञानिकों द्वारा खोजी गई नई खगोलीय संरचना करीब 12.5 अरब साल पुरानी है। शोधकर्ताओं ने इस विशालकाय रेडियो गैलेक्सी को टीएक्सएस 2354+015 नाम दिया है। स्पेक्ट्रोस्कोपी जांच में इस गैलेक्सी का रेडशिफ्ट 4.9 दर्ज किया गया है।
बाल्मावेर्दे के नेतृत्व में यह खोज
इटली के ट्यूरिन में स्थित आईएनएएफ एस्ट्रोफिजिकल आॅब्जर्वेटरी की वैज्ञानिक बारबरा बाल्मावेर्दे के नेतृत्व में यह खोज की गई है। शोधकर्ताओं के अनुसार इसके अंदर कई बड़े ब्लैकहोल हैं। जो कि तेजी से चलने वाले आवेषित कण हैं जो रेडियो तरंगों को इधर से उधर ले जा रहे हैं। एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार इससे निकलने वाले जेट स्ट्रीम भी बहुत बड़े हैं। यह प्रकाश की गति के बराबर ताकतवर प्लाज्मा जेट्स बाहर फेंक रही है। इन विशालकाय जेट्स से भारी मात्रा में रेडियो तरंगे अंतरिक्ष में फैल रही हैं। बता दें कि खगोल विज्ञान में ऐसी व्यवस्था को रेडियो-लाउड एक्टिव गैलेक्टिक न्यूक्लियस कहा जाता है।
इन जेट्स से निकलने वाली भयानक ऊर्जा आसपास की गैसों को गर्म कर देती है। इससे नए तारों के बनने की गति नियंत्रित होती है। वैज्ञानिक सिमुलेशन मॉडल में इस प्रक्रिया का उपयोग करके यह समझने की कोशिश करते हैं कि शुरूआती ब्रह्मांड में गैलेक्सियां किस तरह विकसित हुई थीं।
रेडियो गैलेक्सी में खोज
शोधकर्ताओं की टीम ने कहा कि इतनी बड़ी रेडियो गैलेक्सी मिलने के बाद हमें लगता है कि अंतरिक्ष में अभी भी रहस्यों का पिटारा छिपा हुआ है। अब तक अंतरिक्ष के बारे में हमें बहुत कम ज्ञान है। फिलहाल हमारी टीम इसके विशाल आकार पर अध्ययन कर रही है। खोज टीम के अन्य सदस्य मार्टिन ओई के अनुसार अगर इस बड़ी गैलेक्सी के बनने के पीछे किसी छोटी गैलेक्सी का हाथ है तो वह अब भी इसी के अंदर मौजूद होगी। उसी की वजह से इसका आकार लगातार बढ़ रहा है। हमें बस उसी की खोज करनी है। यह 5.04 मेगापारसेक्स चौड़ा यानी हमारी आकाशगंगा की चौड़ाई से 100 गुना ज्यादा है। इस आकाशगंगा में इतने तारे हैं, जिनका वजन हमारे सूरज से अरबों गुना ज्यादा है। इसके अंदर मौजूद ब्लैकहोल 40 करोड़ सोलर मास के बराबर है। इसके अंदर मौजूद दबाव क्षेत्र इसे सबसे विशेष बनाता है। जो किसी रेडियो गैलेक्सी के अंदर मौजूद सबसे गर्म इंटरगैलेक्टिक माध्यम है। टीम ने अनुमान लगाया है कि इस होस्ट गैलेक्सी का कुल द्रव्यमान करीब 2 ट्रिलियन सौर द्रव्यमान हो सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस खोज को लेकर कुछ अनिश्चितताएं जरुर हैं लेकिन इस खोज ने साबित कर दिया है कि शुरूआती ब्रह्मांड में छिपी विशालकाय गैलेक्सियों की संख्या हमारी पुरानी सोच से कहीं ज्यादा है।





