कूनो राष्ट्रीय उद्यान पहुंचे बोत्सवाना से लाए गए नौ चीते 

जनप्रवाद ब्यूरो। कूनो नेशनल पार्क में शनिवार की सुबह इतिहास के एक और पन्ने पर चीते के पंजों के निशान दर्ज हो गए। बोत्सवाना से 12 घंटे की हवाई यात्रा के बाद 9 नए चीते भारत पहुंचे और हेलीकॉप्टर से कूनो लाकर सीधे क्वारंटीन बाड़ों में शिफ्ट कर दिए गए हैं। इसके साथ ही देश में चीतों की कुल संख्या 39 से बढ़कर 48 हो गई है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि देश में चीतों की आबादी फिर से बढ़ाने के लिए चार वर्षीय चीता पुनर्वास योजना के तहत अफ्रीका से तीसरी बार चीतों को लाया गया है। इन चीतों को भारतीय वायुसेना (आईएएफ) के विमान से लाया गया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव पार्क में तैयार बाड़ों में इन चीतों को छोड़ेंगे।
6 मादा और 3 नर चीते

श्योपुर की जनसंपर्क अधिकारी अवंतिका श्रीवास्तव ने संवाददाताओं को बताया कि बोत्सवाना से चीतों को भारतीय वायुसेना के विमान से ग्वालियर लाया गया और वहां से वायुसेना के हेलीकॉप्टरों के जरिए उन्हें केएनपी पहुंचाया गया। अधिकारियों ने बताया कि इससे पहले नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से भी चीतों को यहां लाया जा चुका है। प्रोजेक्ट चीता के निदेशक उत्तम शर्मा ने कहा कि भारतीय वायुसेना ने चीतों के पुनर्वास कार्यक्रम में अहम भूमिका निभाई है। वायुसेना ने फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से तथा सितंबर 2022 में नामीबिया से चीतों को भारत पहुंचाया था।
चीता पुनर्वास कार्यक्रम को मिलेगी मजबूती 

अधिक चीतों के आने से भारत के चीता पुनर्वास कार्यक्रम को मजबूती मिलेगी। केंद्र सरकार के सहयोग से हम जल्द से जल्द इनकी संख्या 50 तक पहुंचाने का लक्ष्य रखते हैं। शर्मा ने बताया कि तीन चीतों को गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में स्थानांतरित किया गया है, जबकि 36 चीते कूनो में ही हैं। अधिकारियों ने कहा कि विलुप्तप्राय प्रजातियों को सामान्यत: एक ही आवास में नहीं रखा जाता, क्योंकि किसी संक्रामक बीमारी के फैलने पर पूरी आबादी को खतरा रहता है। चीता करीब सात दशक पहले भारत से विलुप्त हो गया था। पिछले वर्ष उद्यान में 12 शावकों का जन्म हुआ था, जिनमें से तीन शावकों समेत छह की मौत हो गई। इस वर्ष सात फरवरी से 18 फरवरी के बीच दो बार में नौ शावकों का जन्म हुआ। वर्ष 2023 से अब तक केएनपी में कुल 39 शावकों का जन्म हुआ है, जिनमें से 27 जीवित हैं। नामीबिया से लाई गई ज्वाला और आशा, दक्षिण अफ्रीका से लाई गई गामिनी, वीरा और निरवा तथा भारत में जन्मी मुखी ने केएनपी में शावकों को जन्म दिया है।